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साइबर ठगों का मायाजाल, रांची सहित कई जिलों की पब्लिक साइबर ठगों के निशाने पर

साइबर ठगों के निशाने पर आम लोग हैं. जरा सी असावधानी से आपके खाते से पूरे पैसे साफ हो सकते हैं.

CYBERCRIMINALS IN JHARKHAND
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 28, 2026 at 5:50 AM IST

8 Min Read
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रिपोर्ट: प्रशांत कुमार

रांची: तमाम तरह के जागरूकता अभियान, ताबड़तोड़ साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद साइबर अपराधी अपने ठगी के धंधे को अंजाम देने में कामयाब हो जा रहे है. राजधानी रांची में तो साइबर अपराधी बेहद हावी हो चुके हैं. हर दूसरे दिन किसी न किसी को साइबर ठग अपने झांसे में फंसा कर उनकी कमाई पर डाका डाल रहे है. रांची वाले सबसे अधिक ठगी के शिकार हो रहे हैं.

राजधानी रांची सबसे अधिक प्रभावित

आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराधी राजधानी रांची सहित चार जिलों के निवासियों को सबसे ज्यादा निशाना बना रहे हैं. रांची में साइबर ठगी के शिकार लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. साल 2024 में रांची के 243 लोगों को साइबर ठगों ने निशाना बनाया और उनके खातों से पैसे गायब कर दिए. साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 338 हो गया.

चार प्रमुख जिलों में साइबर ठगी के मामलों की तुलनात्मक स्थिति
जिलावर्ष 2024 में मामलेवर्ष 2025 में मामलेवृद्धि/परिवर्तन
रांची24333895
जमशेदपुर1301322
देवघर11917556
धनबाद1031063


क्या है पूरे राज्य की स्थिति

पूरे राज्य की बात करें तो साल 2025 में कल 1200 लोगों के साथ साइबर ठगी की गई. साल 2025 में आंकड़े बढ़कर 1400 हो गए यानी राज्य में वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 215 मामले साइबर ठगी के बढ़ गए.

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झारखंड में जिलावार साइबर ठगी के मामले (ETV Bharat)


सीआईडी और एनसीआरबी के डेटा बता रहे बढ़ रही साइबर ठगी

सीआईडी के ताजा आंकड़े और एनसीआरबी के द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है खासकर ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं केवल झारखंड ही नहीं यह स्थिति पूरे देश की है. जानकार बताते हैं कि कुछ एक मामले को छोड़ दें तो इंसान की लालच बढ़ते साइबर अपराध का सबसे प्रमुख कारण उभर कर सामने आया है.

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झारखंड में जिलावार साइबर ठगी के मामले (ETV Bharat)
झारखंड सहित पूरे देश में एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चोरी और साइबर अपराध के मामले थानों में सबसे ज्यादा रिपोर्ट हो रहे हैं. साइबर अपराध झारखंड के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि जामताड़ा जिले को अक्सर "साइबर अपराध की राजधानी" कहा जाता है.

देश में साइबर अपराध में तेज वृद्धि

एनसीआरबी के अनुसार, भारत में साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 2023 में साइबर अपराध के 86,420 मामले दर्ज हुए, जो 2022 के 65,893 मामलों से 31.2% अधिक थे. अधिकांश मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी (फ्रॉड) से जुड़े हैं. पिछले पांच वर्षों में साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है.

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साइबर ठगी के तरीके (ETV Bharat)

राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों से पता चलता है कि साइबर सुरक्षा घटनाएं 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख हो गईं. 2025 में यह संख्या और बढ़ी, जहां कुल 28.15 लाख मामले दर्ज हुए और वित्तीय नुकसान ₹22,495 करोड़ तक पहुंचा. मुख्य वजह लालच है, खासकर उच्च रिटर्न के वादे से.

झारखंड में स्थिति और जामताड़ा का रोल

झारखंड में साइबर अपराध के लिए विशेष साइबर थाने स्थापित हैं. वर्तमान में राज्य में 14 साइबर थाने कार्यरत हैं (रांची, लातेहार, हजारीबाग, दुमका, बोकारो, रामगढ़, चाईबासा, सरायकेला-खरसावां सहित अन्य). आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में हर दिन औसतन दर्जनों साइबर ठगी की शिकायतें आ रही हैं. उदाहरण के लिए, 2025 के पहले छह महीनों में डायल-1930 हेल्पलाइन पर 11,910 शिकायतें दर्ज हुईं, यानी औसतन 66 प्रतिदिन.

जामताड़ा और आसपास के जिलों (देवघर, गिरिडीह, धनबाद) से साइबर अपराधी अक्सर सक्रिय रहते हैं. हाल के वर्षों में पुलिस ने सैकड़ों गिरफ्तारियां की हैं, 2023 से 2025 तक के आंकड़ों में 2,100+ साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए.

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साइबर ठगी से कैसे बचे (ETV Bharat)

जागरूक रहें, सतर्क रहें, साइबर ठगी से बचाव संभव है. यदि कोई ठगी का शिकार हो तो तुरंत नजदीकी साइबर थाने या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.

रांची में हाल के आंकड़े

राजधानी रांची साइबर ठगों के प्रमुख निशाने पर है. हाल के महीनों में कई बड़े मामले सामने आए, जहां निवेश फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से लाखों-करोड़ों की ठगी हुई. उदाहरण के लिए, 2025-2026 के बीच पुलिस ने कई ऑपरेशनों में दर्जनों गिरफ्तारियां कीं, जिसमें मल्टी-डिस्ट्रिक्ट साइबर फ्रॉड रिंग्स का भंडाफोड़ हुआ. रांची साइबर थाने में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, और शहर के निवासी अक्सर फर्जी ऐप्स या कॉल्स का शिकार हो रहे हैं.

केस स्टडी- 1

रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के सहायक प्राध्यापक डॉ. रीझु नायक का मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने उनके परिचितों और सहकर्मियों से मदद करने की बात कहकर 80 हजार रुपए की ठगी कर ली. इस संबंध में प्राध्यापक डॉ रीझु नायक ने साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. प्राप्त विवरण के अनुसार हैकर्स ने डॉ नायक बनकर आपात जरूरत का हवाला देते हुए लोगों से तत्काल ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने को कहा. धोखाधड़ी के इस क्रम में अब तक दो व्यक्ति ठगी का शिकार हो चुके हैं, जिन्होंने 50 हजार रुपये और 30 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए हैं.

केस स्टडी- 2

हिन्दू जागरण मंच के प्रांत संयोजक विक्रम शर्मा का मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने उनके खाते से एक लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली. इस संबंध में विक्रम कुमार ने साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. नगड़ा टोली निवासी विक्रम कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक व्यक्ति ने फोन किया, खुद को आरबीएल बैंक के कस्टमर केयर का कर्मचारी बताया और क्रेडिट कार्ड के लिए एक लिंक भेजा. उस लिंक को ओपन करते ही उनका मोबाइल हैक हो गया. कुछ देर बाद उनके खाते से तीन बार में एक लाख रुपए की अवैध निकासी हो गयी. जिसकी जानकारी उन्हें कुछ देर बाद हुई. जिसके बाद वह थाना पहुंचे और मामला दर्ज कराया.

केस स्टडी- 3

रांची में रहने वाले पलामू जिले के पंडवा थाना क्षेत्र निवासी पंकज कुमार मेहता साइबर ठगी का शिकार हो गए, उन्होंने बताया कि इंस्टाग्राम पर सैमको ऐप के माध्यम से ट्रेडिंग सिखाने के नाम पर उनसे संपर्क किया गया, बाद में व्हाट्सएप के जरिए बातचीत कर 15 अक्टूबर को बिनांस ऐप से यूएसडीटी कॉइन खरीदवाकर फर्जी सैमको ट्रेडिंग अकाउंट में दस हजार रुपये जमा कराए गए. विश्वास जीतने के लिए आंशिक निकासी भी कराई गई, जिसमें ट्रांजेक्शन फीस काटी गई. इसके बाद विभिन्न किश्तों में कुल 4.70 लाख रुपए की ठगी कर ली गई. पीड़ित ने बताया कि एक युवती ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक, मुंबई में कार्यरत बताते हुए भरोसा दिलाया.उसके बाद ठगी की.

केस स्टडी- 4

रांची के एदलहातू की रहने वाली अशोक राम वर्मा बैलेंस चेक करने का झांसा देकर उनके खाते से 9.77 लाख रुपए की ठगी कर ली गई. इस संबंध में अशोक राम वर्मा ने साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. अशोक राम वर्मा ने पुलिस को बताया कि आठ फरवरी को वह एक बैंक का एप से अपने खाते की जानकारी चेक कर रहा था, लेकिन एप नहीं खुला. जिसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर सर्च कर एक मोबाइल नंबर निकालकर उससे संपर्क किया, जिसने उस नंबर पर बात की उनसे फोनधारक ने उनसे खाते की पूरी जानकारी ली, इसके बाद उनके खाते से उनके खाते से 9.77 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली गई.

ये सिर्फ चार मामले ही नहीं है. ऐसी सैकड़ों कहनियां है जिसमें लोगों ने अपने पैसे गंवाए हैं. कई मामलों में साइबर पुलिस जांच कर रही है. हालांकि इनमें कई मामले हैं जिसमें अगर व्यक्ति जागरूक रहे तो ठगी से बच सकता है, जैसे अपने बैंक खाते की जानकारी किसी को नहीं देने और ओटीपी किसी को नहीं बताना शामिल है.

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