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देश के 12 राज्यों के 32 विश्वविद्यालय फर्जी; हजारों स्टूडेंट के भविष्य का क्या, उनके पास क्या विकल्प?

5 साल में 100 से अधिक विश्वविद्यालय निकले फेक, दांव पर करियर, एडमिशन लेते समय कहां हो रही चूक.

स्टूडेंट मुआवजे के लिए कर सकते हैं दावा.
स्टूडेंट मुआवजे के लिए कर सकते हैं दावा. (Photo Credit; Getty)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 25, 2026 at 3:51 PM IST

11 Min Read
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हैदराबाद : पढ़-लिखकर अच्छा मुकाम हासिल करने की हसरतें स्टूडेंट को विश्वविद्यालयों की ओर खींच लाती हैं. वे जल्दबाजी में मोटी फीस देकर मनचाहे कोर्स में दाखिला ले लेते हैं. कुछ समय बाद उन्हें पता चलता है कि जिस यूनिवर्सिटी में उन्होंने एडमिशन लिया है, वह फर्जी है. इससे उनकी टेंशन बढ़ जाती है. कहां जाएं?, क्या करें?, फीस कैसे वापस होगी?, क्या डिग्री भी अवैध मानी जाएगी?, ऐसे कई सवाल स्टूडेंट को ठीक से सोने नहीं देते हैं.

मौजूदा समय कुछ ऐसी ही मनोदशा से देश के हजारों स्टूडेंट गुजर रहे हैं. दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई की जाती है. हाल ही में यूजीसी (University Grants Commission) ने देश के 12 राज्यों के 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की लिस्ट जारी किया है. दो साल पहले 8 राज्यों में इनकी संख्या 20 के करीब थी. अब इनका विस्तार हो चुका है. लिस्ट के मुताबिक दिल्ली में सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी हैं. जबकि दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है.

यूजीसी की इस लिस्ट ने हायर एजुकेशन में शिक्षा माफियाओं के बढ़ते दखल पर बहस छेड़ दी है. कैसे मिलती है विवि को मान्यता?, फर्जी मानने का क्या है पैमाना?, फर्जी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे स्टूडेंट के पास क्या-क्या विकल्प रहते हैं?, स्टूडेंट असली-नकली का फर्क कैसे जाने?, दाखिले के वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?, ये जानने के लिए पढ़िए ईटीवी भारत की खास रिपोर्ट...

दिल्ली के कितने विश्वविद्यालय फर्जी? : दिल्ली की ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस अलीपुर, कॉमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड दरियागंज, यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी, एडीआर सेंट्रिक ज्यूरीडिकल यूनिवर्सिटी राजेंद्र प्लेस, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी) रोहिणी फर्जी मिले हैं.

इसके अलावा वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (डब्ल्यूपीयूएनयू) पीतमपुरा, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग मुबारकपुर, माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी नेहरू प्लेस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सोल्यूशन जनकपुरी भी फर्जी विश्वविद्यालयों की लिस्ट में शामिल हैं.

पांच सालों में इतने विश्वविद्यालय मिले फर्जी.
पांच सालों में इतने विश्वविद्यालय मिले फर्जी. (Graphics Credit; ETV Bharat)

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उत्तर प्रदेश और पुडुचेरी की ये यूनिवर्सिटियां भी फर्जी : उत्तर प्रदेश की गांधी हिंदी विद्यापीठ प्रयागराज, महामाया टेक्निकल (प्राविधिक), नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) अलीगढ़, भारतीय शिक्षा परिषद भारत भवन लखनऊ यूनिवर्सिटी भी फर्जी हैं. इसी कड़ी में पुडुचेरी की श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन थीलसपेट, उषा लात्चुमनन कॉलेज ऑफ एजुकेशन वाझापडियार नगर भी फेक हैं.

आंध्र प्रदेश-अरुणाचल प्रदेश-हरियाणा : फर्जी विश्वविद्यालयों में आंध्र प्रदेश की क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी गुंटूर, बाइबल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इंडिया विशाखापट्टनम, अरुणाचल प्रदेश की इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन और हरियाणा की मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी फरीदाबाद भी शामिल हैं. यूजीसी ने साफ तौर पर हिदायत दिया है कि ऐसे विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने पर डिग्री किसी काम की नहीं रहेगी. नौकरी में भी यहां की डिग्रियों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.

कनार्टक-राजस्थान-झारखंड : फर्जी तरीके से चल रहीं विश्वविद्यालयों की फेहरिस्त में कनार्टक की सर्व भारतीय शिक्षा पीठ तुमकुर, ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी बेंगलुरु, राजस्थान की राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अलवर, झारखंड की दक्ष यूनिवर्सिटी (वोकेशनल और लाइफ स्किल एजुकेशन) रांची भी शामिल हैं. यूजीसी की ओर से ऐसे विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई के लिए राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं.

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दाखिला लेते समय क्या बरतें सावधानी? : स्टूडेंट को कभी भी जल्दबादी में किसी भी संस्थान में दाखिला नहीं लेना चाहिए. उन्हें यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूदा समय की स्वीकृत विश्वविद्यालयों की लिस्ट देखनी चाहिए. इसमें उन्हीं विश्वविद्यालयों के नाम शामिल होते हैं जिन्हें यूजीसी एक्ट 1956 के तहत मान्यता मिली हो. इसके जरिए उन्हें यह पता लग जाएगा कि जिस संस्थान में वे प्रवेश लेने जा रहे हैं वह वैध या नहीं.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय या संस्थान को कानूनी रूप से 'यूनिवर्सिटी' शब्द का उपयोग करने और BA, BSc, MA आदि की डिग्री देने के लिए केंद्र सरकार (संसद) या राज्य सरकार (राज्य विधानमंडल) की ओर से पारित विशेष कानून के तहत स्थापित होना अनिवार्य है. स्टूडेंट को इस नियम का पालन करने वाली यूनिवर्सिटी में ही दाखिला लेना चाहिए.

ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) के किसी भी प्रोग्राम में दाखिला लेने से पहले भी जांच-पड़ताल करनी चाहिए. यह पक्का कर लेना चाहिए कि ऐसे प्रोग्राम UGC से अप्रूव्ड यूनिवर्सिटी ही चला रही है. बिना मान्यता वाले संस्थानों से मिली डिग्री मान्य नहीं होती है. इनका इस्तेमाल न तो एजुकेशन के मकसद से किया जा सकता है, और न ही नौकरियों के लिए. इसके लिए स्टूडेंट ताजा जानकारी से अपडेट रहे. फेक विश्वविद्यालयों की जानकारी यूजीसी की वेबसाइट से लेते रहे.

फर्जी विश्वविद्यालयों के कारण कितना नुकसान? : फरवरी 2026 की लिस्ट के अनुसार फर्जी पाए गए 32 विश्वविद्यालयों की वजह से स्टूडेंट को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. एक यूनिवर्सिटी प्रति छात्र सालाना 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक फीस लेती है. वहीं एक विश्वविद्यालय में करीब 500 से दो हजार तक स्टूडेंट हो सकते हैं. इसके आधार पर स्टूडेंट की संख्या 50 हजार से अधिक हो सकती है. ऐसे में स्टूडेंट का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ.

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क्या स्टूडेंट को मिल सकता है मुआवजा? : अभी कोई ऐसा नियम नहीं है जिसका सहारा लेकर स्टूडेंट किसी तरह के मुआवजे के लिए दावा कर सकें. UGC सिर्फ ऐसे संस्थानों को नकली घोषित कर सकता है, लोगों को आगाह कर सकता है, लेकिन फीस वापस कराने या प्रभावित स्टूडेंट्स को सीधे मुआवजा दिलाने के संबंध में फिलहाल कोई खास नियम नहीं है. हालांकि एक्सपर्ट के अनुसार यूजीसी इसमें मदद जरूर कर सकता है.

फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई के लिए कई प्रावधान हैं.
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई के लिए कई प्रावधान हैं. (Graphics Credit; ETV Bharat)

स्टूडेंट के पास क्या हैं कानूनी अधिकार? : यूजीसी के पास UGC एक्ट 1956 के तहत किसी भी यूनिवर्सिटी को रेगुलेट करने और बिना मान्यता वाली यूनिवर्सिटी को नकली घोषित करने का अधिकार है. इंडियन पीनल कोड (IPC) के तहत धोखाधड़ी करने वाली यूनिवर्सिटी पर जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. राज्य सरकारें ऐसी फेक संस्थानों पर कार्रवाई करती हैं.

राज्य सरकारें सीधे तौर पर पीड़ित स्टूडेंट को मुआवजा नहीं दिला सकती हैं. इसके लिए स्टूडेंट को खुद ही अपनी आवाज बुलंद करनी होगी. स्टूडेंट कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत धोखाधड़ी करने वाले विश्वविद्यालय या संस्थान के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं. अगर वो अपने साथ हुए फर्जीवाड़े को साबित करने में सफल हो जाते हैं तो उन्हें मुआवजा मिल सकता है. इसके लिए उन्हें कंज्यूमर कोर्ट में जाना पड़ सकता है.

ऐसे मामलों में काफी स्टूडेंट रुपये खर्च होने के कारण केस फाइल नहीं करते हैं तो कई समय के अभाव के कारण पीछे हट जाते हैं. वहीं एक समस्या यह भी है कि अगर कोर्ट किसी फर्जी विश्वविद्यालय को संबंधित स्टूडेंट को मुआवजा देने का आदेश भी जारी कर दे तो भी उस संस्थान से रिकवरी मुश्किल हो जाती है.

इसके पीछे का कारण ये है कि फर्जी यूनिवर्सिटी अक्सर बंद हो जाती हैं. यही वजह है कि बहुत कम केस में ही छात्रों को कुछ रिफंड वापस मिल पाते हैं. हालांकि अगर स्टूडेंट ग्रुप में एक साथ केस फाइल करें तो इससे वे संबंधित संस्थान पर दबाव बना सकते हैं.

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कौन होता है धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार?: स्टूडेंट से धोखाधड़ी के लिए सीधे तौर पर फर्जी यूनिवर्सिटी ही जिम्मेदार होती हैं. इनकी कोई पहचान नहीं होती है. ये गैर कानूनी तरीके से काम करते हैं. यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट भी इनके झांसे में आकर इनके झूठ को सच मान लेते हैं. स्थानीय स्तर पर किसी तरह की शिकायत न आने पर ऐसे संस्थान काफी समय तक स्टूडेंट को गुमराह कर मोटी फीस वसूलते रहते हैं. यूजीसी समय-समय पर दस्तावेजों आदि के आधार पर इनकी मान्यता की जांच कराता रहता है.

देश के विश्वविद्यालयों में इतने स्टूडेंट करते हैं पढ़ाई.
देश के विश्वविद्यालयों में इतने स्टूडेंट करते हैं पढ़ाई. (Graphics Credit; ETV Bharat)

नई यूनिवर्सिटी खोलने के क्या हैं नियम? : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार UGC एक्ट के सेक्शन 3 के तहत केंद्र सरकार उन जाने-माने एजुकेशनल संस्थानों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देती है. ये ऐसे संस्थान होते हैं जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते हैं. वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोई भी नया विश्वविद्यालय खोलने के लिए 20 एकड़ जमीन होनी चाहिए. इसमें 40% हिस्सा खुला होना चाहिए. पहाड़ी और महानगरीय इलाके में 10 एकड़ जमीन हो तो भी काम चल सकता है. इनमें से तीन एकड़ पर हरियाली होनी चाहिए.

प्राइवेट यूनिवर्सिटी को फर्स्ट डिग्री और पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री/डिप्लोमा प्रोग्राम से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी, जिसमें करिकुलम स्ट्रक्चर, कंटेंट, पढ़ाने और सीखने का प्रोसेस, परीक्षा और मूल्यांकन सिस्टम समेत कई जानकारियां यूजीसी को देनी होती है. इसके अलावा अन्य प्रक्रियाओं का भी पालन करना होता है. इसके बाद ही कानूनी तरीके से नई यूनिवर्सिटी खोली जा सकती है.

किसी विश्वविद्यालय को फर्जी मानने का आधार क्या है?: शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यूजीसी की ओर से सभी विश्वविद्यालयों के लिए कई नियम निर्धारित किए गए हैं. अगर कोई यूनिवर्सिटी UGC एक्ट के खिलाफ काम करती है तो उसे आधिकारिक रूप से फर्जी मान लिया जाता है. कुछ संस्थान अलग-अलग सब्जेक्ट में अंडरग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट डिग्री बांटने लगते हैं, जबकि ये यूजसी एक्ट में नहीं आते हैं. ऐसे हाल में भी ऐसे विश्वविद्यालय को फर्जी मान लिया जाता है.

देश में कितनी सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटी?: यूजीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च साल 2024 तक देश में 57 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, 482 स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी, 478 स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 136 डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी हैं. इसके बाद लिस्ट को अपडेट करके इसमें 1 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, 20 स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी, 48 स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 12 डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी और शामिल की गईं. देश के कई राज्यों में विश्वविद्यालय खुले हैं. हालांकि 3 केंद्र शाषित प्रदेशों में कोई विश्वविद्यालय नहीं है. इनमें दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव व लक्षद्वीप शामिल हैं.

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