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उत्तरकाशी की 122 साल पुरानी रामलीला, यहां भगवान राम का नहीं होता राजतिलक, जानें क्या है मिथक

उत्तरकाशी में 122 वर्ष से ऐतिहासिक रामलीला का मंचन हो रहा है. पात्र घर ना जाकर मंदिर परिसर में ही रहते हैं.

Uttarkashi Ramlila
राम के पात्र की जगह नागदेवता का होता है राजतिलक (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 5, 2026 at 3:29 PM IST

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सूर्य प्रकाश नौटियाल

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के सीमांत उत्तरकाशी जनपद में खेती बाड़ी का काम निपटने के बाद इन दिनों ग्रामीण आंचलों में रामलीला का मंचन चल रहा है. यूं तो रामलीला हर गांव में होती है, लेकिन कुछ गांवाें में रामलीला का मिथक जुड़ा हुआ है. भटवाड़ी विकासखंड के गोरशाली गांव में टिहरी रियासत के समय शुरू हुई रामलीला में आज भी राजतिलक राम के पात्र के स्थान पर वासुकी नाग का प्रतीकात्मक रूप में किया जाता है. वहीं संग्राली गांव की रामलीला में अगर निःसंतान व्यक्ति जनक का किरदार निभाता है, तो उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होती है. यह गांव की आस्था और धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है.

122 वर्ष से चली आ रही परंपरा: भटवाड़ी विकासखंड के गोरशाली गांव में टिहरी रियासत के समय शुरू हुई रामलीला में आज भी राजतिलक राम के पात्र के स्थान पर वासुकी नाग का प्रतीकात्मक रूप में किया जाता है. टिहरी राजा के निर्देश पर यह परंपरा करीब 122 वर्षों से चली आ रही है. गोरशाली गांव की रामलीला को हर्षिल के फेडरिक विल्सन ने भी सम्मानित किया था. चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल बताते हैं कि वर्ष 1903 में आलम सिंह चौहान ने अपने घर से अपने गायत्री गुरु दिवंगत मोतीराम नौटियाल के मार्गदर्शन में रामलीला शुरू की.

उत्तरकाशी की 122 साल पुरानी रामलीला (ETV Bharat)

राम के पात्र की जगह नागदेवता का होता है राजतिलक: तीन-चार वर्षों तक घर के अंदर ही रामलीला का अभ्यास किया. उसके बाद वर्ष 1907 को नाग देवता के मंदिर प्रांगण दो थौकी ग्राम वासियों के सहयोग से मंगसीर बलिराज के दिन तांबे की ध्वजा रोपित की गई. यह आज भी मन्दिर प्रांगण में गड़ी हुई है. मंगसीर पंचमी तिथि से रामलीला की शुरुआत की परंपरा राम वासवानंद नौटियाल, लक्ष्मण मंसाराम नौटियाल और सीता नारायण सिंह राणा द्वारा बनाई गई. गोरशाली गांव की रामलीला की सूचना राजा के गुप्तचरों ने टिहरी नरेश को दी कि गोरशाली में रामलीला के दौरान राजमुकुट धारण किए जाते हैं. यह उनका अपमान है.

Uttarkashi 122 Year Ols Ramlila
रामलीला में लक्ष्मण शूर्पणखा संवाद. (ETV Bharat)

स्थानीय लोगों ने क्या कहा: इस पर राजा ने तुरंत राजाज्ञा कर रामलीला पर प्रतिबंध लगाने का आदेश भेज दिया. इस पर स्थानीय निवासी मातबर सिंह और अभि सिंह राणा ने वनों के मालदारी के कारोबारी राधावल्लभ खंडूड़ी और घनानंद खंडूड़ी को इस संबंध में बताया. उसके बाद उन्होंने राजा से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की. तब राजा ने आदेश दिया कि राजतिलक वासुकी नाग देवता का किया जाए. उसके बाद से आज तक भी प्रतीकात्मक रूप रामलीला के अंत में नाग देवता को प्रतीकात्मक ही राजतिलक दिया जाता है.

Uttarkashi 122 Year Ols Ramlila
लक्ष्मण के मूर्छित होने के बाद श्री राम संवाद. (ETV Bharat)

14 दिनों तक घर में नहीं जाते पात्र: डाॅ. माधव प्रसाद शास्त्री के अनुसार, आज भी अनेक परंपराओं को गोरशाली गांव के लोग जीवित रखे हुए हैं. रामलीला के अवसर पर सभी पात्र एवं कार्यकर्ता मंदिर में ही शयन करते हैं. सुबह पूरे गांव में प्रभात फेरी करते हैं. वहीं, हनुमान जी के मंदिर के सामने सुन्दर काण्ड पाठ, 100 हनुमान चालीसा पाठ, रामचरित का मूल पाठ, पूजन हवन आदि धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.

Uttarkashi 122 Year Ols Ramlila
रामलीला के कलाकार. (ETV Bharat)

चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल ने बताया कि गोरशाली गांव में इन दिनों रामलीला का मंचन किया जा रहा है. इसमें जो भी रामलीला का मंचन करता है, वह सब पात्र मंदिर परिसर में ही सोते हैं. 14 दिनों तक वह इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरे तन मन से निभाते हैं. वह 14 दिनों तक घर में नहीं जाते हैं.

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