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Explainer: औद्यागिक क्षेत्र पर टिकी है झारखंड की अर्थव्यवस्था, व्यवसायियों ने बताए और कहां हो सकते हैं सुधार

झारखंड की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक क्षेत्र का अहम योगदान है. सरकार को इसे और प्रोत्साहित करने की जरूरत है. रिपोर्ट- भुवन किशोर झा.

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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : September 1, 2026 at 3:37 PM IST

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रांची: झारखंड की अर्थव्यस्था विभिन्न क्षेत्रों पर निर्भर है, जिनमें कृषि, खनिज संपदा आदि का अहम योगदान है. लेकिन औद्योगिक क्षेत्र का इस अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण योगदान है. झारखंड की अर्थव्यवस्था का लगभग 45.8 फीसदी औद्यागिक क्षेत्र पर निर्भर है. जो देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है और यह अबतक का सबसे अधिक भी माना जा रहा है.

राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धित (GSVA) में औद्योगिक क्षेत्र के इस योगदान की गति बनी रहे, इसके लिए झारखंड सरकार लगातार कदम उठा रही है. जिसके कारण विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राज्य में साल-दर-साल उद्योगों की संख्या में वृद्धि होती गई है. औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े व्यवसायी और अर्थशास्त्री ने भी इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. साथ ही उन्होंने झारखंड की अर्थव्यवस्था में और सुधार और चुनौतियों के बारे में भी बताया.

औद्यागिक क्षेत्र पर टिकी है झारखंड की अर्थव्यवस्था (Etv Bharat)

झारखंड में उद्योग

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान समय में झारखंड में 2,953 उद्योग हैं, जिनमें 26 मेगा, 106 वृहत तथा 18,109 लघु एवं सूक्ष्म उद्योग शामिल हैं. इनमें 28,424.06 करोड़ रुपये का निवेश है, जहां 63,000 लोग कार्यरत हैं और 2,41,270 लोग किसी-न-किसी रूप में इसमें भागीदारी निभा रहे हैं. इसके अलावा करीब 63,000 एमएसएमई के जरिए लाखों लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं. इससे जाहिर तौर पर झारखंड सरकार को हर साल भारी-भरकम आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है.

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झारखंड में उद्योग (Etv Bharat)

अर्थशास्त्री धीरज एम. पाठक कहते हैं, “झारखंड की अर्थव्यवस्था में उद्योग जगत का योगदान करीब 40 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा है. इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि एमएसएमई सेक्टर, जो करीब 63,000 है और जिसमें 95 प्रतिशत माइक्रो यूनिट हैं, इसके जरिए तीन लाख लोगों को रोजगार मुहैया करा रहा है. लेकिन फिर भी बेरोजगारी की तुलना में इसे बेहतर नहीं कहा जा सकता. ऐसे में लोग कृषि क्षेत्र की ओर रुख करते हैं. यदि इन्हें औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ा जाए तो बड़ा लाभ मिलेगा. इसके अलावा औद्योगिक नीति में भी बदलाव कर तीव्र औद्योगीकरण किया जा सकता है.”

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फैक्ट्रियां, निवेश और रोजगार (Etv Bharat)

तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ाने पर जोर

इन दिनों झारखंड सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है. जिसके तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हुई दावोस यात्रा से सरकार को काफी उम्मीदें हैं. परंपरागत उद्योगों के साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग लगाने पर सरकार का जोर है, जिसके लिए उद्योग नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं.

विगत वर्षों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र ने 2023-24 में GSVA का 44.01 प्रतिशत योगदान दिया, जिससे राज्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा के साथ भारत के सिर्फ तीन सबसे औद्योगिक राज्यों में शामिल हो गया था. इस क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार पांच वर्षों से 41 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है.

इसके अलावा 2014-15 से 2025-26 तक के दशक में सकल मूल्य वर्धित (GVA) 26,591 करोड़ रुपये से बढ़कर अनुमानित 63,873 करोड़ रुपये हो गया. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र के पूँजी निर्माण की गति में भी काफी बढ़ोतरी हुई है.

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GSVA में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान (Etv Bharat)

मुख्यतः खनिज संपदा आधारित उद्योग

झारखंड में मुख्यतः खनिज संपदा आधारित उद्योग हैं. देश के पूर्वी भाग में स्थित यह राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरा है, जो देश की करीब 40 प्रतिशत खनिज संपदा समेटे हुए है. खनिज संसाधनों से समृद्ध इस राज्य में कोयला (भारत के भंडार का 27.3 प्रतिशत), लौह अयस्क (भारत के भंडार का 26 प्रतिशत), तांबा अयस्क (भारत के भंडार का 18.5 प्रतिशत), यूरेनियम, अभ्रक, बॉक्साइट, ग्रेनाइट, चूना पत्थर, चांदी, ग्रेफाइट, मैग्नेटाइट और डोलोमाइट शामिल हैं.

यह एकमात्र राज्य है जो कोकिंग कोयला, यूरेनियम और पाइराइट का उत्पादन करता है. यही वजह है कि राज्य में इन खनिज आधारित उद्योगों की बहुतायत है. इसके अलावा झारखंड देश का टसर रेशम (गैर-शहतूत रेशम) में सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसकी कुल उत्पादन में 76.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

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खनिज आधारित उद्योग- राज्य की ताकत (Etv Bharat)

राज्य के विकास में उद्योग की भूमिका अहम

राज्य के विकास में उद्योग की भूमिका अहम है. आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान कीमतों के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में झारखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 6.24 ट्रिलियन रुपये (66.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहने का अनुमान है.

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, अक्टूबर 2019 से मार्च 2026 के बीच झारखंड में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह 19,476.06 करोड़ रुपये (2.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा.

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झारखंड की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक क्षेत्र (Etv Bharat)

वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य से कुल निर्यात 20,847 करोड़ रुपये का रहा. प्रमुख निर्यात वस्तुओं में इंजीनियरिंग सामग्री, अभ्रक, कोयला और अन्य अयस्क, खनिज (प्रसंस्कृत सहित), सभी प्रकार के वस्त्रों के तैयार परिधान और चावल शामिल हैं.

यदि उचित संसाधन मिलें तो झारखंड देश का नंबर वन राज्य बन सकता है. राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उद्योगपतियों का मानना है कि यदि समुचित संसाधन राज्य में उपलब्ध हों तो झारखंड देश का नंबर वन राज्य हो जाएगा.

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झारखंड में फैक्ट्रियां और निवेश (Etv Bharat)

सरकारी प्रक्रियाओं में कई खामियां

जाने-माने उद्योगपति तुलसी महतो कहते हैं, “यह जगजाहिर है कि जिस राज्य में बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री होती हैं, उसका ग्राफ निश्चित रूप से ऊपर रहता है और वह विकसित राज्य कहलाता है. हमारे यहां जो भी बड़े उद्योग हैं, वे आजादी से पहले के हैं. मगर मुझे नहीं लगता कि झारखंड बनने के बाद कोई भी बड़ा उद्योग लगा हो. हमारा राज्य खनिज प्रधान राज्य है, जहां विधि व्यवस्था से लेकर सरकारी प्रक्रियाओं तक कई तरह की खामियां हैं, जिस वजह से कोई भी उद्योग लगाने से पहले काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.”

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झारखंड में उद्योग (Etv Bharat)

व्यवसायी पवन शर्मा कहते हैं, “बिना उद्योग के न तो सरकार नौकरी दे पाएगी, चाहे वह सरकारी उद्योग हो या निजी. विकास के साथ-साथ रोजगार जुड़ा हुआ है, जो किसी भी राज्य के लिए आवश्यक है. यही वजह है कि इसे प्राथमिकता देने की परंपरा हर समय रही है.”

महिला उद्यमी ज्योति कुमारी कहती हैं, “किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को यदि आपको देखना हो तो आपको उस राज्य के औद्योगिक विकास को देखना होगा. रोजगार सृजन के साथ-साथ इसके माध्यम से आर्थिक गतिविधि भी उद्योग जगत से प्रभावित होती है. मगर दुर्भाग्य से हमारे राज्य में वह माहौल नहीं है, जिसके कारण व्यवसायियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.”

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झारखंड में उद्योग (Etv Bharat)

व्यवसायी दीनदयाल वर्णवाल कहते हैं, “राज्य सरकार को सबसे पहले पुराने और स्थापित उद्योगों से जुड़े लोगों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए, जिससे औद्योगिक माहौल बन सके. नहीं तो दावोस एवं अन्य जगहों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए की गई पहल बेकार हो जाएगी.”

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