कांग्रेस ने ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर स्टूडेंट्स 'बर्बरता' पर अमित शाह से बयान मांगा
कांग्रेस के वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर स्टूडेंट्स पर 'बर्बरता' पर अमित शाह से बयान मांगा.

Published : August 10, 2026 at 1:50 PM IST
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और लोक लेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा कि वे गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जंतर-मंतर पर हाल के प्रदर्शन के दौरान युवाओं और स्टूडेंट्स के खिलाफ कथित पुलिस अत्याचार और पैलेट गन के इस्तेमाल पर एक विस्तृत बयान देने का निर्देश दें.
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में उन्होंने लिखा, "मैं दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स और युवाओं के खिलाफ पुलिस की बेरहमी और बेवजह बल प्रयोग, जिसमें पैलेट गन से फायरिंग भी शामिल है, की बहुत दुखद खबरों की ओर आपका ध्यान खींचने के लिए लिख रहा हूं."
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने वाले युवा नागरिकों के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की गई कठोर कार्रवाई गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है और इसकी तत्काल संसदीय जांच की मांग करती है.
Wrote to the Hon’ble Lok Sabha Speaker urging him to demand Home Minister Amit Shah’s statement on the police brutalities on students - on the floor of the House.
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) August 10, 2026
The Delhi Police and the CRPF, which were at the forefront of the violence against students, report to his… pic.twitter.com/G1KoxDOg3v
इस मामले पर गृह मंत्री के बयान की विपक्ष की मांग को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के तहत काम करती है, इसलिए इन कामों की आखिरी जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह की है. संविधान के आर्टिकल 77 के तहत राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए भारत सरकार (बिजनेस का बंटवारा) नियमों के तहत, गृह मंत्री असल में अपने मंत्रालय के दायरे में आने वाले सभी मामलों के प्रभारी होते हैं, इसके अलावा, संविधान का अनुच्छेद 75(3) स्पष्ट रूप से अधिदेश देता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होगी."
वेणुगोपाल ने कहा, "हमारे संसदीय लोकतंत्र का यह बुनियादी सिद्धांत यह पक्का करता है कि कार्यपालिका पूरी तरह से विधायिका के प्रति जवाबदेह रहती है."
उन्होंने कहा कि यह गृह मंत्री की साफ संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सदन के सामने पेश हों और अपने मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाली पुलिस फोर्स की कार्रवाई के लिए जवाब दें.
"इस सदन के अधिकारों और खास अधिकारों के अभिरक्षक के तौर पर, आपके पास यह पक्का करने की अंदरूनी ताकत है कि कार्यपालिका संसद के प्रति जवाबदेह बनी रहती है."
आर्टिकल 77 के आदेश को आर्टिकल 75 के साथ मिलाकर, चेयर के पास गृह मंत्री को सदन में आने का निर्देश देने का अधिकार है.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "अगर मंत्री इतने बड़े मामले पर बात करने के लिए अपनी मर्जी से पेश नहीं होते हैं, तो यह स्पीकर की ड्यूटी बन जाती है कि वह संसदीय जवाबदेही की पवित्रता बनाए रखने के लिए उनकी मौजूदगी पक्की करें."
विपक्ष की ओर से उन्होंने अध्यक्ष से संविधान में निहित प्रावधानों के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करने और गृह मंत्री को तत्काल सदन में आने का निर्देश देने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को दिल्ली में युवाओं और छात्रों के खिलाफ पुलिस के अत्याचार और पैलेट गन के इस्तेमाल के बारे में सदन में एक पूरा बयान देने और सवालों के जवाब देने के लिए मजबूर होना चाहिए.
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