कांग्रेस और DMK में नहीं बन पा रही बात, पावर शेयरिंग की मांग को खारिज कर रहे स्टालिन
कांग्रेस आने वाले तमिलनाडु चुनावों के लिए सीट बंटवारे को लेकर डीएमके के साथ कड़ी मोलभाव कर रही है.

Published : March 3, 2026 at 7:11 PM IST
|Updated : March 3, 2026 at 10:46 PM IST
अमित अग्निहोत्री
नई दिल्ली: तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई हो चला है. कांग्रेस सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ चुनावी मोलभाव कर रही है. वह राज्य में होने वाले विधानसभा चुनवा से पहले 25 से ज्यादा सीटों और पावर शेयरिंग की अपनी दो मुख्य मांगों पर अड़ी हुई है.
तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर अप्रैल में चुनाव होंगे. इसको लेकर मार्च के पहले हफ्ते में चुनाव आयोग से घोषणा की उम्मीद है. डीएमके के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन को एनडीए को हराने की उम्मीद है. कांग्रेस दो दशकों से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन कर रही है, लेकिन इस बार बेहतर डील की उम्मीद में खुद को मजबूत कर रही है.
कांग्रेस के इस दावे से डीएमके के साथ तनाव का माहौल पैदा हो गया है. दोनों पार्टियों के बीच इस मुद्दे को लेकर गरमागरम बातचीत चल रही है. वहीं, सत्तारूढ़ डीएमके ने कांग्रेस की पावर शेयरिंग की मांग को खारिज कर दिया है, लेकिन इस सबसे कांग्रेस को गठबंधन में बनाए रखने के लिए 25 सीटें और 2 राज्यसभा सीटें देने की पेशकश की है.
सूत्रों के मुताबिक, डीएमके ने कांग्रेस से राज्यसभा सीटों पर अपनी स्थिति साफ करने को कहा था क्योंकि क्षेत्रीय पार्टी 5 मार्च को नामांकन दाखिल करने की डेडलाइन से पहले चार राज्य सभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को फाइनल करना चाहती थी.
कांग्रेस अपनी तरफ से गठबंधन बनाए रखना चाहती है, लेकिन उसने डीएमके के ऑफर को यह कहते हुए मना कर दिया है कि वह पहले विधानसभा सीटों की संख्या और पावर शेयरिंग पर बातचीत साफ करना चाहती है. कांग्रेस के अंदर के लोगों ने कहा कि उन्होंने 39 विधानसभा सीटें मांगी हैं, जो तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों पर एक सीट के बराबर है, साथ ही कैबिनेट बर्थ और अलग-अलग बोर्ड और कॉर्पोरेशन में भी हिस्सा मांगा है.
तमिलनाडु के AICC इंचार्ज गिरीश चोडणकर, जो सीट-शेयरिंग के लिए कांग्रेस पैनल के अध्यक्ष हैं, ने 28 फरवरी को डीएमके पैनल से मुलाकात की थी. कांग्रेस सीट-शेयरिंग बातचीत में देरी को लेकर चिंतित थी, लेकिन बुलाए जाने पर परामर्थ में शामिल हुई और सहयोगी के सामने अपनी मांगों को आधिकारिक तौर पर सूचिबद्ध किया.
AICC के तमिलनाडु इंचार्ज गिरीश चोडणकर ने ईटीवी भारत को बताया, "हमने DMK के सामने अपनी मांगें रखी हैं. बातचीत चल रही है. 25 सीटों का ऑफर हमें मंजूर नहीं है. जहां तक राज्यसभा सीटों की बात है, तो इस मामले पर तभी बात हो सकती है जब विधानसभा सीटों की संख्या साफ हो जाए. हमें पॉजिटिव नतीजे की उम्मीद है." डीएमके और कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ने पर, सीट-शेयरिंग के मुद्दे पर 1 मार्च को पार्टी के पूर्व चीफ सोनिया गांधी और राहुल गांधी और कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे समेत शीर्ष नेतृत्व ने चर्चा की.
3 मार्च को, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हाईकमान का मैसेज दिया. तमिलनाडु कांग्रेस चीफ सेल्वापेरुंथगई, जो अलायंस पैनल के सदस्य हैं, चिदंबरम के साथ गए थे. अंदर के लोगों ने बताया कि चिदंबरम को भेजना इस बात का इशारा था कि हाईकमान इस मामले में कितनी गंभीर है. 3 दिसंबर, 2025 से जब कांग्रेस पैनल अपनी दो खास मांगों को लेकर पहली बार मुख्यमंत्री से मिला था, तब से इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के राज्य नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी.
यह मुद्दा राहुल गांधी तक पहुंचा था, जिन्होंने जमीनी हालात की समीक्षा की और गठबंधन के मामलों पर फैसला खुद लिया. इसके बाद राहुल ने AICC के संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल को 22 फरवरी को चेन्नई में CM स्टालिन से मिलने के लिए भेजा. 23 फरवरी को, गिरिश DMK सांसद कनिमोझी से मिले. फिर भी, दोनों पक्ष सीट-शेयरिंग फॉर्मूला पर सहमत नहीं हो पाए हैं.
2021 के चुनावों में कांग्रेस ने 25 सीटों में से 19 सीटें जीती थीं, लेकिन पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि, कांग्रेस पार्टी का कड़ा रुख तमिलनाडु के कार्यकर्ताओं के बीच आम भावना को दिखाता है.
AICC पदाधिकारी चेला कुमार ने कहा कि कांग्रेस ने गठबंधन के लिए पहले भी कुर्बानी दी है और अब DMK को इस पर विचार करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिणी राज्य में एक सेक्युलर गठबंधन जरूरी था और कांग्रेस के बिना ऐसा समझौता सफल नहीं होगा.
चेला कुमार ने ईटीवी भारत को बताया, "कांग्रेस 1980 में 110 सीटों पर चुनाव लड़ी थी तब से, उसने हमेशा समझौते किए हैं. नतीजतन, पार्टी ने पूरे राज्य में अपनी मौजूदगी कम कर दी, लेकिन कार्यकर्ता अब बेहतर डील चाहते हैं. यही वजह है कि हम अलग-अलग स्तर पर ज्यादा सीटें और सत्ता में हिस्सेदारी मांग रहे हैं. ये दोनों ही किसी भी राजनीतिक पार्टी की असली मांगें हैं."
AICC पदाधिकारी ने चल रही सीट-शेयरिंग बातचीत पर कमेंट करने से इनकार कर दिया, लेकिन उम्मीद जताई कि गठबंधन का मुद्दा जल्द ही खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा, "बातचीत चल रही है और आगे हाईकमान फैसला करेगा. इसलिए, मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा". हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि बातचीत जल्द ही खत्म हो जाएगी. तभी आखिरी तस्वीर सामने आएगी."
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