अंकिता केस: CBI जांच के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' सार्वजनिक क्यों नहीं किए, क्या नीयत में खोट? कांग्रेस के सवाल
अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की सिफारिश हो चुकी है. हालांकि, कांग्रेस लगातार इस मामले को लेकर सरकार पर दवाब बढ़ा रही है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 10, 2026 at 4:59 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की संस्तुति हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अंकिता प्रकरण की जांच सीबीआई से कराए जाने पर कांग्रेस ने कुछ सवाल उठाए हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि राज्य सरकार ने भारत सरकार को टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी जो प्रत्यावेदन भेजा है, वो क्या है और उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
गणेश गोदियाल ने आगे कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण से संबंधित जांच के लिए पूरे प्रदेश की मातृशक्ति, शुभचिंतकों, कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सरकार ने पहले दिन से जांच को दबाने और भटकाने का लगाया प्रयास किया और यह प्रयास आज भी जारी है. वो आजीवन जवाबदेह रहेंगे कि इस जांच को भटकाने और दबाने का जो प्रयास उन्होंने किया है, यह उत्तराखंड की मातृशक्ति के लिए और उत्तराखंड की अस्मिता पर प्रश्न चिन्ह लगाने व अपमानित करने के लिए जाना जाएगा.
जांच को भटकाने पर लगाया जा रहा जोर: उन्होंने कहा कि बीते रोज मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अंकिता मामले की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति की घोषणा की है. उसके बाद भी इस जांच को भटकाने के लिए जोर लगाया जा रहा है. जब सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी गई है तो राज्य सरकार ने भारत सरकार को जो प्रत्यावेदन भेजा है, उस टर्म्स ऑफ रेफरेंस को सरकार सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?
मैं सरकार से ये जानना चाहता हूँ जब CBI जांच की संस्तुति हो गयी, तो सरकार ने जो टर्म्स ऑफ रेफेरेंस भारत सरकार को भेजा है उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? सरकार की नीयत में खोट है इसलिए सरकार उसे सार्वजनिक नहीं कर रही है। - गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस… pic.twitter.com/voQ9dCHjpD
— Uttarakhand Congress (@INCUttarakhand) January 10, 2026
गोदियाल ने कहा सरकार की मंशा में खोट है. इसलिए सरकार जांच के दायरे में जो बिंदु समाहित हैं, उनको सार्वजनिक नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि सरकार जांच के बिंदुओं को लिमिटेड कर इस प्रकार केंद्र को सीबीआई जांच की संस्तुति कर रही है कि इस प्रकरण में क्या कोई संभावित वीआईपी था या फिर नहीं था, उस पर जांच को सीमित किया गया है.
आरोपियों को बचाने की नई चाल, टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी करे सरकार: वहीं, गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार की इस हत्याकांड में आरोपियों को बचाने की एक नई चाल है. उन्होंने मांग उठाई कि सरकार आज ही टर्म्स ऑफ रेफरेंस को जारी करें. ताकि, उत्तराखंड के लोगों को यह पता चल सके कि सीबीआई जांच के दायरे क्या है?
"मैं सरकार से ये जानना चाहता हूं कि जब अंकिता केस में सीबीआई जांच की संस्तुति हो गई है, तो सरकार ने जो टर्म्स ऑफ रेफरेंस भारत सरकार को भेजा है, उसे सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है? सरकार की नीयत में खोट है, इसलिए उसे सार्वजनिक नहीं कर रही है."
- गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष -
वहीं, गणेश गोदियाल ने कहा कि इस प्रकरण में कहीं ना कहीं कथित वीआईपी की मौजूदगी है, लेकिन सरकार उस वीआईपी को हाइपोथेटिकल क्वेश्चन बनाना चाहती है कि कोई वीआईपी है या फिर नहीं है? उन्होंने कहा कि सीबीआई को यह पता लगाना चाहिए कि अंकिता जिस दिन रिजॉर्ट में नौकरी करने गई, उस दिन से लेकर हत्या होने तक किन-किन लोगों ने उससे फोन पर वार्ता की. उसकी अपने मित्र के साथ फोन पर हुई चैट की सच्चाइयां उजागर होनी चाहिए.
मेरी जानकारी में है कि सरकार इस जांच को लिमिटेड करना चाहती है। इससे सरकार अंकिता भंडारी मामले पर VIP को बचाना चाहती है। सरकार में थोड़ी सी भी ईमानदारी अगर है तो टर्म्स ऑफ रेफेरेंस को आज जारी किया जाए।
— Ganesh Godiyal (@UKGaneshGodiyal) January 10, 2026
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कांग्रेस विरोध प्रदर्शन जारी रखेगी: उन्होंने अंकिता केस से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को सीबीआई जांच में शामिल किए जाने की मांग उठाते हुए कहा कि सरकार तत्काल इस बात को बताए. क्योंकि, 11 जनवरी को तमाम सामाजिक संगठनों, विपक्षी पार्टियों और जनता ने ठान लिया है कि तटस्थ, पारदर्शी जांच कराने के लिए पुरजोर तरीके से आवाज उठाई जाएगी.
अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई करेगी। यह राज्य के जनमत की आंशिक जीत है, इसको हम अधूरी जीत भी नहीं कह सकते हैं। क्योंकि इसके टर्म्स एंड रेफरेंस में जब तक VIP और साक्ष्य नष्ट करना, एक-दो तथ्यों का उल्लेख नहीं होगा, तब तक " ढाक के दो पात"।
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) January 10, 2026
हत्या का मोटिव अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस… pic.twitter.com/6dKdMvYBNu
फिलहाल, कांग्रेस ने अंकिता भंडारी मामले की न्यायिक देखरेख में सीबीआई जांच की मांग की है. जब तक यह मांग पूरी नहीं होती है, तब तक कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम लगातार जारी रखने का फैसला लिया है. उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी टर्म्स ऑफ रेफरेंस को सार्वजनिक करने की मांग की है. साथ ही सीबीआई जांच की सिफारिश को अधूरा न्याय करार दिया है.
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