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'अंकिता को 3 साल में न्याय क्यों नहीं?', एंजेल चकमा और UKSSSC पेपरलीक पर भी दिल्ली से कांग्रेस के सवाल

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला तेज करते हुए सीएम धामी के इस्तीफे की मांग की.

ANKITA BHANDARI MURDER CASE
अंकिता मर्डर केस में कांग्रेस ने मांगा सीएम धामी से जवाब (PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 10, 2026 at 6:27 PM IST

5 Min Read
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर हमलावर है. धामी सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति देने के बाद अब दिल्ली में कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सत्ताधारी पार्टी से पूछा कि वह पिछले तीन सालों में पीड़िता को न्याय क्यों नहीं दिला पाई? कांग्रेस ने कहा कि, भाजपा सरकार ने राज्य के लोगों का भरोसा खो दिया है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री धामी के इस्तीफे की मांग की है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा, यह बहुत गंभीर मुद्दा है. यह उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के न्याय की लड़ाई से जुड़ा है, जो भाजपा नेता विनोद आर्य के रिजॉर्ट में काम करती थी.

घटना क्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 18 सितंबर 2022 को अंकिता पर वीआईपी को अनैतिक सेवाएं देने का दबाव डाला गया. लेकिन अंकिता ने सेवा देने से इनकार किया तो उसकी हत्या कर दी गई और उसके शव को एक नहर में फेंक दिया गया.

लांबा ने कहा ने, इस मामले में 19 से 22 सितंबर 2022 तक एक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं किया गया. फिर 23 सितंबर को सीएम धामी के निर्देश पर स्थानीय बीजेपी विधायक रेनू बिष्ट ने उस रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवा दिया. आरोप लगाया कि बुलडोजर चलाने का स्पष्ट मकसद रिजॉर्ट से सभी सबूतों को नष्ट करना था, क्योंकि अंकिता उसी रिजॉर्ट में रहती थी. 24 सितंबर को अंकिता का शव नहर से बरामद किया गया. मामला बढ़ने पर भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया.

इस मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन वह वीआईपी कौन था? जिसके लिए अंकिता पर सेवाएं देने का दबाव डाला गया था. यह अभी भी अज्ञात है. पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रही लांबा ने इस मामले पर सत्ताधारी दल से कई सवाल पूछे हैं.

उन्होंने सवाल किया कि,

स्थानीय भाजपा विधायक ने बिना किसी न्यायिक आदेश के रिजॉर्ट पर बुलडोजर क्यों चलाया? एसआईटी ने वीआईपी की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की? क्या एसआटी की पूरी जांच में किसी वीआईपी का नाम सामने आया? अगर हां तो वह कौन था? और अगर वीआईपी शामिल नहीं था तो इसका खंडन क्यों नहीं किया गया?

इस मामले में आरोपियों को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा, इसकी क्या गारंटी है? और सबूत नष्ट करने वालों के खिलाफ कब कार्रवाई की जाएगी? आखिर इस मामले में राजनीतिक लोग किसे सुरक्षा दे रहे हैं?

मांग उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस 'वीआईपी एंगल की स्वतंत्र जांच' की मांग करती है. सबूत नष्ट करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. राजनीतिक सुरक्षा देने वालों की जवाबदेही तय की जाए और सीबीआई बिना किसी दबाव और निष्पक्षता के 6 महीने के भीतर मामले को अंजाम तक पहुंचाए.

वहीं, कांग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी वैभव वालिया ने अंकिता भंडारी हाल के दिनों में उत्तराखंड में हुई कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नकल विरोधी कानून के बावजूद 21 सितंबर 2025 को आयोजित पेपर लीक हो जाता है. इस पेपर लीक के खिलाफ युवा सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं. आखिर में सीएम धामी को पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंपनी पड़ती है और परीक्षा निरस्त करनी पड़ती है.

इसके बाद वैभव वालिया ने त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले पर भी प्रकाश डाला. आखिर में अंकिता भंडारी हत्याकांड में उपजे विरोध प्रदर्शन पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन साल हो गए हैं, लेकिन इसमें शामिल वीआईपी का नाम सामने नहीं आया है. जब लोगों ने CBI जांच की मांग करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया, तब जाकर मंजूरी दी गई. इन सभी मामलों को लेकर वैभव वालिया ने मुख्यमंत्री धामी के इस्तीफे की मांग की.

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