उत्तराखंड में जंगली सूअर और नीलगाय को मारने की मिली सशर्त अनुमति, जानिए कैसे मिलेगी परमिशन?
उत्तराखंड में कुछ शर्तों पर फसलों का नुकसान करने वाले जंगली सूअर या नीलगाय को मारा जा सकता है.जानिए किन नियमों का करना होगा पालन?

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 8, 2026 at 4:20 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए वन विभाग ने एक अहम फैसला लिया है. जंगली सूअर या नीलगाय की ओर से लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतों के बीच अब इन्हें मारने की सशर्त अनुमति देने के आदेश जारी किए गए हैं. हालांकि, यह अनुमति पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया और तय मापदंडों के तहत ही दी जाएगी. ताकि, इसका किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो सके.
बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से किसान जंगली सूअर और नीलगाय के आतंक से परेशान हैं. खेतों में तैयार खड़ी फसल को ये जानवर रातों रात बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. कई मामलों में किसान खेती छोड़ने तक को मजबूर हुए हैं. इस समस्या को लेकर किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी कि फसल नुकसान करने वाले इन वन्यजीवों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
ऐसे में किसानों की मांग और जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यह आदेश जारी किया है. आदेश के तहत फसलों को नुकसान पहुंचा रहे जंगली सूअर और नीलगाय को केवल अनुमति मिलने के बाद ही मारा जा सकेगा. इसके लिए प्रभावित किसान को पहले निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
ये अधिकारी दे सकते हैं अनुमति: मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की ओर से यह अधिकार विभाग के कई अधिकारियों को सौंपा गया है. क्षेत्रीय वन संरक्षक, प्रभागीय वनाधिकारी, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्राधिकारी, उप वन क्षेत्राधिकारी और वन दारोगा को प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है. ये अधिकारी तय शर्तों के आधार पर अनुमति प्रदान कर सकते हैं.

किन परिस्थितियों में मिलेगी मारने की अनुमति: आदेश के अनुसार जंगली सूअर या नीलगाय को केवल वन क्षेत्र के बाहर निजी खेती की भूमि पर ही मारा जा सकेगा. यदि जानवर घायल होकर वन क्षेत्र की ओर भागता है तो उसका पीछा करते हुए वन क्षेत्र के भीतर जाना प्रतिबंधित रहेगा. मारे गए जानवर को वनरक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि की मौजूदगी में नष्ट किया जाएगा.

कैसे मिलेगी अनुमति? जंगली सूअर या नीलगाय को मारने की अनुमति हासिल करने के लिए प्रभावित किसान को प्राधिकृत अधिकारी के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन देना होगा. आवेदन पर स्थानीय ग्राम प्रधान की संस्तुति भी अनिवार्य होगी. साथ ही वन्यजीव को मारने के लिए केवल लाइसेंसी बंदूक या राइफल का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा.
एक महीने तक ही वैलिड रहेगी अनुमति: ये भी स्पष्ट किया गया है कि अनुमति जारी होने की तारीख से केवल एक महीने तक ही वैध होगी. एक महीना पूरा होने के बाद अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी. वन विभाग का यह आदेश किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. जंगली सूअर और नीलगाय से हो रहे नुकसान पर यदि सही तरीके से नियंत्रण हो पाता है, तो इससे न केवल किसानों की फसल बचेगी, बल्कि खेती के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत होगा.
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