धनबाद के BIT सिंदरी में छात्रों की सेहत से खिलवाड़! खाने में मिला प्रतिबंधित रंग, बिना फूड लाइसेंस के संचालित मेस
धनबाद के BIT सिंदरी में छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. नरेंद्र निषाद की रिपोर्ट.

Published : September 3, 2026 at 7:49 AM IST
धनबाद: सिंदरी स्थित BIT में पढ़ने वाले छात्रों की सेहत को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है. जिन छात्रों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी संस्थान पर है, उन्हीं छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
फूड सेफ्टी विभाग की औचक जांच में कई ऐसी खामियां मिली हैं, जो हैरान करने वाली हैं. जांच के दौरान कुछ मेस में जहां साफ-सफाई के मानकों की अनदेखी मिली, जबकि भोजन तैयार करने में प्रतिबंधित और हानिकारक रंग के इस्तेमाल का भी खुलासा हुआ है. इतना ही नहीं, कई मेस बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के ही संचालित होते पाए गए.
भोजन की गुणवत्ता पर सवाल
सिंदरी का प्रतिष्ठित BIT, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने पहुंचते हैं. संस्थान में रहने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल और मेस की व्यवस्था है. छात्रों को रोजाना इन्हीं मेस में तैयार भोजन परोसा जाता है, लेकिन अब इसी भोजन की गुणवत्ता और उसे तैयार करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
फूड सेफ्टी विभाग की औचक जांच में जो तस्वीर सामने आई है, उसने संस्थान की भोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच के दौरान भोजन तैयार करने में प्रतिबंधित रंग के इस्तेमाल का मामला सामने आया है. फूड सेफ्टी विभाग के मुताबिक, इस तरह के रंग का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है और खाद्य पदार्थों में इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं है.
धनबाद डीसी को मिली थी शिकायत
दरअसल, BIT सिंदरी में छात्रों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन को शिकायत मिली थी. शिकायत में छात्रों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन की व्यवस्था और साफ-सफाई को लेकर सवाल उठाए गए थे.
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने फूड सेफ्टी विभाग को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. इसके बाद फूड सेफ्टी अधिकारी डॉ. राजा कुमार के नेतृत्व में टीम BIT सिंदरी पहुंची और छात्रों के लिए भोजन तैयार करने वाली अलग-अलग मेस का औचक निरीक्षण किया. जांच टीम ने संस्थान में संचालित मेस, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, साफ-सफाई, लाइसेंस और खाद्य सामग्री से जुड़े मानकों की पड़ताल की.
फूड सेफ्टी अधिकारी के मुताबिक, BIT सिंदरी में कुल 32 हॉस्टल हैं. इन हॉस्टलों में छात्रों के लिए मेस की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा संस्थान में एक कैफेटेरिया भी संचालित है, लेकिन जांच के दौरान सबसे बड़ी कमी सामने आई मेस के लाइसेंस को लेकर.

संचालित मेस के पास फूड सेफ्टी लाइसेंस नहीं
फूड सेफ्टी विभाग की जांच में पाया गया कि गर्ल्स हॉस्टल की मेस और कैफेटेरिया को छोड़कर कई अन्य हॉस्टल में संचालित मेस के पास फूड सेफ्टी लाइसेंस नहीं था यानी जिन जगहों पर बड़ी संख्या में छात्रों के लिए रोजाना भोजन तैयार किया जा रहा था, वहां खाद्य सुरक्षा से जुड़े जरूरी दस्तावेज ही पूरे नहीं थे.
सवाल यह कि जब रोजाना छात्रों को भोजन परोसा जा रहा है, तो आखिर बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के इन मेस का संचालन कैसे हो रहा था? सिर्फ लाइसेंस की कमी ही नहीं, बल्कि भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और मेस की साफ-सफाई को लेकर भी जांच टीम को कई खामियां मिलीं. फूड सेफ्टी विभाग के अनुसार, कुछ मेस में स्वच्छता के मानकों का उचित तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था. भोजन तैयार करने वाली जगह पर साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली. जांच के दौरान गंदगी से जुड़ी कमियां सामने आईं और इसी निरीक्षण के दौरान सामने आया सबसे गंभीर मामला.
भोजन में प्रतिबंधित और हानिकारक रंग का इस्तेमाल
खाद्य पदार्थों को देखने में आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे इस रंग को लेकर फूड सेफ्टी विभाग ने आपत्ति जताई है. विभाग ने इसे खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर लापरवाही माना है. छात्रों के भोजन में इस तरह के रंग का इस्तेमाल किया जाना इसलिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि छात्र नियमित तौर पर इन्हीं मेस में तैयार भोजन का सेवन करते हैं.
डॉ. राजा कुमार, फूड सेफ्टी अधिकारी ने कहा कि डीसी के निर्देश पर BIT सिंदरी में छात्रों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन की व्यवस्था की जांच की गई. जांच के दौरान कई कमियां मिली हैं. कई मेस में फूड सेफ्टी लाइसेंस नहीं पाया गया. साफ-सफाई को लेकर भी खामियां मिलीं और भोजन में प्रतिबंधित रंग का इस्तेमाल पाया गया है.
मेस में नियमों का पालन नहीं!
फूड सेफ्टी विभाग ने मानकों की अनदेखी को लेकर कार्रवाई भी शुरू कर दी है. जिन मेस में नियमों का पालन नहीं पाया गया, उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई है. वही, पूरे मामले को लेकर BIT सिंदरी के निदेशक प्रोफेसर पंकज सिन्हा को लिखित रूप से जानकारी दी गई है. फूड सेफ्टी विभाग की ओर से संस्थान को कमियों में सुधार के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है.
वहीं फूड सेफ्टी अधिकारी डॉ. राजा कुमार का कहना है कि छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन में इस तरह की लापरवाही को सामान्य नहीं माना जा सकता. भोजन तैयार करने में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन बेहद जरूरी है.
विभाग की ओर से मेस में काम करने वाले कर्मचारियों को फूड सेफ्टी से संबंधित प्रशिक्षण भी देने की बात कही गई है, ताकि भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के नियमों का सही तरीके से पालन कराया जा सके.
डीसी को सौंपी गई जांच रिपोर्ट: डॉ. राजा कुमार
"डॉ. राजा कुमार ने कहा कि मेस में काम करने वाले कर्मचारियों की फूड सेफ्टी विभाग की तरफ से ट्रेनिंग भी कराई जाएगी. पूरी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी गई है और संस्थान को सुधार के लिए निर्देश दिया गया है.” अब इस पूरे मामले में संस्थान की जवाबदेही भी अहम हो जाती है, क्योंकि BIT सिंदरी में बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टल में रहते हैं और उनके लिए रोजाना भोजन इन्हीं मेस में तैयार किया जाता है.
फूड सेफ्टी टीम की जांच में क्या-क्या?
ऐसे में सवाल सिर्फ एक दिन के निरीक्षण का नहीं है, सवाल यह भी है कि अगर फूड सेफ्टी टीम की औचक जांच में इतनी बड़ी कमियां सामने आई हैं, तो इससे पहले इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? क्या मेस संचालकों को खाद्य सुरक्षा नियमों की जानकारी नहीं थी? क्या बिना लाइसेंस के संचालित मेस की पहले कभी जांच नहीं हुई? और अगर हुई, तो फिर इन कमियों को दूर क्यों नहीं कराया गया?
इन सवालों को लेकर ईटीवी भारत ने BIT सिंदरी के निदेशक प्रो. पंकज सिन्हा से भी बातचीत की. शुरुआत में निदेशक ने मामले की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई, हालांकि, जब उन्हें बताया गया कि फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने निरीक्षण किया है और संस्थान को लिखित रूप से इसकी जानकारी दी गई है, तो उन्होंने स्वीकार किया कि टीम की ओर से मेस का निरीक्षण किया गया है.
फूड सेफ्टी टीम ने किया मेस का निरीक्षण
प्रो. पंकज सिन्हा, निदेशक, BIT सिंदरी ने बताया कि फूड सेफ्टी टीम ने मेस का निरीक्षण किया है. बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा. यदि मेस संचालकों की तरफ से किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
संस्थान की ओर से कार्रवाई का भरोसा तो दिया गया है, लेकिन अब देखना होगा कि अगले 15 दिनों में मेस की व्यवस्था में कितना सुधार होता है. फूड सेफ्टी विभाग ने जिन कमियों की ओर इशारा किया है, उनमें लाइसेंस, साफ-सफाई और भोजन में प्रतिबंधित रंग के इस्तेमाल जैसे गंभीर मामले शामिल हैं.
छात्रों को मिलने वाला भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं बल्कि उनकी सेहत और सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है. खासकर हॉस्टल में रहने वाले छात्र दिन के कई वक्त का भोजन इन्हीं मेस पर निर्भर होकर करते हैं.
BIT सिंदरी में भोजन की गुणवत्ता को लेकर लापरवाही!
ऐसे में BIT सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में भोजन की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर इस तरह की लापरवाही कई सवाल खड़े करती है. अब जिम्मेदारी सिर्फ मेस संचालकों की नहीं, बल्कि संस्थान प्रबंधन की भी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि छात्रों को साफ-सुथरा और सुरक्षित भोजन मिले.
फूड सेफ्टी विभाग की जांच के बाद मामला सामने आ चुका है. कार्रवाई भी शुरू हो गई है. अब निगाह इस बात पर रहेगी कि 15 दिनों की तय समय-सीमा के बाद मेस व्यवस्था में कितना बदलाव आता है और छात्रों की सेहत से जुड़े इन सवालों का स्थायी समाधान कैसे होता है.
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