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दिपके ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की, सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप

दिपके सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच के लिए भी अभियान चलाएंगे, क्योंकि इलाज में देरी से लोगों को परेशानी होती है.

CJP Convener Abhijit Dipke speaking to reporters.
सीजेपी के संयोजक अभिजीत दिपके संवाददाताओं से बात करते हुए. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 15, 2026 at 5:38 PM IST

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छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की.

इस पहल के तहत, उन्होंने आज हिंगोली जिले के संतुकपिंपरी गांव में जिला परिषद स्कूल का दौरा किया. दौरे के दौरान, उन्होंने स्कूल की जर्जर हालत देखी; वहां पीने का पानी उपलब्ध नहीं था और खिड़कियां टूटी हुई थीं तथा उन पर बैनर लगे हुए थे.

'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत: ग्रामीण महाराष्ट्र में स्कूलों की जर्जर हालत का हवाला देते हुए, अभिजीत दिपके ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने की घोषणा की.

दिपके ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझना जरूरी है कि देश की ज्यादातर आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है; वहां रहने वाले बच्चे ही न कि सिर्फ पुणे, मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों में रहने वाले बच्चे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं.

उन्होंने कहा कि वे कई स्कूलों का दौरा करेंगे. सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसकी सबसे अधिक मार गरीब विद्यार्थियों पर पड़ रही है. उन्होंने निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि शिक्षा की फीस को नियंत्रित करने की जरूरत है. स्कूल सिर्फ़ पहली और दूसरी कक्षा के लिए ही एक से डेढ़ लाख रुपये तक वसूल रहे हैं. अभिजीत दिपके ने इस चलन की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि जब शिक्षा इतनी महंगी हो गई है, तो गरीब परिवारों से अपने बच्चों को शिक्षित करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और ग्रामीण इलाकों में कई स्कूल जर्जर हालत में हैं; इसलिए, उनकी हालत सुधारना प्राथमिकता है.

प्राइवेट स्कूलों द्वारा किया जा रहा शोषण बंद होना चाहिए, क्योंकि ग्रामीण इलाकों के छात्र देश का भविष्य हैं. दिपके ने पत्रकारों को बताया कि आज हमारे स्कूल बचाओ (Save Our Schools) अभियान शुरू किया गया है और हमारे स्कूलों को ठीक करो (Fix Our Schools) पहल के तहत, वे अन्य तालुकाओं के ग्रामीण इलाकों में स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे.

किसानों के लिए भी काम करेंगे
अभिजीत दिपके ने साफ किया कि नीट परीक्षा को लेकर पहले आंदोलन करने और अब सरकारी स्कूलों के लिए अभियान शुरू करने के बाद, वे भविष्य में किसानों के लिए भी काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले छात्र आखिरकार किसानों के ही बच्चे हैं.

सूखा ही एकमात्र ऐसी वजह नहीं है जो किसानों को अपनी जान देने जैसा कदम उठाने पर मजबूर करती है. बच्चों की शिक्षा का इंतजाम करने की गंभीर चुनौती भी उनकी बदहाली की एक बड़ी वजह है.

एक आश्रम स्कूल (residential school) में सांप के काटने से एक छात्र की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, दिपके ने कहा कि वे मौजूदा हालात का जायजा लेने के लिए हर जिले के ग्रामीण इलाकों का दौरा करेंगे.

हम 'विश्वगुरु' कैसे बन सकते हैं?
अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना सवाल उठाया कि हम विश्वगुरु बनने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं, जब आज़ादी के 80 साल बाद भी हम जातिवाद के मुद्दों में उलझे हुए हैं. जहां अमेरिका और जापान जैसे देश एआई, नवीकरणीय ऊर्जा और सेमीकंडक्टर पर तेजी से काम कर रहे हैं और उन पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं हम हिंदू-मुस्लिम बहसों में ही उलझे हुए हैं.

चुनावों के दौरान "बंटोगे तो कटोगे" जैसे नारे लगाए जाते हैं; फिर भी, ऐसे नारों से कुछ हासिल नहीं होता—न तो नौकरियां और न ही शिक्षा—और अंत में इनसे कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता.

इनसे किसी की जिंदगी बेहतर नहीं होती, इसलिए लोगों को ऐसे मामलों में पड़ने से बचना चाहिए. हमारा ध्यान अच्छी शिक्षा हासिल करने पर होना चाहिए.

उन्होंने कहा, सिर्फ किताबें पढ़ने से शिक्षा पूरी नहीं होती. सच्ची शिक्षा एक समझदार और अच्छा इंसान बनने में है. इसके लिए संविधान को पढ़ना जरूरी है, जिसमें जातिवाद के लिए कोई जगह नहीं है.

हमने 80 सालों में क्या किया है?
अभिजीत दिपके ने मौजूदा हालात की आलोचना करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की स्थिति पर हमें शर्म आनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे पहले ग्रामीण इलाकों में पीने का पानी, स्कूल में साफ-सुथरे शौचालय, अच्छा इंफ़्रास्ट्रक्चर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

आजादी के 80 साल बाद भी, ग्रामीण इलाकों के छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं. दिपके ने कहा कि अगर हालात की इस दयनीय स्थिति को दिखाने के लिए वीडियो बनाने पड़ें, तो यह सवाल उठता है कि हमने इतने सालों में असल में क्या किया है?

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