उत्तराखंड में सुरंगों को मिलेगा हवाई सुरक्षा कवच, सिविल एविएशन का टनल को लेकर है ये प्लान
सिविल एविएशन डिपार्टमेंट ने उत्तराखंड में टनल की सेफ्टी के लिए प्लान तैयार किया है. विभाग ने सिलक्यारा टनल हादसे को देखते हुए फैसला लिया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 24, 2026 at 10:11 AM IST
देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूती देने के लिए जिस तेजी से सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, उसी के समानांतर अब सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को भी नई दिशा दी जा रही है. साल 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में हुए हादसे से सबक लेते हुए राज्य का सिविल एविएशन विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है. प्रयास है कि राज्य की प्रमुख रेलवे सुरंगों के पास हेलीपैड स्थापित किए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य को तुरंत अंजाम दिया जा सके.
उत्तराखंड में राज्य सरकार हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने का प्रयास करती रही है. इसके जरिए सरकार की मंशा सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ना और सभी जिलों को हवाई सेवा से जोड़कर पर्यटन को बढ़ाना है. लेकिन हवाई सेवा को बेहतर करने के अलावा सरकार की मंशा आपदा प्रबंधन को बेहतर करना भी है. राज्य के कई क्षेत्रों में हेली सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है और आपदा की लिहाज से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड के लिए हेली सेवाएं काफी अहम मानी जाती रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए सिविल एविएशन भी आपदा प्रबंधन के तहत राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी के रूप में टनल के पास हेलीपैड तैयार करने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है.
सिलक्यारा टनल हादसे ने किया सुरक्षा को लेकर हाईलाइट: साल 2023 में उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा सुरंग में निर्माण कार्य के दौरान एक हिस्सा ढह गया था. घटना में 41 मजदूर सुरंग के भीतर फंस गए थे. 17 दिनों तक चले बड़े स्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 28 नवंबर को सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. यह घटना न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बनी. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित पहुंच के कारण राहत कार्य में कई चुनौतियां सामने आईं. इसी अनुभव ने अब आपदा प्रबंधन के ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया है.
राज्य के सिविल एविएशन विभाग के सीईओ आशीष चौहान के अनुसार,
आपदा प्रबंधन में हवाई सेवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्ग कई बार अवरुद्ध हो जाते हैं या समय ज्यादा लगता है. ऐसे में हेलीकॉप्टर सेवा त्वरित सहायता पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत प्रत्येक प्रमुख रेलवे सुरंग की शुरुआत या उसके निकट हेलीपैड विकसित किए जाएंगे.
- आशीष चौहान, सीईओ, सिविल एविएशन विभाग -
इस योजना का उद्देश्य केवल सुरंग के भीतर आपात स्थिति से निपटना ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित हवाई सहायता उपलब्ध कराना है. इससे जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को तत्काल संसाधन जुटाने में सहूलियत होगी.
रेल परियोजना की खास बातें: उत्तराखंड में फिलहाल ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है. करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन में 17 प्रमुख सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि कुल 125 किलोमीटर में से लगभग 104 किलोमीटर का हिस्सा सुरंगों के अंदर से गुजरेगा. यानी इस परियोजना में पहाड़ों को चीरकर रेल मार्ग तैयार किया जा रहा है, जहां सुरक्षा और आपात प्रबंधन बेहद संवेदनशील विषय है.
परियोजना में 12 आपातकालीन सुरंगें भी बनाई जा रही हैं, ताकि किसी भी तकनीकी या प्राकृतिक बाधा की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो. ऐसे में यदि सुरंगों के पास हेलीपैड विकसित किए जाते हैं तो यह बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है.
राहत और बचाव कार्य में आएगी तेजी: हेलीपैड निर्माण की इस योजना का सीधा लाभ यह होगा कि दुर्घटना या आपदा की स्थिति में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, चिकित्सा दल और तकनीकी विशेषज्ञों को मौके तक पहुंचाने में समय की बचत होगी. साथ ही गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को तत्काल एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा.
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मौसम और भौगोलिक स्थिति अक्सर राहत कार्यों में बाधा बनते हैं. भूस्खलन, भारी बारिश या बर्फबारी के दौरान सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं. ऐसे में हेली सेवा एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है. तमाम हादसों के दौरान भी हवाई सेवाओं का सहारा लिया जाता रहा है. ऐसे में सुरंग के निकट स्थायी हेलीपैड होने पर अभियान को तेजी दी जा सकती है.
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी: राज्य सरकार और सिविल एविएशन विभाग इस योजना को केवल रेलवे परियोजना तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे व्यापक आपदा प्रबंधन रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है. ऐसे में सुरंगों के पास हेलीपैड विकसित करना भविष्य की चुनौतियों के प्रति एक सक्रिय और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है.
हालांकि, इस प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए उच्च स्तर पर स्वीकृति आवश्यक होगी. भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय अनुमति और तकनीकी मानकों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
सिलक्यारा हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र भी अनिवार्य है. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में सुरंगों की बड़ी भूमिका है, इसलिए इनके आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं.
यदि प्रस्ताव के अनुसार हर प्रमुख सुरंग के पास हेलीपैड स्थापित होते हैं, तो यह न केवल रेल परियोजना को सुरक्षा कवच देगा, बल्कि पूरे राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र को नई मजबूती भी प्रदान करेगा. आने वाले समय में यह पहल उत्तराखंड के लिए एक मॉडल आपदा प्रबंधन व्यवस्था के रूप में उभर सकती है.
ये भी पढ़ें:

