ऑटो चालक का बेटा दिखाएगा अपने पंच का दम, चंडीगढ़ के अमनदेव का अंडर-19 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए सिलेक्शन
चंडीगढ़ में ऑटो चालक के बेटे अमनदेव का अंडर-19 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए चयन हो गया है. अविनाश शर्मा की रिपोर्ट...

Published : September 1, 2026 at 3:43 PM IST
|Updated : September 1, 2026 at 6:24 PM IST
पंचकूला: चंडीगढ़ के एक ऑटो चालक के बेटे का चयन अंडर-19 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के लिए हुआ है. बेटे की इस उपलब्धि का पता लगते ही ऑटो चालक पिता और मां की खुशी का ठिकाना न रहा. जानकारी के बाद पूरा मोहल्ला और चंडीगढ़ खेल विभाग ने अमनदेव को बधाई दी. अमनदेव चंडीगढ़ के सेक्टर 42 स्थित गांव अटावा का रहने वाला है.
ईटीवी भारत ने अमनदेव और उनके पिता चंद्रदेव से खास बातचीत की. इस दौरान अमन और उनके पिता ने शुरुआती संघर्ष के साथ ही चुनौतियों के बारे में बताया.
"मेरा लक्ष्य गोल्ड जीतना ": अंडर-19 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में चयन होने पर अमनदेव ने खुशी जाहिर की है. साथ ही अपनी जीत का श्रेय अपने दोनों कोच और पिता को दिया. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान अमनदेव ने कहा कि, "मुझे बहुत खुशी है कि मैं वर्ल्ड लेवल पर इंडिया को रिप्रेजेंट करूंगा. मेरे कोच सर जो कहते हैं, मैं उसका पूरा ख्याल रखता हूं. शुरू से ही मेरे कोच जो कहते हैं, मैं वही करता था. आज भी मैं वहीं करता हूं जो मेरे कोच कहते हैं. मेरी इस उपलब्धि का श्रेय कोच को देता हूं. मेरे दोनों कोच मुझे हमेशा प्रेरित करते हैं. मेरे पिता भी शुरू से मुझे सपोर्ट करते आ रहे हैं.मेरा लक्ष्य गोल्ड जीतना है."
तीसरी कक्षा से बॉक्सिंग कर रहा अमनदेव: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान अमनदेव के पिता चंद्रदेव ने कहा कि, "बेटा अमनदेव तीसरी कक्षा से ही बॉक्सिंग के रिंग में उतर गया था.बॉक्सिंग को लेकर बेटे की दिलचस्पी कभी कम नहीं हुई, बल्कि उसने प्रैक्टिस को निरंतर जारी रखा. इससे पहले अमनदेव स्टेट गेम्स में गोल्ड मेडल जीतता रहा है. इसके अलावा वह चार बार नेशनल खेला और तीन बार कांस्य पदक जीत चुका है. इससे पहले अमनदेव को एशियन प्रतियोगिता में हार मिली थी, जिस रात मायूस होने से वह सो नहीं सके थे लेकिन अब जब बेटे का चयन अंडर-19 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में होने का पता लगा तो खुशी इतनी थी कि फिर से रात को नींद नहीं आई."

दो कोच दे रहे प्रशिक्षण: बॉक्सिंग कोच भगवंत और जय हिंद दोनों अमनदेव को बचपन से प्रशिक्षण दे रहे हैं. पिता ने बताया कि, " मौजूदा समय में अमन साई (रोहतक) से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है. पढ़ाई पीछे नहीं छूटे, इसके लिए वह अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकों को भी ट्रेनिंग सेंटर में साथ रखता है, ताकि समय मिलने पर पढ़ा जा सके. नतीजतन, वह सुबह और शाम 2-2 घंटे पढ़ाई करता है. मैंने बेटे पर कभी किसी चीज के लिए दबाव नहीं बनाया, उसकी रूचि और पसंद का विशेष ध्यान रखा है."
आर्थिक चुनौती को आड़े नहीं आने दिया: अमनदेव के पिता चंद्रदेव ने बताया कि, "हम अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर 42 स्थित गांव अटावा में रहते हैं और ऑटो चलाकर ही परिवार का गुजर-बसर करते हैं. बेटे की पढ़ाई, खेल और अन्य खर्च के चलते आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन अमनदेव की बॉक्सिंग की प्रेक्टिस को फीका नहीं पड़ने दिया, जिसके चलते उसकी डाइट समेत अन्य जरूरतों को पहले पूरा किया. बेटा अमनदेव पढ़ाई में भी औसत है और उसे पढ़ाई भी अच्छे से करने को कहा जाता है, क्योंकि बिना शैक्षणिक योग्यता से नौकरी नहीं मिलने का संकट बना रहता है."

हर तरह के मौसम में प्रशिक्षण की आदत: अमनदेव को हर तरह के मौसम में ट्रेनिंग करने की आदत है. इस बारे में चंद्रदेव ने कहा कि, "वह अपने कोच के कहने के अनुसार नियमित रूप से प्रैक्टिस करता है. यहां तक कि दिसंबर महीने में ठंड और धुंध अधिक होने के चलते जब कभी मैं बेटे को प्रैक्टिस पर न जाने की बात कहता हूं तो भी वह कहता कि सर ने बुलाया है तो प्रैक्टिस जरूर करूंगा. अमन ने अपनी ट्रेनिंग/प्रैक्टिस के लिए कभी कोई समझौता नहीं किया. एक बार अमन की आंख पर चोट लग गई लेकिन उसने अपना अभ्यास जारी रखा."

दोनों बेटे खेलों में अव्वल :चंद्रदेव ने बताया कि, "बड़ा बेटा अमनदेव वर्तमान में सेक्टर 40 के श्रीहरकिशन पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र है. छोटा बेटा अनुराग आठवीं कक्षा का स्टूडेंट है और वह भी खो-खो खेलता है, जिसमें दो बार नेशनल भी खेल चुका है. मुझे मेरे बेटे अमनदेव से उम्मीद है कि वह अंडर-19 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में देश के लिए पदक जीतेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का झंडा जरूर लहराता देखना चाहिए."

