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चमोली टनल हादसे के बाद काम पर ब्रेक, सिल्क्यारा में भी लूज रॉक ने बढ़ाई मुश्किल, जानिए दोनों का स्टेटस

उत्तराखंड में इन दिनों मानसून सीजन चल रहा है. पहाड़ी इलाकों में बारिश हो रही है. जिसके कारण काम प्रभावित हो रहे हैं. रिपोर्ट- किरणकांत.

UTTARAKHAND TUNNEL STORY
उत्तराखंड टनल रिपोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 30, 2026 at 6:36 AM IST

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देहरादून: उत्तराखंड की दो बड़ी सुरंग परियोजनाएं में बीते दिनों दो बड़े हादसे हुए. यह दोनों परियोजनाएं अब इस समय अलग-अलग परिस्थितियों से ये गुजर रही हैं. चमोली के विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए भीषण हादसे के बाद जहां निर्माण गतिविधियां प्रभावित है. सुरक्षा आकलन के बाद ही आगे बढ़ने की स्थिति बनेगी. वहीं उत्तरकाशी की सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग परियोजना में काम पूरी तरह बंद नहीं है. सुरंग के भीतर सामने आए कमजोर चट्टानी हिस्सों ने निर्माण की रफ्तार और सुरक्षा व्यवस्था को फिर चुनौती दी है. एक तरफ चमोली में हादसे के बाद अगला कदम सुरक्षा जांच और तकनीकी मूल्यांकन पर टिका है. वहीं, दूसरी तरफ सिल्क्यारा में पहले कमजोर हिस्सों को सुरक्षित करने और उसके बाद निर्माण को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है. फिलहाल दोनों टनल्स मे काम रुका हुआ है.

चमोली में अभी काम का स्टेटस क्या है: चमोली के विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को पानी और मलबा घुसने के बाद बड़ा हादसा हुआ. हादसे के बाद सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए कई दिनों तक रेस्क्यू अभियान चलाया. बचाव अभियान पूरा होने के बाद अब परियोजना के सामने सबसे बड़ा सवाल सुरंग में निर्माण कार्य सामान्य रूप से शुरू होने का है.

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पीपलकोटी टनल हादसा (ETV Bharat)

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक कहते हैं कि,

हादसे वाले हिस्से में सामान्य निर्माण कार्य पहले की तरह शुरू नहीं हुआ है. फिलहाल प्राथमिकता सुरंग की सुरक्षा हादसे के कारणों और प्रभावित हिस्से की तकनीकी स्थिति को समझने की है. हम नहीं चाहते है की किसी तरह की कोई कमी छोड़ी जाए. हमारी तरफ से मृतक और घायालों की मदद की जानी है. उसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस दिशा में ध्यान दिया जाएगा. टनल एक्सपर्ट रिपोर्ट देंगे. उसके बाद ही आगे की दिशा में बढ़ा जाएगा.

इसका सीधा मतलब यह है कि चमोली की इस टनल के लिए अभी कोई निश्चित आधिकारिक री-स्टार्ट डेट सामने नहीं आई है. इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमुक तारीख से फिर से खुदाई शुरू हो जाएगी. पहले हादसे वाले हिस्से की स्थिति पानी और मलबे के स्रोत चट्टानों की स्थिरता और सुरंग को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी तकनीकी उपायों का आकलन महत्वपूर्ण होगा. इसके बाद ही यह तय होगा कि किस हिस्से में किस तरीके से काम दोबारा शुरू किया जाए.

चमोली की दूसरी टनल में भी सामने आई थी चुनौती: चमोली में इसी अवधि में तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की टनल को लेकर भी चिंता सामने आई थी. वहां कैविटी और पानी के रिसाव जैसी स्थिति ने निर्माण कार्य को प्रभावित किया. ऐसे में चमोली जिले में टनल निर्माण से जुड़े जोखिम को केवल एक घटना तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता है. लगातार सामने आ रही भूगर्भीय चुनौतियां यह बताती हैं कि हिमालयी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान जमीन के भीतर की वास्तविक स्थिति लगातार निगरानी में रखना जरूरी है. यही वजह है कि हादसे के बाद निर्माण की जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण हो गया है. चमोली में फिलहाल रेस्क्यू पूरा हो गया है. सामान्य निर्माण गतिविधि की वापसी के लिए तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रिया अभी निर्णायक चरण में है.

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सिलक्यारा टनल हादसा (ETV Bharat)

सिल्क्यारा टनल में लूज रॉक बनी बड़ी चुनौती: उत्तरकाशी की सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग की स्थिति इससे अलग है. राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड यानी NHIDCL की ताजा परियोजना स्थिति के अनुसार सिल्क्यारा-बड़कोट टनल अभी काम जारी है. आधिकारिक रिकॉर्ड में परियोजना की प्रगति करीब 74 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति करीब 72 प्रतिशत दर्ज है. परियोजना की संभावित पूर्णता तारीख 31 मार्च 2027 दी गई है. अगस्त के अंतिम सप्ताह में सुरंग के भीतर तीन लूज रॉक जोन सामने आने के बाद एक बार फिर निर्माण की सुरक्षा चर्चा में है. इन कमजोर हिस्सों में चट्टानों को स्थिर करने के लिए रॉक बोल्टिंग और सीमेंट ग्राउटिंग जैसे उपाय किए जा रहे हैं. कमजोर हिस्सों में यह सुरक्षा कार्य पूरा किया जा चुका है. तीसरे हिस्से में रेक्टिफिकेशन और सुरक्षा से जुड़ा काम जारी है. यानी सिल्क्यारा में काम को पूरी तरह रोक देने के बजाय कमजोर हिस्सों को पहले सुरक्षित करने और फिर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई जा रही है.

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सिल्क्यारा टनल में लूज रॉक बनी बड़ी चुनौती (ETV Bharat)

सिल्क्यारा में इस वक्त सबसे अहम काम क्या है: सिल्क्यारा में इस समय सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर मिले इन कमजोर हिस्सों को स्थिर करने की है. जिला अधिकारी प्रशांत आर्य कहते हैं अंदर काम कर रही टीम लगातार निगरानी के साथ आगे बढ़ेगी. फिलहाल बीते दिनों जिस तरह से मट्टी का खिसकाव हो रहा था वो किस हालात में ये देखने ओर उससे पार माने के बाद ही आगे का काम शुरू होगा.

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उत्तराखंड में सुरंगों का जाल (ETV Bharat)

बता दें, इंजीनियर फिलहाल रॉक बोल्टिंग और ग्राउटिंग का उद्देश्य चट्टानों को मजबूती देना और कमजोर हिस्सों को स्थिर करना सबसे प्राथमिक मान रहे हैं. आगे का निर्माण सुरक्षित तरीके से किया जा सके यह महत्वपूर्ण है. इसी सुरंग में नवंबर 2023 में बड़ा हादसा हो चुका है. तब 41 श्रमिक लंबे समय तक अंदर फंसे रहे. ऐसे में मौजूदा निर्माण में किसी भी कमजोर हिस्से को नजरअंदाज करने के बजाय पहले उसका उपचार करना परियोजना की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. NHIDCL के ताजा रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि सिल्क्यारा-बड़कोट परियोजना अभी आधिकारिक रूप से चालू निर्माणाधीन परियोजना है. यानी परियोजना को बंद घोषित नहीं किया गया है.

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उत्तराखंड में सुरंगों का जाल (ETV Bharat)

दो सुरंगें, दो अलग स्थिति: अगर 29 अगस्त 2026 की स्थिति को सीधे और सरल शब्दों में समझें तो चमोली की विष्णुगाड़-पीपलकोटी टनल हादसे के बाद सामान्य निर्माण की वापसी के इंतजार में है. सिल्क्यारा-बड़कोट परियोजना में काम जारी है, लेकिन लूज रॉक वाले हिस्सों में पहले सुरक्षा और स्थिरीकरण का काम किया जा रहा है. चमोली में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है कि तकनीकी जांच और सुरक्षा मूल्यांकन के बाद निर्माण की अनुमति कब और किन शर्तों पर मिलेगी? वहीं सिल्क्यारा में सवाल परियोजना के पूरी तरह रुकने का नहीं बल्कि कमजोर भूगर्भीय हिस्सों के कारण निर्माण की गति और सुरक्षा प्रबंधन का है.

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पीपलकोटी टनल हादसा (ETV Bharat)

अगले कुछ दिन दोनों परियोजनाओं के लिए अहम: चमोली में अगला बड़ा अपडेट इस बात पर निर्भर करेगा कि हादसे के बाद तकनीकी और सुरक्षा जांच में क्या सामने आता है, सुरंग को दोबारा सुरक्षित तरीके से काम लायक बनाने में कितना समय लगता है. दूसरी ओर सिल्क्यारा में तीन लूज रॉक जोन के उपचार के बाद निर्माण किस गति से आगे बढ़ता है, यह महत्वपूर्ण होगा.

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पीपलकोटी टनल हादसा (ETV Bharat)

खासतौर पर मार्च 2027 की निर्धारित संभावित पूर्णता तारीख को देखते हुए परियोजना के सामने सुरक्षा और समयसीमा दोनों को साथ लेकर चलने की चुनौती है. फिलहाल तस्वीर बिल्कुल साफ है चमोली में हादसे के बाद निर्माण की रफ्तार थमी हुई है. दोबारा काम शुरू होने की तारीख तय नहीं है. सिल्क्यारा में परियोजना बंद नहीं है लेकिन सुरंग के भीतर कमजोर चट्टानी हिस्सों को सुरक्षित करना अभी प्राथमिकता है. यानी चमोली में री-स्टार्ट का इंतजार है और सिल्क्यारा में सेफ्टी के साथ आगे बढ़ने की कवायद है.

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पीपलकोटी टनल हादसा (ETV Bharat)

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