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उत्तराखंड: न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मामला, डार्क वेब कनेक्शन की आशंका, जानिए जांच में क्या हैं चुनौतियां

हाल ही में उत्तराखंड में कई जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की मिली धमकियों की जांच आसान नहीं है. जानिए क्यों?

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न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मामला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 21, 2026 at 7:33 PM IST

8 Min Read
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किरणकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड में हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट समेत कई जिलों में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. इन धमकियों के बाद पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया था. राहत की बात ये रही कि किसी भी कोर्ट में भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. इस मामलों को लेकर मुकदमे भी दर्ज हुए हैं, लेकिन आरोपियों तक पहुंचा पुलिस के आसान नहीं है. इस केस में पुलिस के सामने क्या-क्या चुनौती होगी, उसी के बारे में विस्तार से बताते हैं.

पुलिस की पहली आशंका: दसअसल, नैनीताल हाईकोर्ट समेत राज्य के सभी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ईमेल पर मिली थी. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बम से उड़ाने की धमकी भरे मेल डार्क वेब से भेजे गए थे, जिनके आईपी एड्रेस (Internet Protocol Address) को ढूंढना आसान नहीं है.

पुलिस का कहना है कि सबसे पहले मेल 16 फरवरी को आया था. इस दिन नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट समेत कई जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. इसके बाद टिहरी, अल्मोड़ा और देहरादून में जिला कोर्ट को भी इस तरह की धमकी भरे मेल आए थे, जिसके बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. वहीं इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस के साथ एक्सपर्ट एजेंसियां और साइबर पुलिस भी कर रही हैं.

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जानिए किस-किस कोर्ट को मिली धमकी. (ETV Bharat)

पुलिस भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है. पुलिस का मानना है कि जिस तरह से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को उड़ाने की धमकी मिली है, उससे तो यही लगता है कि ये काम किसी एक व्यक्ति का नहीं है, न ही किसी व्यक्ति ने शरारत के लिए ऐसा किया है.

अलग-अलग जिलों को एक के बाद एक मेल भेजे जाना सामान्य शरारत नहीं माना जा सकता. प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में कुछ आईपी एड्रेस विदेशों में ट्रेस हुए हैं. संबंधित सर्विस प्रोवाइडरों से डाटा मिलने के लिए विधिक प्रक्रिया के तहत संपर्क साधा गया है. विदेशी सर्वरों से जानकारी हासिल करने में समय लगता है. इसलिए जांच अलग-अलग ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है.
- रिद्धिम अग्रवाल, आईजी, उत्तराखंड पुलिस -

डार्क वेब और वीपीएन के इस्तेमाल की आशंका: साइबर सेल और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि ई-मेल भेजने के लिए कथित तौर पर डार्क वेब और टोर ब्राउजर का इस्तेमाल किया गया है.

Tor Browser एक मुफ्त और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर है जो इंटरनेट पर उच्च-स्तरीय गोपनीयता और गुमनामी (anonymity) प्रदान करता है.

प्रॉक्सी सर्वरों को हो सकता है इस्तेमाल: इसके अलाव वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) और प्रॉक्सी सर्वरों का इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि दोनों ही टेक्नोलॉजी आईपी एड्रेस को छुपाने में मदद करता है. वहीं कुछ तकनीकी संकेत विदेशी क्लाउड सर्वरों के उपयोग की ओर भी इशारा कर रहे हैं.

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देहरादून कोर्ट में भी सुरक्षा बढ़ाई गई. (ETV Bharat)

ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर अस्थायी ई-मेल अकाउंट बनाते हैं, जिन्हें एक या दो बार उपयोग कर बंद कर दिया जाता है. कई बार चोरी या हैक की गई मेल आईडी का इस्तेमाल भी किया जाता है ताकि जांच की दिशा भटकाई जा सके. पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि किसी तीसरे व्यक्ति की मेल आईडी का दुरुपयोग किया गया हो. हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं.
- अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ -

केंद्रीय एजेंसियां में जांच में जुटी: पुलिस मुख्यलय से मिली जानकारी के अनुसार कहा जा सकता है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से भी समन्वय किया जा रहा है. हाल फिलहाल में देश के कई राज्यों में इस तरह के धमकी भरे मेल भेजे गए थे. साउथ इंडिया के कुछ राज्यों में भी कोर्ट और शैक्षणिक संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी के मेले मिले थे. इसलिए इस मामले की जांच राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है. अप्रैल 2025 में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने इसी प्रकार के संदेशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क भी किया था.

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हरिद्वार कोर्ट में चेकिंग करती हुई पुलिस. (ETV Bharat)

बम से उड़ाने की जो धमकी मिली थी, उसमें कुछ उग्र संगठनों के नाम भी लिखे हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे दावों की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि, पुलिस तमाम एंगल से मामले की जांच कर रही है.

कॉपी कैट क्राइम तो नहीं: जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं यह कॉपी कैट क्राइम तो नहीं है, जिसमें किसी पुराने पैटर्न को दोहराया गया हो, लेकिन अभी पुलिस कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहने से बच रही है.

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धमकी के बाद कोर्ट परिसर में चेकिंग करती पुलिस. (ETV Bharat)

पांच दिन बाद पुलिस के हाथ खाली: 16 फरवरी को पहली धमकी मिली थी, लेकिन पांच दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली है. यह स्थिति साइबर अपराधों की जटिलता को बताने के लिए काफी है. फॉरेंसिक टीमें ई-मेल हेडर सर्वर, लॉग मेटा डाटा और ट्रांसमिशन पाथ की जांच कर रही है. उम्मीद है कि यहां से पुलिस के हाथ कुछ लगे.

संदिग्ध आईपी एड्रेस की हिस्ट्री खंगाली: जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या विभिन्न जिलों को भेजे गए ई-मेल किसी एक स्रोत से गए या अलग अलग स्रोतों से. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध में जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है. कई बार अपराधी जानबूझकर फर्जी सुराग छोड़ते हैं, जिससे जांच भटक जाए. ऐसे में हर तकनीकी इनपुट का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जा रहा है.

bomb threat cases
नैनीताल हाईकोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. (ETV Bharat)

2023 के पुराने मामले की फिर से पड़ताल: जांच एजेंसियों ने वर्ष 2023 के उस मामले को भी दोबारा खंगालना शुरू किया है, जब नैनीताल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. उस समय एसटीएफ ने दिल्ली के एक युवक को आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया था, जिसे ट्रांजिट रिमांड पर नैनीताल लाया गया था. जिला पुलिस के अनुसार आरोपी सजा काटकर रिहा हो चुका है.

पुराने मामले के डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और आरोपी के संपर्कों की फिर से समीक्षा की जा रही है. पुलिस यह भी परख रही है कि कहीं हालिया धमकियों के पीछे वही व्यक्ति या उसके संभावित सहयोगी तो सक्रिय नहीं हैं. आरोपी और उसके परिचितों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है. विवेचक को पुराने केस की फाइल और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान वर्तमान मामले से करने के निर्देश दिए गए हैं.
- मनोज कत्याल, एसपी सिटी -

मेल आईडी हैक और डिजिटल फुट प्रिंट की जांच: पुलिस इस संभावना से भी इनकार नहीं कर रही कि किसी निर्दोष व्यक्ति की मेल आईडी हैक कर धमकी संदेश भेजे गए हों. साइबर अपराध में स्पूफिंग और फिशिंग के जरिए अकाउंट तक पहुंच बनाना आम तरीका है. यदि ऐसा है तो असली अपराधी तक पहुंचना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसलिए संबंधित ईमेल खातों की लॉग इन हिस्ट्री रिकवरी नंबर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और डिवाइस आईडी की गहन जांच की जा रही है. डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण में यह देखा जा रहा है कि मेल भेजे जाने के समय किस प्रकार का डिवाइस ऑपरेटिंग सिस्टम और नेटवर्क इस्तेमाल हुआ.

बता दें कि 16 फरवरी को सबसे पहले नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इसके बाद उसी दिन रामनगर और हल्द्वानी कोर्ट को भी इस तरह की धमकी मिली थी. इसके के टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून के अलावा नैनीताल हाईकोर्ट को भी इस तरह की धमकी मिली थी. नैनीताल और देहरादून कोर्ट को दो-दोबार इस तरह की धमकी भरा ईमेल आया था.

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