दूसरे धर्म के युवक-युवती का निकाह नहीं पढ़ाएंगे मौलवी, कोर्ट मैरिज के बाद भी धर्म परिवर्तन जरूरी- सलीम राज
छत्तीसगढ़ में निकाह प्रक्रिया को लेकर वक्फ बोर्ड ने बदलाव किया है. पेश है प्रवीण कुमार सिंह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 7, 2026 at 6:13 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए नया निर्देश जारी किया है. अब केवल इस्लाम धर्म को मानने वाले युवक-युवती का ही निकाह मौलवी पढ़ा सकेंगे. दूसरे धर्म के युवक-युवती के मामले में पहले कोर्ट मैरिज और उसके बाद धर्म परिवर्तन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर ही निकाह संभव होगा. इसके साथ ही वर्षों पुरानी परंपरा बदलते हुए निकाहनामा अब केवल उर्दू में नहीं, बल्कि हिंदी और अंग्रेजी में भी तैयार किया जाएगा. इस फैसले के पीछे की वजह, लव जिहाद पर बोर्ड का नजरिया, रजिस्टर्ड मौलवियों की व्यवस्था और नए नियमों को लेकर उठ रहे सवालों पर ईटीवी भारत के वरिष्ठ संवाददाता प्रवीण कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज से विशेष बातचीत की है.
सवाल : नए निर्देश के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या है?
जवाब: समय के साथ बदलाव जरूरी है. अभी तक निकाहनामा पूरी तरह उर्दू में होता था, जिससे मैरिज सर्टिफिकेट, आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज बनवाने में लोगों को दिक्कत होती थी. अब निकाहनामा उर्दू के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी में भी तैयार किया जाएगा. साथ ही हर मस्जिद में केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह पढ़ा सकेंगे.
सवाल : दूसरे धर्म के युवक-युवती के निकाह पर रोक लगाने की वजह क्या है?
जवाब: कई मामलों में दूसरे राज्यों से लोग आते हैं और उनकी सही जानकारी नहीं होती. बाद में पता चलता है कि युवक या युवती दूसरे धर्म के हैं और उनका निकाह करा दिया गया. इससे सामाजिक विवाद पैदा होते हैं, परिवार परेशान होते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होती है. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
सवाल : नए नियम की सबसे अहम बात क्या है?
जवाब: मौलाना केवल इस्लाम धर्म को मानने वाले युवक-युवती का ही निकाह करा सकेंगे. यदि दोनों अलग-अलग धर्म के हैं तो उनके लिए कोर्ट मैरिज का रास्ता खुला है. मौलवी ऐसे मामलों में निकाह नहीं पढ़ाएंगे.
सवाल : वर्षों पुरानी परंपरा बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब: सरगुजा, बस्तर, राजनांदगांव सहित कई जिलों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जहां दूसरे धर्म के युवक-युवती का निकाह पढ़ा दिया गया. जबकि यह मौलाना के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. लगातार शिकायतें मिलने के बाद नियमों में बदलाव किया गया.
सवाल : मौलाना का अधिकार क्षेत्र क्या है?
जवाब: मौलाना केवल उन लोगों का निकाह करा सकते हैं जो इस्लाम धर्म का पालन करते हैं. दूसरे धर्म के युवक-युवती का निकाह कराना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. नए निकाहनामा में आधार नंबर सहित अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी ताकि भविष्य में दस्तावेजी परेशानी न हो.

सवाल : अगर किसी ने पहले कोर्ट मैरिज कर ली हो तो क्या बाद में निकाह कराया जा सकेगा?
जवाब: केवल कोर्ट मैरिज कर लेने से निकाह नहीं होगा. यदि धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है तो मौलाना निकाह नहीं करा सकते. जब तक दोनों एक ही धर्म के नहीं होंगे, तब तक निकाह संभव नहीं होगा.
सवाल : दूसरे धर्म में शादी के बाद निकाह की प्रक्रिया क्या होगी?
जवाब: यदि कोई धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए कलेक्टर को आवेदन देना होगा. सभी औपचारिकताएं पूरी होने और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाह कराया जा सकेगा.
सवाल : क्या इस फैसले से लव जिहाद के मामलों में कमी आएगी?
जवाब: हमारा मानना है कि इससे ऐसे मामलों पर पूरी तरह रोक लगेगी. जब निकाह ही नहीं होगा और धार्मिक प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा तो ऐसे संबंध वैध धार्मिक विवाह की श्रेणी में नहीं आएंगे. ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई भी हो सकती है.
सवाल : दूसरे राज्यों से किस तरह की शिकायतें मिली थीं?
जवाब: झारखंड और बिहार समेत कुछ राज्यों से आने वाले कुछ मौलाना बाजार से निकाहनामा खरीदकर निकाह करा देते थे. बाद में उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो जाता था. अब नए नियम के तहत निकाहनामा में मौलाना का नाम, संस्था और आधार नंबर भी दर्ज रहेगा.
सवाल : अगर कोई मौलाना नए नियम का उल्लंघन करता है तो क्या कार्रवाई होगी?
जवाब: वक्फ बोर्ड, उलेमा और काजी से चर्चा कर कार्रवाई की जाएगी. यदि किसी मौलाना ने नियमों के खिलाफ निकाह कराया तो समाज की ओर से उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी.
सवाल : ईटीवी भारत के माध्यम से आपकी क्या अपील है?
जवाब: मेरी अपील है कि सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए लोग अपने-अपने धर्म की परंपराओं का पालन करें. यदि किसी को दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह करना है तो उसके लिए कोर्ट मैरिज का कानूनी विकल्प मौजूद है. अपने व्यक्तिगत फैसले से पूरे परिवार और समाज को परेशानी में नहीं डालना चाहिए.

