रूसी सेना में 217 भारतीय शामिल हुए, यूक्रेन जंग में 49 ने अपनी जान गंवाई, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ भारतीय नागरिकों ने अपनी मर्जी से रूसी सेना में शामिल होने के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए.

By Sumit Saxena
Published : May 22, 2026 at 9:52 PM IST
नई दिल्ली: केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच 217 भारतीय नागरिक कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल हो गए हैं. साथ ही केंद्र ने अदालत को यह भी बताया कि, इस लड़ाई में 49 लोगों की जान चली गई है.
केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सामने एक स्टेटस रिपोर्ट फाइल की गई है. यह स्टेटस रिपोर्ट केंद्र से उन 26 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कदम उठाने की अपील में फाइल की गई थी, जिन्हें कथित तौर पर रूस में हिरासत में लिया गया था और यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि, विदेश मंत्रालय के पास मौजूद ताजा जानकारी के मुताबिक, लगभग 217 भारतीय नागरिक कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल हो गए हैं. केंद्र ने कहा कि रूसी फेडरेशन के साथ लगातार कुटनीतिक बातचीत के कारण, सरकार ने पहले ही 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के लिए साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट से रिहा करवा लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, लड़ाई में 49 भारतीय नागरिकों की जान जाने की खबर है.
इसमें यह भी कहा गया है कि इसके अलावा, रूस की तरफ से 6 भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि की गई है, जबकि 23 लोगों की स्थिति अभी भी पता नहीं है. वहीं, मॉस्को में भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर उन पर लगातार नजर रख रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि लापता लोगों का पता लगाने और उनके शवों की पहचान करने में आसानी के लिए, 21 लोगों के परिवार के करीबी सदस्यों की डीएनए रिपोर्ट इकट्ठा की गई हैं और रूसी अधिकारियों को भेज दी गई हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि याचिका में बताए गए 26 लोगों के संबंध में, अधिकारियों के पास मौजूद मौजूदा स्थिति के मुताबिक, 14 मामले रिपोर्ट की गई मौतों से जुड़े हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि उनमें से 11 को रूसी अधिकारियों ने 'मिसिंग इन एक्शन' या अभी अपने परिवारों के संपर्क में नहीं होने की सूचना दी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता के साथ निपटाया जा रहा है और समाधान के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है, साथ ही प्रभावित परिवारों को भी घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि एक मामला छेड़छाड़ के आरोप में आठ साल की जेल से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि दूतावास ने संबंधित परिवारों की सहमति से आठ मामलों में शव को ले जाने की सुविधा भी दी है और एक व्यक्ति के शव के संबंध में जरूरी प्रक्रिया अभी चल रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ भारतीय नागरिकों ने अपनी मर्जी से रूसी सेना में शामिल होने के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए, उन्हें एक आकर्षक सैलरी पैकेज का लालच दिया गया, जिसमें लगभग 5,000 अमेरिकी डॉलर का अपफ्रंट साइनिंग बोनस और लगभग 2,500 अमेरिकी डॉलर की मासिक सैलरी शामिल है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा रूसी नागरिकता, दूसरे सामाजिक फायदे और मौत होने पर करीब 1,68,000 अमेरिकी डॉलर का मुआवजा देने का भी वादा किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने गैर-कानूनी भर्ती नेटवर्क और तस्करी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ भी कदम उठाए हैं, जो भारतीय नागरिकों को अच्छी नौकरी का झूठा वादा करके रूस ले जाने में शामिल हैं.
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