केंद्र ने दिखाई सख्ती! एक ED अधिकारी को कंपल्सरी रिटायरमेंट, जानें पूरा मामला
गोल्ड स्मगलिंग केस की जांच करने वाले ED अधिकारी को अनिवार्य रूप से रिटायर किया गया है. जानें क्या है इसकी वजह.

Published : January 8, 2026 at 4:37 PM IST
एर्नाकुलम: केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कठोर कार्रवाई करते हुए कोच्चि में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के डिप्टी डायरेक्टर पी राधाकृष्णन को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (कंपल्सरी रिटायरमेंट) देने का आदेश दिया है.
पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति के साइन किए गए इस आदेश में, रिश्वतखोरी, संवेदनशील ऑपरेशनल डिटेल्स के लीक करने और ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों का हवाला देते हुए सीनियर अफसर को सर्विस से हटाने की बात कही गई है.
तिरुवनंतपुरम के रहने वाले राधाकृष्णन केरल के इन्वेस्टिगेशन एरिया में एक जाने-माने नाम थे, उन्होंने सनसनीखेज डिप्लोमैटिक बैगेज गोल्ड स्मगलिंग केस का नेतृत्व किया था. उन्होंने उस हाई-प्रोफाइल जांच को नेतृत्व किया जिसके नतीजे में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर और स्वप्ना सुरेश को गिरफ्तार किया गया. हालांकि, उनका जाना उसी विवाद में घिरा हुआ है जिसकी जांच उन्हें करनी थी.
यह कार्रवाई वित्त मंत्रालय की आंतरिक जांच के बाद हुई है, जिसमें कथित तौर पर इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दम पाया गया था, जिसमें कहा गया था कि ऑफिसर ने जांच में समझौता किया था. विवाद तब शुरू हुआ जब तेजी से चल रही गोल्ड स्मगलिंग की जांचचल रही थी. जैसे ही उन्होंने बड़े राजनीतिक ऑफिस और सीएम कार्यालय की जांच शुरू की, वह रुक गई.
उस समय, भाजपा की स्टेट लीडरशिप ने एजेंसी के अधिकारियों पर जांच को पटरी से उतारने के लिए सत्ताधारी सरकार के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया था. खास आरोप थे कि रेड की जानकारी बिचौलियों के जरिए संदिग्धों को लीक की जा रही थी, जिससे सबूत नष्ट हो रहे थे. इन आरोपों को और बल देते हुए, मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने बाद में आरोप लगाया था कि केस को निपटाने के लिए 30 करोड़ रुपये की डील की गई थी.
ट्रांसफर से इनकार
जांच के दौरान राधाकृष्णन के अजीब करियर ऑप्शन से शक और बढ़ गया. जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर चेन्नई जोनल ऑफिस में प्रमोट होने और ट्रांसफर होने के बावजूद, उन्होंने प्रमोशन लेने से मना कर दिया और पेंडिंग जांच पूरी करने के बहाने कोच्चि में डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर बने रहने का फैसला किया.
अंदरूनी जांच में पाया गया कि कोच्चि में उनकी लगातार मौजूदगी दूसरे मामलों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों से जुड़ी थी, जिसमें करुवन्नूर सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक फ्रॉड भी शामिल है. आलोचकों का आरोप है कि बैंक फ्रॉड मामले में नेताओं के खिलाफ मजबूत सबूत होने के बावजूद, अंदरूनी दखल के कारण जांच रोक दी गई.
'डेड वुड' रूल
सरकार ने आदेश को लागू करने के लिए मौलिक नियम यानी की फंडामेंटल रूल 56(j) का इस्तेमाल किया. यह प्रावधान केंद्र को 'सार्वजनिक हित' में अधिकारियों को समय से पहले रिटायर करने का अधिकार देता है, अगर वे भ्रष्ट, बेअसर या ईमानदारी में संदिग्ध वाले पाए जाते हैं.
हालांकि राधाकृष्णन तकनीकी तौर पर अपने पेंशन लाभ बनाए रखेंगे. हालांकि, जबरदस्ती रिटायरमेंट को उनके रिकॉर्ड पर एक गंभीर काला धब्बा माना जा रहा है. राजनीतिक जानकार इस कदम को आने वाले विधानसबा चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों की साख वापस लाने के लिए केंद्र का एक सिग्नल मान रहे हैं, जो फोर्स के अंदर से समझौता करने वाले तत्वों को हटाकर पॉलिटिकल विच-हंट की राज्य सरकार की कहानी का मुकाबला कर रहा है.
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