जनगणना की अधिसूचना जारी, सील हुई सीमाएं, जानिये क्या प्रावधान होंगे लागू
केंद्र ने 2027 जनगणना के लिए हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग की अधिसूचना जारी की है. ये प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 14, 2026 at 3:06 PM IST
|Updated : February 14, 2026 at 3:30 PM IST
देहरादून: जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही इसके लिए तय तारीख के अनुसार तैयारी भी तेज कर दी गई हैं. इसके तहत अलग-अलग चरणों में जनगणना का काम किया जाएगा. जिसके लिए जरूरी नियम लागू रहेंगे. 10 नियम के अनुसार अधिसूचना जारी होते ही राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील हो जाती हैं. जिसके अंतर्गत कुछ खास कार्य पर रोक जैसी स्थिति रहती है.
केंद्र सरकार की ओर से जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद अब तय कार्यक्रम के अनुसार राज्य में चरणबद्ध तरीके से जनगणना का कार्य संपन्न कराया जाएगा. अधिसूचना के साथ ही कुछ विशेष नियम स्वतः प्रभावी हो गए हैं. जिनके तहत राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को जनगणना पूर्ण होने तक स्थिर माना जाएगा. यानी इस अवधि में जिलों, तहसीलों, नगर निकायों, पंचायतों या वार्डों की सीमाओं में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा.

जनगणना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तारीखों से लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम तक की विस्तृत रूपरेखा स्पष्ट कर दी है. उत्तराखंड में भी इस दिशा में तैयारियां समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाई जा रही हैं, ताकि तय समय में सटीक और व्यवस्थित आंकड़े जुटाए जा सकें. राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां जनगणना का कार्य तीन अलग-अलग चरणों में संपन्न कराया जाएगा.
सबसे पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम पर जोर दिया जा रहा है. 16 फरवरी से राज्य में जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू होगा. इस प्रशिक्षण व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाया गया है. पहले चरण में 23 कर्मचारी मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे. इसके बाद 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर प्रशिक्षण दिया जाएगा. वहीं करीब 4000 कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा. ये सुपरवाइजर जमीनी स्तर पर गणना कार्य की निगरानी करेंगे. गणनाकर्मियों का मार्गदर्शन करेंगे. प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ये सभी कर्मचारी आगे अपने-अपने क्षेत्र में शेष स्टाफ को भी प्रशिक्षित करेंगे. जिससे पूरी व्यवस्था एक समान और समन्वित तरीके से संचालित हो सके.

उत्तराखंड की भौगोलिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए जनगणना को तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है. प्रदेश के कई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में समय-समय पर भारी बर्फबारी होती है. जिससे सामान्य समय में वहां पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता. इसी कारण इन क्षेत्रों के लिए अलग समय-सीमा निर्धारित की गई है. पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मकान सूचीकरण और जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा. इस चरण में घर-घर जाकर भवनों की सूची तैयार की जाएगी. परिवारों का विवरण दर्ज किया जाएगा.
दूसरे चरण में 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक उन चिन्हित ऊंचे और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में गणना का कार्य होगा. जहां सामान्य मौसम में पहुंचना कठिन रहता है. इन क्षेत्रों के लिए अलग समय तय करने का उद्देश्य यह है कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियों में ही गणना कार्य पूरा किया जा सके.
तीसरा और अंतिम चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा. इस दौरान शेष बचे क्षेत्रों के कार्य को पूरा किया जाएगा. जिससे पूरे राज्य की जनसंख्या से संबंधित आंकड़े अंतिम रूप से संकलित किए जा सकें.

जनगणना की अधिसूचना जारी होने के साथ ही एक महत्वपूर्ण प्रावधान लागू हो गया है. नियमों के अनुसार अधिसूचना के बाद राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील मानी जाती हैं. इसका मतलब कि अब जनगणना पूर्ण होने तक किसी भी जिले, तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में बदलाव नहीं किया जा सकता. हालांकि इसके लिए अलग से कोई विशेष आदेश जारी नहीं किया जाता, बल्कि अधिसूचना के साथ ही यह प्रावधान स्वतः लागू हो जाता है.
राज्य सरकार भी इस अवधि में किसी नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन नहीं कर सकेगी और न ही किसी स्थानीय निकाय के स्वरूप में बदलाव किया जा सकेगा. इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि यदि जनगणना के दौरान प्रशासनिक सीमाओं में परिवर्तन किया जाता है तो आंकड़ों की सटीकता प्रभावित हो सकती है. इससे डेटा के संकलन, विश्लेषण और तुलना में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है.
जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती भर नहीं है, बल्कि यह विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण, निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण और नीतिगत फैसलों की आधारशिला है. ऐसे में उत्तराखंड में भी इसे सुव्यवस्थित, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से संपन्न कराने की दिशा में प्रशासन ने कमर कस ली है. तय समय-सारिणी के अनुसार प्रशिक्षण से लेकर फील्ड वर्क तक की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि राज्य के प्रत्येक नागरिक का सटीक विवरण दर्ज हो सके और भविष्य की योजनाएं ठोस आंकड़ों के आधार पर तैयार की जा सकें.
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