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2027 की जनगणना में पहली बार होगा ये 'खास' काम, आपके लिए जानना है जरूरी!

भारत की जनगणना 2027 दो फेज में होगी, जिसमें हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना-अप्रैल से सितंबर 2026 और जनसंख्या गणना फरवरी, 2027 शामिल है.

India Census 2027
जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 2, 2026 at 8:10 PM IST

6 Min Read
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गौतम देबरॉय

नई दिल्ली: रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मार्च के तीसरे सप्ताह तक जनगणना 2027 के लिए सभी संबंधित पक्षों (मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर, गणनाकारों और पर्यवेक्षकों) का प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश दिया है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अप्रैल 2026 से मकानों की सूची बनाने और आवास जनगणना का काम शुरू होने जा रहा है.

नए 'लोकेशन कोड' दिए जाएंगे

भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा है कि 2011 के बाद बने 19 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों को 2027 की जनगणना के दौरान नया लोकेशन कोड दिया जाएगा.

आरजीआई ने स्पष्ट किया कि 2011 के बाद बने नए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में, जिस 'मूल राज्य' से इन्हें अलग किया गया है, उसका शॉर्ट कोड 2011 वाला ही रहेगा. वहीं, नए बने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को अगला बढ़ता हुआ (Incremental) कोड आवंटित किया जाएगा.

लोकेशन कोड क्या है?

लोकेशन कोड एक विशिष्ट संख्या (Unique Number) होती है, जिसके जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की किसी भी प्रशासनिक इकाई के हर क्षेत्र की पहचान की जाती है. जनगणना कराने की प्रक्रिया में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है.

कोड आवंटन का नियम

नियम के अनुसार, 2011 के बाद बने नए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में, जिस मूल राज्य से इन्हें अलग किया गया है, उसका शॉर्ट कोड 2011 वाला ही रहेगा. वहीं, नए बने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को अगला बढ़ता हुआ कोड दिया जाएगा.

जनगणना में नई तकनीक और नवाचार

भारत के महापंजीयक ने कहा कि जनगणना 2027 दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास के रूप में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसमें 140 करोड़ से अधिक की आबादी को कवर किए जाने की उम्मीद है.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे संदेश में मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया, "जनगणना के इस दौर में डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना, जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली और हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएशन (HLBC) वेब पोर्टल जैसे क्रांतिकारी तकनीकी नवाचार पेश किए जा रहे हैं. इससे फील्ड गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी और डेटा का रीयल-टाइम प्रसारण संभव हो सकेगा."

जनगणना 2027 का प्रथम चरण

महापंजीयक नारायण के अनुसार, जनगणना 2027 का पहला चरण- मकानों की सूची और आवास गणना (HLO) पूरी जनगणना की नींव है. राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में लगभग 32 लाख जनगणना कर्मियों (रिजर्व सहित) को लगाया जाएगा. चूंकि डेटा की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि जनगणना के सिद्धांतों और सवालों को कितनी स्पष्टता से समझा गया है, इसलिए फील्ड कर्मियों का प्रभावी प्रशिक्षण एक सफल जनगणना का मुख्य आधार है.

जनगणना 2027 का द्वितीय चरण

जनगणना का दूसरा चरण, यानी जनसंख्या गणना (PE), फरवरी 2027 से शुरू होगा. हालांकि, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्रों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों में यह गणना सितंबर 2026 में ही कर ली जाएगी.

जाति गणना भी होगी शामिल

जनगणना 2027 के इस दूसरे चरण में जाति गणना (Caste Enumeration) को भी शामिल किया जाएगा. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने हाल ही में संसद में जानकारी दी है कि, "दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना के दौरान, हर व्यक्ति के जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किए जाएंगे."

प्रशिक्षण का ढांचा

नारायण ने बताया कि आरजीआई के अधिकारी और बाहरी विशेषज्ञ जनगणना से संबंधित सभी अवधारणाओं, प्रक्रियाओं और डिजिटल टूल्स के ज्ञान का मुख्य स्रोत होंगे. वे सभी स्तरों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने और 'नेशनल ट्रेनर्स' को प्रशिक्षित करने के लिए जिम्मेदार हैं.

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत फरवरी के दूसरे सप्ताह में राज्य और मंडल स्तर के अधिकारियों तथा मुख्य जनगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण से होगी. यह पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया मार्च के तीसरे सप्ताह तक संपन्न कर ली जाएगी.

प्रशिक्षण का कार्य कैसे चलेगा

  • 100 नेशनल ट्रेनर्स (NTs) लगभग 2,000 मास्टर ट्रेनर्स (MTs) को प्रशिक्षित करेंगे.
  • ये मास्टर ट्रेनर्स आगे करीब 44,000 फील्ड ट्रेनर्स (FTs) को तैयार करेंगे.
  • अंत में, ये फील्ड ट्रेनर्स लगभग 31 लाख गणनाकारों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) को ट्रेनिंग देंगे.

जनगणना कर्मियों का मानदेय

भारत के महापंजीयक (RGI) के अनुसार, सभी जनगणना कर्मियों की नियुक्ति जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के तहत की जाएगी. उन्हें सौंपे गए कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा.

  • प्रथम चरण (मकानों की सूची और आवास गणना - HLO): प्रत्येक गणनाकार और पर्यवेक्षक को 9,000 रुपये दिए जाएंगे.
  • द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना - PE): प्रत्येक गणनाकार और पर्यवेक्षक को 16,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा.
  • राज्य नोडल अधिकारी को पहले चरण के लिए 30,000 रुपये और दूसरे चरण के लिए 45,000 रुपये दिये जाएंगे.
  • मुख्य/अतिरिक्त मुख्य जनगणना अधिकारी और मंडल आयुक्त को पहले चरण (HLO) के लिए 25,000 रुपये और दूसरे चरण (PE) के लिए 35,000 रुपये दिये जाएंगे.
  • जिला/शहर जनगणना अधिकारी और जिला सूचना अधिकारी (DIO) को पहले चरण के लिए 20,000 रुपये और दूसरे चरण के लिए 25,000 रुपये (प्रति जिला अधिकतम 8 अधिकारी) दिये जाएंगे.
  • अनुमंडल अधिकारी (SDO) और चार्ज अधिकारी को पहले चरण के लिए 20,000 रुपये और दूसरे चरण के लिए 25,000 रुपये मिलेंगे.

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