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'भारत के सामने परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौती, इस युग में स्मार्ट युद्ध की रणनीति जरूरी', उत्तराखंड में बोले CDS चौहान

CDS अनिल चौहान ने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए नेशनल सिक्योरिटी के मुद्दे पर चर्चा की.

CDS at Srinagar University
CDS अनिल चौहान ने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए नेशनल सिक्योरिटी के मुद्दे पर चर्चा की (PHOTO-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 21, 2026 at 1:36 PM IST

7 Min Read
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श्रीनगर गढ़वाल (उत्तराखंड): पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर गढ़वाल में स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने शिरकत की. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर छात्र-छात्राओं से गंभीर चर्चा की. अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन भारतीय सामरिक परंपराओं से लेकर आधुनिक युद्ध रणनीतियों तक की व्यापक व्याख्या करते हुए युवाओं को रणनीतिक सोच के लिए प्रेरित किया.

सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि, राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुदृढ़ बनाने में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. उन्होंने भारत में सामरिक शोध की कमी की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि,

पौराणिक काल से ही भारत में सामरिक चिंतन और शोध की समृद्ध परंपरा रही है. धनुर्वेद में व्यूह रचना, धनुर्विद्या (धनुष चलाने की विद्या) और सेना संचालन का विस्तृत वर्णन मिलता है. जबकि अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में राज्य संरक्षण, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक रणनीति का स्पष्ट उल्लेख है. चाणक्य की रणनीतिक दृष्टि आज भी भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सोच में परिलक्षित होती है.
- अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, भारत -

सीडीएस अनिल चौहान ने इतिहास के संदर्भ में कहा कि, मुगल काल के दौरान लगभग 800 सालों तक भारत की सामरिक सोच कमजोर पड़ी. साल 1947 में देश भौतिक रूप से स्वतंत्र हुआ, लेकिन मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में समय लगा. उन्होंने मौलिक और स्वदेशी सोच पर जोर देते हुए कहा कि, केवल पश्चिमी रणनीतियों पर आधारित योजनाओं से पूर्ण सफलता संभव नहीं है. यदि हथियार, युद्ध नीति और रणनीति मौलिक हों, तो ही स्थायी और निर्णायक सफलता सुनिश्चित की जा सकती है.

राष्ट्रीय सुरक्षा की संरचना को स्पष्ट करते हुए उन्होंने इसके तीन प्रमुख घेरों की चर्चा की-

  • पहला- बाहरी घेरा दीर्घकालीन रणनीतिक आकलन से जुड़ा है, जिसमें कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक शामिल हैं.
  • दूसरा- मध्य घेरा राष्ट्र की रक्षा व्यवस्था से संबंधित है.
  • तीसरा- आंतरिक घेरा आत्मनिर्भरता, सेनाओं की संरचना और युद्ध योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित है.
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सीडीएस ने छात्रों को बताया कि अब युद्ध में स्मार्ट युद्ध की रणनीति जरूरी है. (PHOTO-ETV Bharat)

उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य में युद्ध के स्वरूप में आ रहे बदलावों पर भी प्रकाश डाला. सीडीएस ने कहा कि,

पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ अब इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस और सूचना आधारित युद्ध अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं. भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौती है. जिन्होंने भारतीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है. परमाणु संतुलन के कारण लंबे युद्ध की संभावना कम होती है. लेकिन आतंकवाद, आंतरिक अस्थिरता और सीमा विवाद जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. देश को दीर्घकालीन युद्ध की तैयारी के साथ-साथ छोटे, सटीक और स्मार्ट युद्ध की रणनीति पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा.
- अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, भारत -

कार्यक्रम के अंत में सीडीएस ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रों से सीधे संवाद कर उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए. इस मौके पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर, बौद्धिक और सार्थक चर्चा देखने को मिली, जिसने छात्रों में सामरिक सोच और राष्ट्रहित के प्रति नई समझ विकसित की.

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज पहुंचे सीडीएस: गढ़वाल विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के बाद सीडीएस अनिल चौहान श्रीनगर स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. मेडिकल कॉलेज के प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीडीएस जनरल अनिल चौहान, प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और प्राचार्य आशुतोष सयाना ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया.

CDS at Srinagar University
सीडीएस अनिल चौहान ने छात्रों के साथ राष्ट्र सुरक्षा पर बातचीत की. (PHOTO-ETV Bharat)

छात्रों को संबोधित करते हुए जनरल अनिल चौहान ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि जागरूक नागरिक भी राष्ट्र की पहली रक्षा पंक्ति होते हैं. नागरिक, खतरों की पहचान कर उन्हें रिपोर्ट करते हैं, राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाए रखते हैं.

सीडीएस ने मेडिकल छात्रों को समाज का स्वास्थ्य रक्षक बताते हुए कहा कि, आपदा, महामारी और आपात परिस्थितियों में उनकी भूमिका सीधे राष्ट्रसेवा से जुड़ी होती है. इस तरह वे भी राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण भागीदार हैं. उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा का स्वरूप अधिक जटिल हो गया है और खतरे पारंपरिक सैन्य क्षेत्रों से आगे बढ़कर साइबर, आर्थिक, तकनीकी और जैविक क्षेत्रों तक फैल चुके हैं. तेज तकनीकी प्रगति ने चुनौतियों को बहुआयामी बनाया है, इसलिए Whole-of-Nation Approach (होल ऑफ नेशन अप्रोच) के तहत हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है.

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मंच पर मौजूद सीडीएस अनिल चौहान, विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रकाश सिंह, उत्तराखंड कैबिनेट धन सिंह रावत समेत अन्य गणमान्य (PHOTO-ETV Bharat)

जनरल चौहान ने राष्ट्र-राज्य की अवधारणा को भूमि, लोग और विचारधारा एवं संस्थाओं पर आधारित बताते हुए कहा कि वैश्वीकरण और तकनीकी परिवर्तन के कारण पारंपरिक सुरक्षा अवधारणाएं बदल रही हैं. उन्होंने वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के प्राकृतिक चयन सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जो बदलाव के साथ अनुकूलित होता है वही आगे बढ़ता है.

सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि, यह कार्रवाई प्रतिशोध नहीं बल्कि आतंकी ढांचों को निशाना बनाकर नई सामान्य स्थिति स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम था. सीडीएस ने अंत में कहा कि, राष्ट्र की सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जागरूक नागरिक राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं और आप जैसे चिकित्सा छात्र राष्ट्र निर्माण और सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.

CDS at Srinagar medical collage
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आशुतोष सयाना और स्टाफ ने सीडीएस अनिल चौहान का स्वागत किया. (PHOTO-ETV Bharat)

छात्राएं बोलीं, सीडीएस का संबोधन रहा प्रेरणादायी: एमबीबीएस छात्रा इशिता, शिखा और शीतल ने कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के मेडिकल कॉलेज आगमन से छात्रों में विशेष उत्साह देखने को मिला. उन्होंने कहा कि सीडीएस सर का संबोधन हमारे लिए बेहद प्रेरणादायी रहा. उन्होंने जिस तरह मेडिकल छात्रों की भूमिका को राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जोड़ा, उससे हमें अपने पेशे की जिम्मेदारी और महत्व का एहसास हुआ. उनके अनुभव और विचारों से हमें न केवल देश सेवा के लिए प्रेरणा मिली, बल्कि भविष्य में बेहतर डॉक्टर बनकर समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने का संकल्प भी मजबूत हुआ.

सेंट्रल लाइब्रेरी को दान की पुस्तकें: वहीं कार्यक्रम के दौरान, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में ज्ञान और शोध को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली. रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने अपनी पत्नी अनुपमा चौहान की इच्छा और प्रेरणा पर विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को 227 महत्वपूर्ण पुस्तकें दान स्वरूप प्रदान कीं. ये पुस्तकें सामरिक अध्ययन, सैन्य इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, नीति-निर्माण एवं शोध से जुड़े विविध विषयों पर आधारित हैं, जिनसे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को दीर्घकालीन अकादमिक लाभ मिलेगा.

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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के स्टाफ के साथ सीडीएस अनिल चौहान (PHOTO-ETV Bharat)

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट ने बताया कि अनुपमा चौहान मूल रूप से एता गांव, दुगड्डा (कोटद्वार) क्षेत्र की रहने वाली हैं. उनके पिता स्वर्गीय वाईएस नेगी एसएसबी श्रीनगर में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर कार्यरत रहे. परिवार कई वर्षों तक श्रीनगर के भक्तियाना क्षेत्र में रहा और उसी दौरान अनुपमा चौहान ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की. यह स्मृतियां लगभग 1980 के दशक से जुड़ी हुई हैं, जो विश्वविद्यालय से उनके गहरे भावनात्मक और शैक्षिक संबंध को दर्शाती हैं.

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