दिल्ली में प्रवासियों के नाम पर आया FCI का चावल व्यापारियों को बेचा, CBI की FIR में बड़ा खुलासा
व्यापारियों ने एफसीआई के डिपो से चावल उठाया और उसे आगे दूसरे व्यापारियों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया. चंचल मुखर्जी की रिपोर्ट.


Published : September 1, 2026 at 6:49 PM IST
नई दिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) के वरिष्ठ अधिकारियों सहित आठ नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह मामला एक कथित साजिश से जुड़ा है, जिसके तहत व्यापारियों ने एफसीआई के डिपो से चावल उठाया और उसे आगे दूसरे व्यापारियों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया. जिससे एफसीआई को भारी नुकसान हुआ.
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, एफसीआई के दिल्ली क्षेत्र ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था. इसमें से नेरामैक ने 'ओएमएसएस (डी)' योजना के तहत 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर 50,645 मीट्रिक टन चावल उठाया. जबकि उस समय चावल की मौजूदा आरक्षित कीमत 2,890 रुपये प्रति क्विंटल थी.
10 जुलाई, 2025 की ओएमएसएस(डी) 2025-26 नीति की धारा बी(i)5 और बी(vii) के अनुसार, भारत सरकार का उपक्रम होने के नाते नेरामैक बिना ई-नीलामी के चावल आवंटन के लिए पात्र नहीं था. बिना ई-नीलामी के चावल आवंटन के लिए केवल राज्य सरकारें और राज्य सरकारों के निगम ही पात्र थे. चावल आवंटन के बदले किया गया भुगतान विभिन्न निजी संस्थाओं के माध्यम से भेजा गया था, जो या तो राइस मिलर्स थे या चावल के थोक व्यापारी थे.
एफआईआर के मुताबिक, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चले कि चावल को उसी उद्देश्य के लिए बांटा गया था जिसके लिए वह लिया गया था. इसके अलावा, पुराने स्टॉक को पहले निकालने के लिए 'फीफो' (FIFO - फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट) नियम का भी पालन नहीं किया गया. यदि नेरामैक द्वारा रियायती दर पर उठाए गए इस चावल को 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन की आरक्षित कीमत पर नीलामी में बेचा जाता, तो एफसीआई को 28.87 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होती.
एफआईआर में कहा गया है कि गुवाहाटी स्थित नेरामैक के अधिकारी ने 7 जनवरी, 2026 को दिल्ली सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री से ओएमएसएस(डी) 2025-26 के तहत "ई-नीलामी में शामिल हुए बिना चावल की बिक्री" श्रेणी के अंतर्गत प्रति सप्ताह 31,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित करने का अनुरोध किया था. इसका उद्देश्य दिल्ली में रहने वाले आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिक वर्ग, प्रवासी कामगारों और राशन कार्ड न होने के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर छूटे लोगों को किफायती दरों पर चावल उपलब्ध कराना था.
इसके बाद, नेरामैक ने उपभोक्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों जैसे कि निजी खुदरा विक्रेताओं, थोक व्यापारियों और एनजीओ (NGOs) को कृषि उत्पाद वितरित करने के लिए 25 मार्च, 2026 को असम और कोलकाता की तीन संस्थाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए तीन अलग-अलग समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए थे.
एफआईआर में आगे कहा गया- "इन समझौतों की न तो नेरामैक के कानूनी सलाहकार से जांच कराई गई और न ही इन्हें नोटरी कराने के लिए पीएंडए विभाग को भेजा गया. इन समझौतों में लिखा गया उद्देश्य, नेरामैक द्वारा 7 जनवरी, 2026 को दिल्ली सरकार को भेजे गए प्रस्तावों में बताए गए उद्देश्य से बिल्कुल अलग था. यह आरोप है कि नेरामैक ने समझौतों में झूठा उल्लेख किया था कि उसे ओएमएसएस(डी) नीति के तहत चावल खरीदने और बांटने के लिए अधिकृत किया गया है, जबकि एफसीआई द्वारा उसे ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया गया था."
एफआईआर के अनुसार, यह आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों और प्रवासी कामगारों को चावल बांटने के बजाय- जैसा कि नेरामैक द्वारा दिल्ली सरकार को दिए गए और बाद में एफसीआई दिल्ली क्षेत्र को भेजे गए प्रस्तावों में कहा गया था- नेरामैक ने दिल्ली-एनसीआर के कई व्यापारियों से संपर्क किया. उनसे कहा गया कि वे नेरामैक के बैंक खाते में 23.25 रुपये प्रति किलोग्राम जमा करके एफसीआई के डिपो से चावल उठा लें और इसके बदले उन्हें (नेरामैक को) 0.64 रुपये से 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच कमीशन दें.
ये व्यापारी इस बात पर सहमत हो गए और समय-समय पर नेरामैक के बैंक खाते में 23.25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से एडवांस पैसा भेजते रहे. इसके बाद नेरामैक ने अपने प्रशासनिक शुल्क के रूप में 5 पैसे प्रति किलोग्राम काटकर, चावल के आवंटन और उसे जारी कराने के लिए वही पैसा एफसीआई दिल्ली क्षेत्र को ट्रांसफर कर दिया.
व्यापारियों ने नेरामैक (NERAMAC) के अधिकारियों को उन लोगों के नाम बताए जिन्हें नई दिल्ली के घेवरा, मायापुरी और नरेला स्थित एफसीआई डिपो से चावल उठाने के लिए अधिकृत किया जाना था. इसके बाद नेरामैक ने 18 अप्रैल, 2026 से एफसीआई को कई पत्र जारी किए, जिनमें इन लोगों को एफसीआई डिपो से चावल की डिलीवरी लेने के लिए नेरामैक के प्रतिनिधियों के रूप में अधिकृत किया गया था.
एफआईआर में दावा किया गया है कि इन व्यापारियों ने एफसीआई डिपो से चावल उठाया और उसे आगे दूसरे व्यापारियों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया. आरोप है कि नेरामैक के रिकॉर्ड में यह दिखाने के लिए फर्जी तारीखवार चार्ट तैयार करके रखे गए थे कि दिल्ली और नोएडा के विभिन्न स्थानों पर खुदरा दुकानों के माध्यम से जनता को चावल बांटा गया है. एक निजी कंपनी द्वारा ओएमएसएस(डी) से जुड़े काम को पूरा करने के लिए 23 उप-वितरकों की नियुक्ति दिखाने के लिए व्यापारियों द्वारा फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए गए थे और इन पत्रों को नेरामैक के रिकॉर्ड में रखा गया था.
एफसीआई के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 13 अप्रैल, 2026 से 15 मई, 2026 के बीच नेरामैक को 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था. लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल जारी किया गया. जिससे एफसीआई को 28.87 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
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