हरियाणा के IDFC फंड के गबन मामले में CBI का बड़ा एक्शन, 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल, 6 IAS अधिकारी और 4 बैंकर शामिल
CBI ने हरियाणा के IDFC फंड के गबन मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है.

Published : September 2, 2026 at 4:33 PM IST
चंडीगढ़ : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंचकूला में CBI मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष 19 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. ये मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संगठनों के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है, जो IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे गए थे. इस मामले में CBI द्वारा दाखिल की गई यह तीसरी चार्जशीट है.
6 आईएएस अफसर शामिल : यह चार्जशीट हरियाणा कैडर के छह IAS अधिकारियों, IDFC फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी और हरियाणा राज्य सरकार के नौ अन्य अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की गई है. इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने, खातों में हेरफेर, आपराधिक विश्वासघात और अपराध में उकसाने (BNS के तहत), रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत) के आरोप हैं.
मिलीभगत कर धोखाधड़ी की : जांच से पता चला कि आरोपी सरकारी अधिकारियों ने IDFC फर्स्ट और AU स्मॉल फाइनेंस बैंकों के आरोपी बैंकरों के साथ मिलीभगत करके एक सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया. हरियाणा सरकार के 8 विभागों का फंड, जो विभिन्न अधिकृत बैंकों में था, उसे IDFC और AU स्मॉल फाइनेंस बैंकों की खास शाखाओं में ट्रांसफर किया गया. साजिश के तहत, इन बैंक शाखाओं में खाते खोले गए थे जहां आरोपी बैंक अधिकारी काम कर रहे थे. इस प्रक्रिया में, वित्तीय समझदारी और धोखाधड़ी की रोकथाम पर हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया. इन खातों से फंड को धोखाधड़ी के तरीकों से निकाला गया और ऐसी तीसरी पार्टियों को ट्रांसफर किया गया जिनका सरकारी विभागों से कोई लेना-देना नहीं था.
कुल 504 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी : ट्रांसफर की गई रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और कैश में बदल दिया गया, जिससे आरोपियों ने गलत तरीके से खुद को फायदा पहुंचाया. हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों - पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP), हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड (HLWB), हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) पर इस घोटाले का असर पड़ा. इस धोखाधड़ी की कुल रकम 504 करोड़ रुपये है.
चार्जशीट में अब तक 37 लोग शामिल : राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने हरियाणा के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो से जांच अपने हाथ में ली थी. मौजूदा चार्जशीट से पहले, CBI इस मामले में 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी, जिनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारी, हरियाणा सरकार के सरकारी कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल थीं. मौजूदा चार्जशीट दाखिल होने के साथ, इस मामले में अब तक चार्जशीट किए गए लोगों की कुल संख्या 37 हो गई है. CBI ने इस मामले में 54 जगहों पर तलाशी ली है और लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य के सोने सहित कई अहम सबूत ज़ब्त किए हैं, साथ ही अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
चंडीगढ़ से भी दो मामले हाथों में लिए : CBI ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से दो अन्य संबंधित मामले भी अपने हाथ में लिए हैं. एक चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़ा है, और दूसरा चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) से संबंधित है. इन दोनों मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. अन्य संदिग्धों/आरोपियों के खिलाफ़ तीनों मामलों की आगे भी जांच जारी रहेगी. CBI सभी जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सार्वजनिक धन का पूरा पता लगाया जाए और अपराध से हासिल हुई रकम का प्रभावी ढंग से पता लगाया जा सके.
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