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हिमाचल में क्यों हो रहे पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे, आखिर क्या गलती कर बैठते हैं सोलो पायलट्स?

हिमाचल में क्यों हो रहे हैं पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे? क्या पैराग्लाइडिंग करवाने वाले नियमों की अनदेखी करते हैं या फिर कुछ और कारण है?

Causes of Paragliding Crash in Himachal
पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : October 27, 2025 at 11:07 AM IST

11 Min Read
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बाल कृष्ण शर्मा की रिपोर्ट

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और कुल्लू जिले में पिछले दिनों पैराग्लाडिंग के दौरान हादसे की वजह से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे क्यों हो रहे हैं, और पैराग्लाइडिंग को लेकर क्या नियम है? पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग साइट पर सैलानी एडवेंचर का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं, लेकिन इन साहसिक गतिविधियों के दौरान आए दिन हादसे सामने आ रहे हैं. आज के एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि आखिर पैराग्लाइडर के साथ-साथ सैलानियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि पहाड़ों का दीदार करने आए पर्यटकों के साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो.

क्या हैं पैराग्लाइडिंग के नियम?

नियमों के अनुसार, 12 वर्ष से कम या 30 किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों को पैराग्लाइडिंग करवाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. पैराग्लाइडर पायलट प्रतिभागियों के साथ कोई हवाई कलाबाजी नहीं कर सकता है. उपकरणों पर अधिक भार या कम भार नहीं डाला जाएगा. इसके अलावा प्रत्येक उड़ान से पहले सभी प्रतिभागियों को पूर्ण सुरक्षा जानकारी देना अनिवार्य होती है. वहीं, हृदय रोग, मिर्गी, फेफड़े के रोग, अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को पैराग्लाइडिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी. इन सभी नियमों का पैराग्लाइडिंग के दौरान पालन करना काफी आवश्यक है.

RULES OF PARAGLIDING
पैराग्लाइडिंग के वक्त ध्यान रखें ये बातें (ETV Bharat GFX)

क्या है एयरो स्पोर्ट्स नियम 2022?

एयरो स्पोर्ट्स नियम 2022 में पैराग्लाइडर में सेफ्टी पैराशूट और प्रत्येक टेक ऑफ और लैंडिंग साइट पर एंबुलेंस का होना अनिवार्य होता है. दस्ताने, टखने के जूते, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स और मरम्मत किट, हेलमेट, सीढ़ी, आठ मिलीमीटर व्यास की 50 मीटर रस्सी, मास्क के साथ कैरबिनर सिलेंडर होना जरूरी. प्रत्येक पैराग्लाइडर के लिए दो पुली और ऑक्सीजन, दो तरफा रेडियो संचार उपकरण, उपकरण पैनल (अल्टीमीटर, कंपास, वायु गति सूचक) होना अनिवार्य है.

इसके अलावा, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (सोलो पायलट के लिए) और पायलट की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड नाम समेत डिजिटल लॉग बुक में दर्ज होना चाहिए. पायलट चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ, पैराग्लाइडिंग करवाने के लिए पायलट, यात्री समेत अन्य व्यक्तियों के लिए 10 लाख रुपए तक का बीमा होना चाहिए. पायलट को टेंडम लाइसेंस के लिए आवेदन करने से पहले एसआईवी (एडवांस कोर्स) पूरा करना अनिवार्य है.

RULES OF PARAGLIDING
पैराग्लाइडिंग के वक्त ध्यान रखें ये बातें (ETV Bharat GFX)

हादसे को लेकर पैराग्लाइडिंग ऑपरेटर का तर्क

पर्यटकों में पैराग्लाइडिंग के बढ़ते रोमांच को देखकर प्रशासन ने डोभी, नांगाबाग, गड़सा में साइट चिन्हित की है. अब यहां पर मानसून के 2 माह जुलाई और अगस्त को छोड़कर पूरा साल पैराग्लाइडिंग हो रही है. वहीं, पैराग्लाइडिंग के दौरान होने वाले हादसों के पीछे ऑपरेटरों का तर्क है कि, उड़ान भरने के बाद पर्यटक सुरक्षा की दृष्टि से बांधी गई बेल्ट की पकड़ को ढीली कर देते हैं, जिसके चलते यह हादसे पेश आ रहे हैं.

पैराग्लाइडिंग के दौरान होने वाले खतरों से पर्यटकों को कराया जाता है रूबरू

हालांकि, जब भी पर्यटक पैराग्लाइडिंग के लिए पहुंचते हैं तो यहां पर पैराग्लाइडर ऑपरेटर के द्वारा उनसे एक फॉर्म भी साइन करवाया जाता है. जिसमें पैराग्लाइडिंग के दौरान होने वाले खतरों से भी अवगत करवाया जाता है. पर्यटक फॉर्म में सभी निर्देशों को पढ़ने के बाद उस पर साइन करते हैं और उसके बाद हवा में रोमांच के लिए तैयार हो जाते हैं.

Paragliding in Himachal
हिमाचल में पैराग्लाइडिंग (ETV Bharat)

2022 में हादसे के बाद अवैध पैराग्लाइडिंग पर लगी थी अंकुश

कुल्लू जिले में साल 2022 के मई माह में कर्नाटक के एक पर्यटक की मौत के बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पैराग्लाइडिंग पर रोक लगा दी थी. हाईकोर्ट ने पैराग्लाइडिंग के लिए नियमावली बनाने, पायलट को प्रशिक्षित करने और पैराग्लाइडर की जांच करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रशासन ने भी यहां पर अवैध रूप से हो रही पैराग्लाइडिंग पर अंकुश लगाया था. अब पंजीकृत ऑपरेटर, लाइसेंस शुदा पायलट को ही पैराग्लाइडिंग की अनुमति है. वहीं, पैराग्लाइडर को भी नियमों का पालन करते हुए ही पैराग्लाइडिंग करवाने के निर्देश दिए गए हैं.

पैराग्लाइडिंग साइट्स दुर्घटनाओं पर हिमाचल हाईकोर्ट का स्वत: संज्ञान

उल्लेखनीय है कि, हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के दौरान पर्यटकों और खिलाड़ियों की मौत को लेकर स्वत: संज्ञान लिया हुआ है. हाईकोर्ट ने उन पैराग्लाइडिंग साइट्स पर खेल गतिविधियों पर रोक लगा रखी है, जहां कोई भी मार्शल तैनात नहीं हैं. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में ये बताया था कि हिमाचल प्रदेश एयरो स्पोर्ट्स नियम, 2022 के नियम 9 (6) के मुताबिक इन खेलों में भाग लेने वालों के लिए 10 लाख रुपए का व्यापक बीमा प्रदान किया गया है.

KULLU PARAGLIDING SITE
कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग साइट और पायलट की संख्या (ETV Bharat GFX)

2018 से जनवरी 2025 तक 16 लोगों की मौत

डोभी की साइट सबसे ऊंची है और यहां पर पैराग्लाइडिंग के दौरान अकसर हादसे भी पेश आ रहे हैं. साल 2022 में यहां पर 2 पर्यटकों की जान भी चली गई. दोनों हादसों में उड़ान भरने के बाद पर्यटक पैराग्लाइडर से छिटककर काफी ऊंचाई से नीचे गिरे. कुल्लू जिले में साल 2018 से लेकर जनवरी 2025 तक पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे में 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 9 पर्यटक इस दौरान घायल हुए हैं. साल 2019 में डोभी साइट में दो पर्यटकों की मौत हुई थी.

पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे

  1. 18 अक्टूबर को कैनेडियन महिला पैराग्लाइडर की क्रैश लैंडिंग के दौरान मौत
  2. धर्मशाला में 13 जुलाई 2025 को पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे में एक पर्यटक की मौत, जबकि पायलट गंभीर रूप से घायल
  3. साल 2018 से लेकर जनवरी 2025 तक पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे में 16 लोगों की मौत
  4. साल 2018 से लेकर जनवरी 2025 तक पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे में 9 पर्यटक हुए घायल

कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग साइट और पायलट

कुल्लू जिले में सोलंग नाला, मढ़ी, मझाच, डोभी, कोठी, गड़सा, नांगाबाग साइट पैराग्लाइडिंग के लिए चिन्हित की गई हैं. 7 साइट में पर्यटन विभाग की तकनीकी कमेटी जांच करती है और उसके बाद ही पैराग्लाइडर को उड़ान भरने की अनुमति दी जाती है. इसके अलावा सोलंग नाला में 180 पायलट, डोभी में 196, मझाच में 4, नांगाबाग में 15, गड़ासा में 40 पायलट, कोठी में 4 और मढ़ी में 3 पायलट पंजीकृत हैं. इस तरह से कुल्लू जिले में कुल 442 पैराग्लाइडिंग पायलट हैं.

Paragliding in Himachal
कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग साइट (ETV Bharat)

कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग साइट

  1. कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग के लिए 7 साइट चिन्हित
  2. सोलंग नाला, मढ़ी, मझाच, डोभी साइट
  3. कोठी, गड़सा, नांगाबाग साइट चिन्हित
  4. पर्यटन विभाग की तकनीकी कमेटी जांच के बाद देती है पैराग्लाइडिंग की अनुमति

एक पायलट एक दिन में 4 से अधिक उड़ान नहीं भर सकेगा

अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान में तैनात प्रशिक्षक गिमनर सिंह ने बताया कि, "पर्यटन विभाग के द्वारा तैयार किए गए नए नियमों के अनुसार साइट पर 1 पायलट एक दिन में 4 से अधिक उड़ानें नहीं भर सकेगा. वहीं, अगर पायलट लाइसेंस कार्ड गले में लटकाए बिना साहसिक गतिविधियों को कराता पकड़ा गया तो उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है. इसके अलावा पैराग्लाइडिंग पर जाने से पहले पर्यटक यह देख लें कि मौसम साफ है या नहीं. जब मौसम पैराग्लाइडिंग के लिए सुरक्षित हो, तभी पैराग्लाइडिंग करने जाएं."

सैलानी भी पैराग्लाइडिंग के दौरान रखें नियमों का ख्याल

अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान में तैनात प्रशिक्षक गिमनर सिंह ने कहा कि, पर्यटक उड़ान भरने से पहले पायलट को अपना लाइसेंस दिखाने के लिए कहें और सुनिश्चित करें कि वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के साथ पंजीकृत है. साथ ही पर्यटक पैराग्लाइडिंग से पहले पायलट का नाम पता सब पूछ लें. जब ये सारी बातें क्लियर हो जाएं तो पैराग्लाइडिंग के दौरान किन-किन बातों और नियमों का ध्यान रखना है. उन सबके बारे में भी जानकारी ले लें. पैराग्लाइडिंग सेफ्टी गाइडलाइन का विशेष ध्यान रखें.

Paragliding in Himachal
पैराग्लाइडिंग के दौरान सावधानी जरूरी (ETV Bharat)

सोलो पायलट इन बातों का रखें ध्यान

"सोलो पैराग्लाइडिंग उड़ान सिर्फ प्रशिक्षित पायलट को ही भरनी चाहिए. क्योंकि उन्हें सही जगह पर उतरने का ज्ञान रहता है. हिमाचल प्रदेश में विदेशियों के साथ जो दुर्घटना पेश आती है. उसमें अधिकतर कारण तकनीकी खराबी या फिर मौसम खराब होना ही रहता है. ऐसे में सोलो पैराग्लाइडिंग उड़ान भरने से पहले पायलट को चाहिए कि वह मौसम विभाग के द्वारा जारी की गई सूचना का भी अनुपालन करें." - रोशन ठाकुर, पैराग्लाइडर पायलट

सोलो पैराग्लाइडिंग के वक्त विशेष सावधानी बरतने की जरूरत

मनाली के मशहूर पैराग्लाइडर पायलट रोशन ठाकुर ने बताया कि, "सोलो फ्लाइट उड़ान के दौरान भी सैलानियों को काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है. क्योंकि जब पायलट के द्वारा उड़ान भरी जाती है तो कई बार आसमान में मौसम भी खराब हो जाता है. ऐसे में तेज हवा के चलते पैराग्लाइडर पायलट अपनी दिशा भटक सकता है."

समय-समय पर पैराग्लाइडिंग साइट की जांच

कुल्लू जिला पर्यटन अधिकारी रोहित शर्मा ने बताया कि, "समय-समय पर सभी पैराग्लाइडिंग साइट पर पर्यटन विभाग की टीम के द्वारा जांच की जाती है. इसके अलावा साइट पर कर्मचारियों की भी तैनाती की जाती है. ताकि मौके पर ही देखा जा सके कि पैराग्लाइडर पायलट नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं. सैलानियों को भी साहसिक खेलों के जोखिम के बारे में जानकारी दी जाती है."

कांगड़ा और कुल्लू में पैराग्लाइडिंग के वक्त हादसा

हिमाचल प्रदेश की बात करें तो पिछले दिनों कांगड़ा जिले में कनाडा की रहने वाली एक पैराग्लाइडर पायलट महिला की पहाड़ों में मौत हो गई थी. महिला सोलो पैराग्लाइडिंग की उड़ान भर रही थी और अचानक महिला का पैराग्लाइडर क्रैश हो गया. हादसे के बाद प्रशासन के द्वारा महिला के शव को रेस्क्यू किया गया. वहीं, दूसरा मामला जिला कुल्लू के पर्यटन नगरी मनाली के सोलंग नाला में पेश आया.

Paragliding in Himachal
हिमाचल में पैराग्लाइडिंग (ETV Bharat)

पैराग्लाइडिंग के दौरान हुई थी विदेशी महिला की मौत

रूस की रहने वाली विदेशी महिला अपने दोस्तों के साथ बीड बिलिंग से उड़ान भरकर मनाली पहुंची थी और मनाली से फिर महिला ने पैराग्लाइडिंग की उड़ान भरी थी. लेकिन, सोलंग गांव के पास महिला का पैराग्लाइडर क्रैश हो गया. स्थानीय लोगों ने महिला को रेस्क्यू किया और उसे इलाज के लिए भर्ती किया गया. इसके अलावा भी बीते कुछ सालों में यहां पर पैराग्लाइडिंग के दौरान कई हादसे से पेश आ चुके हैं और कई सैलानियों की इसमें जान चली गई है.

सोलंगनाला साइट पर हादसे की संभावना कम!

कुल्लू जिले में पैराग्लाइडिंग के लिए मनाली में पहले सोलंगनाला साइट ही चिन्हित की गई थी. इस साइट की ऊंचाई कम है और यहां पर हादसे होने की संभावना भी काफी कम है. करीब 10 साल पहले यहां पर एक हादसा हुआ था, जिसमें एक पर्यटक की जान चली गई थी इसके बाद सुरक्षा को लेकर प्रशासन और ऑपरेटरों ने कई कारगर कदम उठाए थे.

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