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2050 तक देश में होंगे 34 करोड़ बुजुर्ग; 6 लाख करोड़ का होगा केयर मार्केट, आएंगी 110 लाख नौकरियां

नीति आयोग की रिपोर्ट, दुनियाभर में 65 से अधिक उम्र वालों की आबादी होगी दोगुनी, 2040 तक 60% ज्यादा केयर वर्कर्स की होगी जरूरत.

दुनियाभर में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है.
दुनियाभर में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है. (Photo Credit; Getty)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : September 2, 2026 at 4:50 PM IST

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Updated : September 3, 2026 at 1:48 PM IST

8 Min Read
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हैदराबाद : Caregivers Niti Ayog : पूरी दुनिया में बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है. साल 2050 तक 65 प्लस उम्र वालों की आबादी 150 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. अपने देश में भी इस दौरान बुजुर्गों की संख्या करीब 34 करोड़ पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में देश-दुनिया में केयरवर्कर्स (देखभाल करने वाले) की डिमांड बढ़ेगी. साल 2030 तक भारत में केयरगिवर्स यानी बुजुर्गों-मरीजों की देखभाल करने वाला बाजार करीब 6 लाख करोड़ का हो जाएगा. इससे इस सेक्टर में भारत में ही 1.1 करोड़ नौकरियां आ सकती हैं.

संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड पॉपुलेशन एजिंग रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में दुनियाभर में 65 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों की संख्या करीब 70 करोड़ थी. साल 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 150 करोड़ के आंकड़े को भी पार कर जाएगी. मौजूदा समय पूरी दुनिया में जवानों से ज्यादा बुजुर्ग हैं. इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है. हाल ही में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अपने देश की भी बड़ी आबादी बुजुर्ग हो रही है.

NITI Aayog की ओर से हाल ही में Reimagining Care : Strategies for Empowering Caregivers in Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट जारी की गई है. इसके अनुसार साल 2022 तक भारत में बुजुर्गों की संख्या करीब 14.9 करोड़ थी. यह कुल आबादी का करीब 10.5% था. अब इसमे तेजी से इजाफा हो रहा है. दुनियाभर में साल 2019 तक 65 प्लस से ज्यादा लोगों की आबादी 70.3 करोड़ थी. साल 2050 में यह दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगी, इससे देश-दुनिया में केयरवर्कर्स की डिमांड बढ़ रही है.

जानिए क्यों जरूरी हैं केयरगिवर्स?
जानिए क्यों जरूरी हैं केयरगिवर्स? (Photo Credit; Getty)

कौन हैं केयरगिवर्स, क्या हैं इनके कार्य : विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बुजुर्गों को तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं. ऐसे लोगों को खास देखभाल की जरूरत होती है. इनके लिए केयरगिवर्स यानी देखभाल करने वाले काफी मददगार होते हैं. कई परिवार अन्य जरूरी कार्यों के कारण नियमित तौर पर यह जिम्मेदारी नहीं निभा पाते हैं, इसलिए केयरगिवर्स या केयरवर्कर्स की जरूरत होती है. ये बुजुर्गों को दवा खिलाने, नहलाने, कपड़े पहनाने, ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर आदि की जांच कराने के साथ ही उनकी डाइट आदि का भी ध्यान रखते हैं.

दुनियाभर में बढ़ रही केयर वर्कर्स की डिमांड : नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 60% लोग अपने बीमार या बुजुर्ग परिवारों की देखभाल के साथ फुल टाइम या पार्ट टाइम नौकरी करते हैं. जर्मनी में साल 2015 से 2018 के बीच देखभाल करने वालों की जरूरत 34% तक बढ़ गई. जर्मनी की संस्था डॉयचे वेले की स्टडी के अनुसार 76% देखभाल घर पर ही की जाती है. साल 2020 में जर्मनी में 1 लाख 20 हजार केयर वर्करों की जरूरत थी. यानी पूरी दुनिया में केयर वर्कर्स की डिमांड बढ़ रही है. अमीर देशों में साल 2040 तक 60% ज्यादा केयर वर्कर्स की जरूरत होगी.

5 करोड़ लोग डिमेंशिया-अल्जाइमर से पीड़ित : नीति आयोग के मुताबिक साल 2031 तक अपने देश में बुजुर्गों की संख्या 19.4 करोड़ पहुंच सकती है. इसके बाद साल 2050 तक यह संख्या 34.7 करोड़ हो सकती है. वहीं दुनियाभर में करीब 5 करोड़ लोग डिमेंशिया और अल्जाइमर की बीमारी से जूझ रहे हैं. साल 2050 तक ऐसे उम्रदराज लोगों की संख्या 15.2 करोड़ पहुंच सकती है. यानी कुल मिलाकर भारत समेत दुनिया के तमाम देश आने वाले समय में काफी संख्या में केयर वर्कस की जरूरत महसूस करेंगे.

केयरगिविंग सेक्टर को मजबूत बनाने की जरूरत : नीति आयोग ने केयरगिविंग (देखभाल) सेक्टर को मजबूत बनाने पर जोर दिया है. इसके लिए 3 सुझाव दिए गए हैं. जैसे नेशनल केयरगिविंग काउंसिल का गठन करना, ऐसा नियम बनाना जिसे केयरगिवर्स की पढ़ाई, ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट भरोसेमंद हो सकें, एक ऑनलाइन सरकारी डिजिटल पोर्टल तैयार करना, जहां सभी पंजीकृत केयरगिवर्स की जानकारी हो. इससे लोगों को घर बैठे ही सर्टिफाइड केयर वर्कर्स मिल सकेंगे.

पीएम मोदी के स्पेशल प्रोग्राम से कितने लोगों को मिली ट्रेनिंग.
पीएम मोदी के स्पेशल प्रोग्राम से कितने लोगों को मिली ट्रेनिंग. (Photo Credit; Getty)

केयरगिवर्स की ट्रेनिंग के लिए चलाए जार रहे कोर्स : नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में कई साल पहले से ही केयरगिवर्स के लिए कई तरह के ट्रेनिंग कोर्स चलाए जा रहे हैं. इनमें केयरगिविंग में सर्टिफिकेट, इंटीग्रेटेड जेरियाट्रिक केयर में पीजी डिप्लोमा, केयरगिवर्स के लिए पीएम विशेष प्रशिक्षण, पैलिएटिव और हॉस्पिस केयर, TAPAS के माध्यम से डिमेंशिया केयर, मैनेजमेंट पर ऑनलाइन बेसिक कोर्स आदि हैं. इनमें योग्यता 10वीं पास हैं. इन सभी कोर्सों में सीटें 25 से लेकर 30 तक हैं. नीति आयोग ने इनका दायरा बढ़ाने की सिफारिश की है.

कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या ने बिगाड़ा गणित : नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक भारत में हर पांच में से करीब एक व्यक्ति 60 साल या इससे ज्यादा उम्र का होगा. कुल आबादी में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी करीब 20.8% रहने का अनुमान है. अपने देश में बुजुर्गों की देखभाल परिवार के सदस्य ही करते रहे हैं, लेकिन कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या ने परिवारों में ही मौजूद केयरगिवर्स की संख्या को प्रभावित किया है.

पीएम मोदी के स्पेशल प्रोग्राम से कितने लोगों को मिली ट्रेनिंग.
पीएम मोदी के स्पेशल प्रोग्राम से कितने लोगों को मिली ट्रेनिंग. (Photo Credit; Getty)

अपने देश की 10% आबादी केयरगिविंग में : रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में करीब 10% आबादी अपने ही घर के किसी बीमार, बुजुर्ग या बच्चे की देखभाल कर रही है. एक तरह से ये लोग पारिवारिक केयरगिवर्स ही हैं.हालांकि इन्होंने इसके लिए किसी भी तरह की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. ये लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण ये काम कर रहे हैं. आने वाले समय में ऐसे लोग खुद बुजुर्गों की देखभाल करने के बजाय पैसे देकर केयरगिवर्स को यह जिम्मेदारी सौंप देंगे. यह बदलाव तेजी से आएगा.

हजारों को ट्रेनिंग, लेकिन नौकरियों का हिसाब नहीं : नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पीएम स्पेशल समेत केयरगिवर्स की कुल 8 ट्रेनिंग कोर्सों के तहत हजारों लोगों ने ट्रेनिंग ली, लेकिन इनमें से कितने लोगों को नौकरियां मिलीं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. PM Special स्कीम से कुल 36 हजार 684 जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस (NISD) के तहत साल 2018-2025 तक 4201 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया. यानी कुल 40 हजार 885 लोगों ने ट्रेनिंग ली.

पूरे देश में हैं ट्रेनिंग सेंटर, ऑनलाइन भी प्रशिक्षण : नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक केयरगिवर्स के सभी ट्रेनिंग सेंटर का संचालन नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) के हेड ऑफिस के अलावा देश के 11 क्षेत्रीय संसाधन प्रशिक्षण केंद्रों (RRTCs) के जरिए होता है. प्रशिक्षण केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर, बिहार. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में हैं. सामाजिक न्याय मंत्रालय के आधिकारिक TAPAS डिजिटल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भी केयरगिविंग की ट्रेनिंग ली जा सकती है.

केयरगिवर्स की ट्रेनिंग के लिए कोर्स.
केयरगिवर्स की ट्रेनिंग के लिए कोर्स. (Photo Credit; Getty)

6 लाख करोड़ का होगा भारतीय केयरगिविंग बाजार : नीति आयोग के अनुसार बुजुर्गों-मरीजों की देखभाल का दायरा काफी बड़ा है. इसमें घरेलू केयरगिवर्स और आया, होम नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और रिहैब, रिमोट से चलने वाले उपकरण, डे-केयर सेंटर्स आदि आते हैं. यह मार्केट 13.76% की रफ्तार से ग्रोथ कर रहा है. लिहाज साल 2030 तक भारत का केयरगिविंग बाजार सालाना करीब 6 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर वाला हो जाएगा.

1.1 करोड़ नौकरियों के आ सकते हैं मौके : रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के आकलन का भी हवाला दिया गया है. बताया गया है कि यदि भारत सरकार जीडीपी का केवल 2% हिस्सा ही देखभाल बाजार में निवेश कर दे तो देश के अंदर 1.1 करोड़ नए रोजगार के मौके आ सकते हैं. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के पास ज्यादा मौके होंगे. जितनी भी नौकरियां आएंगी उनमें करीब 43 से 74% नौकरियां महिलाओं के हिस्से में ही जाएंगी.

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Last Updated : September 3, 2026 at 1:48 PM IST