होर्मुज से लौटे उत्तराखंड के जांबाज कैप्टन, बताया वहां का खौफनाक मंजर, सिर के ऊपर से गुजरी मौत!
हरिद्वार जिले के रहने वाले कैप्टन आशीष शर्मा भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए थे. उन्होंने वहां के खौफनाक मंजर के बारे में बताया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 6, 2026 at 5:33 PM IST
रुड़की: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की शहर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा. कहानी का नाम है, 'मौत के साए में 65 दिन, आंखों के सामने मंडराती मिसाइल और ड्रोन और समंदर के बीच फंसा एक जहाज'. अब आप कहेंगे ये कैसी कहानी है. दरअसल, यह कहानी किसी फिल्म की नहीं बल्कि रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा की सच्ची दास्तां है, जो अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अपने साथियों के साथ जहाज पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में फंसे हुए थे.
कैप्टन शर्मा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे खतरनाक वॉर जोन में करीब दो महीने तक फंसे रहे, बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने 24 साथियों का भी हौसला टूटने नहीं दिया. 65 दिन तक बाद जब युद्ध के मैदान से कैप्टन शर्मा सकुशल अपने घर रुड़की पहुंचे तो घरवालों की खुशी का ठिकान नहीं रहा. परिजनों ने कैप्टन शर्मा का जोरदार स्वागत किया.
कैप्टन शर्मा का अनुभव: वापस लौटे कैप्टन शर्मा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे होने के अपना अनुभव शेयर किया है. कैप्टन शर्मा ने बताया कि उनके जहाज के साथ-साथ करीब दो से ढाई हजार जहाज भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं. कैप्टन शर्मा के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की तरफ से दागी कई मिसाइलें और ड्रोन लगातार आसमान में मंडरा रहे थे, जो सभी को डरा रहे थे.

जैसे ही उनके पास ऑर्डर आया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है तो उनका जहाज भी वहीं फंस गया था. अलग-अलग देशों के करीब दो से ढाई हजार जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए थे. जब UAE पर मिसाइल और ड्रोन दागे जा रहे थे तो उनका मलबा समुद्र में गिर रहा था और समुद्र में हम लोग जहाजों के साथ खड़े थे. कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन का मलबा गिरा भी है, जिससे जहाजों पर आग लग गई थी, जिससे हमारी चिंता और बढ़ गई थी.
- आशीष शर्मा, कैप्टन -
जैमर लगने के बाद बढ़ गई थी मुश्किल: आशीष शर्मा ने आगे बताया कि उनके जहाज पर उन्हें मिलाकर कुल 24 लोग थे. शुरू में तो परिवार से बात हो रही थी, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों से वहां पर जैमर लग गए थे, जिससे हालात और मुश्किल हो गए थे. हालांकि, इन हालात में UAE की सरकार ने उनका पूरा साथ दिया.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हैं दो से ढाई हजार जहाज: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के वर्तमान हालात के बारे में जब आशीष शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ भारतीय झंडे लगे जहाज जरूर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रॉस हुए हैं. फिलहाल तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद है. आशीष शर्मा के अनुसार उनके जहाज पर कुल 24 सदस्य थे, जिसमें से 12 सदस्यों को उन्होंने पहले ही भेज दिया था, लेकिन वो बाकी 12 सदस्यों के साथ जहाज पर ही डटे हुए थे. तीन दिन पहले ही वह और तीन अन्य सदस्य जहाज की ड्यूटी पूरी करने के बाद दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे. सोमवार देर रात वह घर पर आ गए.

सिर पर मंडरा रही थी मौत: इतना ही नहीं, कैप्टन आशीष शर्मा ने बताया कि इन हमलों का मलबा समुद्र में गिर रहा था, जो हर वक्त एक बड़े खतरे का संकेत दे रहा था. हर पल, हर मिनट, मौत का डर जहाज के हर सदस्य के साथ था. उन हालात में कैप्टन शर्मा भी काफी डरे हुए थे, लेकिन उन्होंने अपना डर साथियों को जाहिर नहीं होने दिया. क्योंकि कैप्टन शर्मा उस जहाज का कप्तान थे. उस जिम्मेदारी को कैप्टन आशीष शर्मा ने बखूबी निभाया.

कैप्टन आशीष शर्मा ने युद्ध के बीच न सिर्फ अपने आपको मजबूत रखा बल्कि अपने साथियों का हौसला भी टूटने नहीं दिया. आज जब 65 दिनों के बाद कैप्टन आशीष शर्मा अपने घर रुड़की पहुंचे तो पूरा शहर उन्हें एक हीरो के तौर पर देख रहा है. समंदर के बीच जंग के बीच कैप्टन आशीष शर्मा ने जिस हिम्मत, सूझबूझ और जिम्मेदारी की मिसाल कयाम की है. इसके लिए न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा रुड़की उन पर गर्व कर रहा है.
मुझे बेहद खुशी है कि मेरे पति सकुशल घर लौट आए, जिस समय मैं अपने पति से बात करती तो धमाकों की तेज-तेज आवाज सुनाई देती थी, जिससे मैं खुद घबरा जाती थी. लेकिन आशिष कहते थे, घबराओं मत ये ड्रोन की आवाज है. मैं खुद सोचती थी कि यदि फोन पर इतनी तेज आवाज आ रही है तो वहां क्या हाल हो रहा होगा. मेरी बेटी अलीशा कुछ ज्यादा ही परेशान हो गई थी. मैं अपने पति से सिर्फ यहीं कहती थी कि आप किसी भी तरह से घर आ जाओ.
-सरुणिका बंसल, कैप्टन आशीष शर्मा की पत्नी-
बता दें कि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. इस मार्ग से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब एक चौथाई हिस्सा गुजरता है. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के बाद से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. ईरान यहां से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहा है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए है. ईरान ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत होमुर्ज में फंसे कुछ जहाजों को निकालने के लिए गाइड कर रहे कुछ अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया. यह एक ऐसा ऑपरेशन था जिसे प्रेसिडेंट के आदेश के बाद US सेंट्रल कमांड ने शुरू किया था. इसके तहत, अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में फंसे दूसरे देशों के पोतों को सुरक्षित निकालने में मदद कर रही है.
ट्रंप के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से कई देशों के सैकड़ों जहाज और 20 हजार से ज्यादा नाविक होर्मुज में फंसे हुए हैं.. जिन्हें इस ऑपरेशन के तहत बाहर निकाला जा रहा है. अमेरिका के इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत, जमीन और समुद्र से संचालित हो सकने वाले 100 से ज्यादा विमान और 15,000 सैन्यकर्मी शामिल हैं. ईरान ने अमेरिका के इस कदम की निंदा की.. और इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया.
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