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क्या नोबेल विजेता किसी और को दे सकता है अपना प्राइज, क्या कहते हैं नियम?

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया ने अपना नोबेल पुरस्कार ट्रंप को दे दिया है. जानते हैं कि क्या नोबेल पुरस्कार ट्रांसफर किया जा सकता है.

Can a Nobel laureate give his prize to someone else?
क्या नोबेल विजेता किसी और को दे सकता है अपना प्राइज (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 18, 2026 at 2:30 PM IST

3 Min Read
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हैदराबाद : हाल ही में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में एक निजी मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक देकर वाहवाही हासिल की. इस दौरान मचाडो ने मीडिया से कहा कि मुलाकात उन्होंने सम्मान के रूप में की, ताकि अमेरिका की भूमिका को वेनेजुएला की आजादी के संघर्ष से जोड़ा जा सके. लेकिन सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर क्या नोबेल पुरस्कार को दूसरे व्यक्ति को सौंपा जा सकता है.

नोबेल पुरस्कार स्थायी और अहस्तांतरित होते हैं
नॉर्वेजियन नोबेल समिति और नोबेल शांति पुरस्कार के नियमों के अनुसार एक बार जब नोबेल पुरस्कार आधिकारिक रूप से दे दिया जाता है तो फिर इसे रद्द नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं इसी के साथ ना ही इसे बांटा जा सकता है और ना ही किसी और को ट्रांसफर किया जा सकता है. इसका तात्पर्य यह है कि इस सम्मान, उपाधि और आधिकारिक पहचान हमेशा मूल पुरस्कार विजेता के पास ही रहती है. भले ही इसके बाद उसके द्वारा फिजिकल के रूप से किसी और को भी दे दिया जाए.

मचाडो ने क्या कहा
मारिया कोरिना मचाडो को यह नोबेल शांति पुरस्कार पिछले साल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के क्रूर शासन के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया गया था. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को पदक देने के पीछे का मकसद उनकी हमारी स्वतंत्रता के प्रति अनूठी प्रतिबद्धता को पहचान देना था.

Can a Nobel laureate give his prize to someone else?
क्या नोबेल विजेता किसी और को दे सकता है अपना प्राइज, (ETV Bharat)

ट्रंप की सोशल मीडिया पर रिएक्शन
वहीं बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि मारिया ने उनके किए गए काम के सम्मान में अपना नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें भेंट किया है. उन्होंने इसे आपसी सम्मान का प्रतीक बताया और मचाडो को धन्यवाद दिया.

इतने सख्त नियम क्यों हैं
नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से स्थापित किए गए थे. उनका प्रशासन सख्त नियमों का पालन करता है. ये नियम विवाद, राजनीतिक हेरफेर या फिर पुरस्कार के बाद संशोधन को रोकने के लिए बनाए गए हैं. इन नियमों में साफ तौर पर कहा गया है कि पुरस्कार देने वाली संस्था के निर्णय के खिलाफ कोई भी अपील नहीं की जा सकती. इसके अलावा एक बार पुरस्कार घोषित होने के बाद यह हमेशा मान्य रहेगा.

इतिहास में दर्ज हैं कई उदाहरण
हालांकि इतिहास में कुछ लोगों ने नोबेल पुरस्कार लेने से मना भी किया है. इनमें जीन-पॉल सार्त्र और ले ड्यूक थो, लेकिन किसी ने भी पुरस्कार किसी और को हस्तांतरित नहीं किया. इसमें जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने पुरस्कार की राशि दान की थी, लेकिन उन्होंने यह सम्मान अपने पास रखा था. फलस्वरूप अभी तक किसी मामले में नोबेल पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को सफलतापूर्वक सौंपा नहीं गया है.

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