क्या नोबेल विजेता किसी और को दे सकता है अपना प्राइज, क्या कहते हैं नियम?
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया ने अपना नोबेल पुरस्कार ट्रंप को दे दिया है. जानते हैं कि क्या नोबेल पुरस्कार ट्रांसफर किया जा सकता है.

Published : January 18, 2026 at 2:30 PM IST
हैदराबाद : हाल ही में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में एक निजी मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक देकर वाहवाही हासिल की. इस दौरान मचाडो ने मीडिया से कहा कि मुलाकात उन्होंने सम्मान के रूप में की, ताकि अमेरिका की भूमिका को वेनेजुएला की आजादी के संघर्ष से जोड़ा जा सके. लेकिन सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर क्या नोबेल पुरस्कार को दूसरे व्यक्ति को सौंपा जा सकता है.
नोबेल पुरस्कार स्थायी और अहस्तांतरित होते हैं
नॉर्वेजियन नोबेल समिति और नोबेल शांति पुरस्कार के नियमों के अनुसार एक बार जब नोबेल पुरस्कार आधिकारिक रूप से दे दिया जाता है तो फिर इसे रद्द नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं इसी के साथ ना ही इसे बांटा जा सकता है और ना ही किसी और को ट्रांसफर किया जा सकता है. इसका तात्पर्य यह है कि इस सम्मान, उपाधि और आधिकारिक पहचान हमेशा मूल पुरस्कार विजेता के पास ही रहती है. भले ही इसके बाद उसके द्वारा फिजिकल के रूप से किसी और को भी दे दिया जाए.
President Donald Trump has accepted the 2025 Nobel “Peace” Prize from awarded winner María Machado. The fate of the $1.15m monetary award remains outstanding. Will the monetary transfer to Machado be blocked as an unlawful “gross misappropriation,” (as argued in Julian Assange’s… pic.twitter.com/dAeECD9WhX
— WikiLeaks (@wikileaks) January 16, 2026
मचाडो ने क्या कहा
मारिया कोरिना मचाडो को यह नोबेल शांति पुरस्कार पिछले साल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के क्रूर शासन के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया गया था. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को पदक देने के पीछे का मकसद उनकी हमारी स्वतंत्रता के प्रति अनूठी प्रतिबद्धता को पहचान देना था.

ट्रंप की सोशल मीडिया पर रिएक्शन
वहीं बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि मारिया ने उनके किए गए काम के सम्मान में अपना नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें भेंट किया है. उन्होंने इसे आपसी सम्मान का प्रतीक बताया और मचाडो को धन्यवाद दिया.
BREAKING: Venezuelan opposition leader María Corina Machado says she presented Trump her Nobel Peace Prize to recognize his commitment to her country. https://t.co/BiIzGybFh2
— The Associated Press (@AP) January 15, 2026
इतने सख्त नियम क्यों हैं
नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से स्थापित किए गए थे. उनका प्रशासन सख्त नियमों का पालन करता है. ये नियम विवाद, राजनीतिक हेरफेर या फिर पुरस्कार के बाद संशोधन को रोकने के लिए बनाए गए हैं. इन नियमों में साफ तौर पर कहा गया है कि पुरस्कार देने वाली संस्था के निर्णय के खिलाफ कोई भी अपील नहीं की जा सकती. इसके अलावा एक बार पुरस्कार घोषित होने के बाद यह हमेशा मान्य रहेगा.
📑The Official Rulebook (Nobel Foundation)
— UPSCprep.com (@UPSCprepIAS) January 16, 2026
Can the prize actually be transferred? No.
• Statute Check: The Nobel Committee and Institute issued a sharp clarification: " once a nobel prize is announced, it cannot be revoked, shared, or transferred."
• the decision is final:… pic.twitter.com/h3gmxhgqOH
इतिहास में दर्ज हैं कई उदाहरण
हालांकि इतिहास में कुछ लोगों ने नोबेल पुरस्कार लेने से मना भी किया है. इनमें जीन-पॉल सार्त्र और ले ड्यूक थो, लेकिन किसी ने भी पुरस्कार किसी और को हस्तांतरित नहीं किया. इसमें जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने पुरस्कार की राशि दान की थी, लेकिन उन्होंने यह सम्मान अपने पास रखा था. फलस्वरूप अभी तक किसी मामले में नोबेल पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को सफलतापूर्वक सौंपा नहीं गया है.
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