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हस्ताक्षर जालसाजी मामला: हाई कोर्ट ने अभिषेक को जबरदस्ती कार्रवाई से सुरक्षा के लिए याचिका दायर करने की अनुमति दी

सीआईडी उस शिकायत की जांच कर रही है जिसमें सोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले टीएमसी के प्रस्ताव पर दो विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर थे.

Abhishek Banerjee and Kolkata High Court
अभिषेक बनर्जी व कोलकाता हाई कोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 3, 2026 at 3:19 PM IST

3 Min Read
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

उनके वकील शीर्षान्या बनर्जी ने जस्टिस अपूर्व सिन्हा रे का ध्यान इस ओर दिलाया और केस दायर करने की अनुमति मांगी.

याचिकाकर्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट से उस नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया है. जस्टिस अपूर्व सिन्हा रे ने केस दायर करने की अनुमति दे दी है. इस मामले की सुनवाई 5 जून को गर्मी की छुट्टी बेंच द्वारा किए जाने की उम्मीद है.

यह मामला मुख्य रूप से विधानसभा में कथित हस्ताक्षर जालसाजी कांड से जुड़ा है. इसी सिलसिले में, सीआईडी अधिकारी पिछले शनिवार 30 मई दोपहर में अभिषेक के कालीघाट रोड स्थित घर पर गए थे.

उन्हें वहीं नोटिस दिया गया, जिसे अभिषेक ने खुद हस्ताक्षर करके लिया. नोटिस में अभिषेक को पूछताछ के लिए सोमवार 1 जून को भबानी भवन में सीआईडी मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था. उन्हें उस दिन दोपहर 12 बजे वहां पेश होने का निर्देश दिया गया था.

हालांकि, सोमवार सुबह अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी को एक पत्र भेजा जिसमें बताया गया कि हाल ही में सोनारपुर में एक राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान उन पर हमला हुआ था.

इसलिए, वह बीमार पड़ गए थे और अभी अपने डॉक्टरों की सलाह पर आराम कर रहे थे. इसलिए, उन्होंने कहा कि उनके लिए उस समय जांच करने वालों के सामने पेश होना मुमकिन नहीं है. पत्र में, उन्होंने सीआईडी से 15 दिन का समय मांगा. लेकिन, सीआईडी इसका समय बढ़ाने के लिए तैयार नहीं थी. दूसरी बार, सोमवार शाम को, सीआईडी के अधिकारी डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के घर गए.

मांगे गए 15 दिनों के बजाय, उन्होंने अभिषेक को पेश होने के लिए सात दिन दिए. उन्हें एक नया नोटिस भेजा गया, जिसमें उन्हें 8 जून को जांचकर्ता के सामने खुद पेश होने का निर्देश दिया गया.

अभिषेक बनर्जी ने अब कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें सीआईडी द्वारा जारी इस नए समन नोटिस को कैंसल करने की मांग की गई है.

खास बात यह है कि हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच के लिए सीआईडी ने पहले ही एक एसआईटी (SIT) बना दी है. इस टीम को डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) रैंक का एक अधिकारी लीड कर रहा है, साथ में दो सब-इंस्पेक्टर भी हैं.

जांच करने वालों का दावा है कि विधानसभा के डॉक्यूमेंट्स पर हस्ताक्षर को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, और जांच इसी आधार पर आगे बढ़ रही है. कई लोगों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है. जांचकर्ता दस्तावेजों, गवाही और डिजिटल सबूतों की जांच कर रहे हैं. जांच कर्ता इस केस में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ को भी जरूरी मानते हैं.

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