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क्‍या है एक्‍सपोर्ट प्रमोशन म‍िशन? MSME को मिलेगा बढ़ावा, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी

एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा और इससे देश की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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पीएम मोदी ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के बारे में बताया (फाइल फोटो) (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 13, 2025 at 11:50 AM IST

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यूनियन कैबिनेट ने 25,060 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन यानी की निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) को मंजूरी दी है. पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि निर्यात के संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णयों से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी.

एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा
बुधवार को मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन और निर्यातकों के लिए लोन गारंटी स्कीम को मंजूरी दी गई. पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि, यह सुनिश्चित करना कि 'मेड इन इंडिया' विश्व बाजार में और भी अधिक गूंजे, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) को मंजूरी दे दी है.

उन्होंने कहा कि, इस मंजूरी के साथ निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा, एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, यह प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर एक ऐसा तंत्र तैयार करता है जो परिणाम आधारित और प्रभावी हो.

निर्यातकों के लिए लोन गारंटी योजना, कैबिनेट ने मंजूरी दी
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि निर्यातकों के लिए लोन गारंटी योजना, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी और सुचारू व्यावसायिक संचालन सुनिश्चित करेगी. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के हमारे सपने को साकार करने में मदद करेगी.

मोदी ने कहा कि ग्रेफाइट, सीजियम, रुबिडियम और जिरकोनियम की रॉयल्टी दरों को युक्तिसंगत बनाने के फैसले से सप्लाई चेन मजबूत होंगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे. कैबिनेट ने हरित ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण ग्रेफाइट, सीजियम, रुबिडियम और जिरकोनियम खनिजों की रॉयल्टी दरों को युक्तिसंगत बनाने को भी मंजूरी दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि, कैबिनेट के इस फैसले से स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा. यह सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा.

निर्यात संवर्धन मिशन का स्वागत, लेकिन...: जीटीआरआई
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 25,060 करोड़ रुपये के (एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन) निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) को मंजूरी देना एक कदम आगे है, लेकिन इस पहल को अभी भी कार्यान्वयन और वित्त पोषण संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

थिंक टैंक ने कहा कि, एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन, जिसका उद्देश्य "भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एक एकल ढांचा तैयार करना है, केवल एक व्यापक रूपरेखा मात्र है."

निर्यात संवर्धन मिशन दो स्तंभों के माध्यम से संचालित होगा
जीटीआरआई के मुताबिक, निर्यात संवर्धन मिशन दो स्तंभों के माध्यम से संचालित होगा. पहला, निर्यात प्रोत्साहन, 'ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, कोलेटरल गरांटी, लोन वृद्धि और ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड के माध्यम से एमएसएमई के लिए व्यापार वित्त को सस्ता बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.

वैश्विक टैरिफ वृद्धि से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें वस्त्र, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद शामिल हैं. दूसरा स्तंभ, निर्यात दिशा, गैर-वित्तीय सहायता प्रदान करेगा. जैसे निर्यात गुणवत्ता और अनुपालन, बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण, रसद सहायता और अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति में सहायता प्रदान करेगा.

ईपीएम में ब्याज समकारी योजना (आईईएस) और बाजार पहुंच पहल (एमएआई) सहित पुराने कार्यक्रम भी शामिल हैं. हालांकि, जीटीआरआई विश्लेषण कई कमजोरियों की ओर इशारा करता है जो निर्यातकों को लाभ मिलने में देरी कर सकती हैं.

इसमें कहा गया है कि मिशन को पात्रता, प्रक्रियाओं और संवितरण नियमों (Disbursement Rules) को निर्दिष्ट करने वाले सटीक दिशानिर्देशों के साथ विस्तृत योजनाओं में परिवर्तित करने की आवश्यकता है. एक नई ऑनलाइन प्रणाली बनानी होगी, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें निर्यातकों को कोई लाभ प्राप्त होने में महीनों लग सकते हैं.

वित्त पोषण एक प्रमुख चिंता का विषय
द ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के मुताबिक, वित्त पोषण एक प्रमुख चिंता का विषय बनकर उभरा है. हालांकि छह सालों में कुल परिव्यय (Total Outlay) 25,060 करोड़ रुपये है, जीटीआरआई का कहना है कि "वित्तीय संसाधन मिशन की महत्वाकांक्षाओं से मेल नहीं खाते", और यह भी कि पिछले साल अकेले आईईएस की लागत 4,200 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिससे ईपीएम के तहत अन्य सभी गतिविधियों के लिए सीमित गुंजाइश बची है."

जीटीआरआई विश्लेषण संस्थागत चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला. जिसमें कहा गया है कि डीजीएफटी, जो अब कार्यान्वयन एजेंसी है, को "इस कार्य को पूरा करने के लिए नए ज्ञान" की आवश्यकता होगी. वह इसलिए क्योंकि पहले की वित्तीय योजनाओं का प्रबंधन आरबीआई की निगरानी में बैंकों द्वारा किया जाता था. इससे "अनुमोदन में देरी हो सकती है और परिचालन में देरी हो सकती है."

जीटीआरआई ने दी चेतावनी
जीटीआरआई ने आगे योजना कार्यान्वयन में मंदी की चेतावनी दी है. वित्त वर्ष 2025-26 के आठ महीने पहले ही बीत चुके हैं," थिंक टैंक का कहना है कि एमएआई और आईईएस जैसी पुरानी योजनाओं ने इस वर्ष कोई भुगतान नहीं किया है, जिससे निर्यातकों को कठिन वैश्विक माहौल में समर्थन नहीं मिल रहा है.

हालांकि, जीटीआरआई ने आगे कहा कि मिशन एक स्वागत योग्य कदम तो है, लेकिन इसकी सफलता विस्तृत गाइडलाइन जल्द जारी करने, पर्याप्त धन सुनिश्चित करने और मजबूत समन्वय तंत्र बनाने पर निर्भर करेगी. तेजी से परिचालन के बिना, निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को वर्तमान वैश्विक परिवेश में संघर्ष करना पड़ सकता है.

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