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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर CM फडणवीस के स्टे ऑर्डर को रद्द किया

पुणे की दो रेजिडेंशियल सोसाइटियों, सनग्लोरी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और नूतन सोसाइटी ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी.

BOMBAY HIGH COURT
बॉम्बे हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 10, 2026 at 11:32 AM IST

3 Min Read
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मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम बात कही कि भले ही राज्य के मुख्यमंत्री के पास किसी प्रोजेक्ट पर रोक लगाने का अधिकार है, लेकिन नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है. इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा जारी स्टे ऑर्डर को रद्द कर दिया और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी. चल रहे म्युनिसिपल चुनावों के बीच आए इस फैसले को राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए एक झटका माना जा रहा है.

पुणे के लोकमान्य नगर इलाके की दो रेजिडेंशियल सोसाइटियों, सनग्लोरी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और नूतन सोसाइटी ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी. दोनों सोसायटियों की इमारतें जर्जर हालत में थी, जिसके बाद निवासियों ने रीडेवलपमेंट का फैसला किया. महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने सनग्लोरी सोसाइटी द्वारा प्रस्तावित रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए अनुमति दे दी थी.

उन्हें बताया गया कि नूतन सोसाइटी के रीडेवलपमेंट प्रस्ताव पर फैसला अभी लंबित है. स्थानीय राजनीतिक दखलअंदाजी की वजह से मामला दूसरी दिशा में चला गया. बीजेपी विधायक हेमंत रासने ने क्लस्टर रीडेवलपमेंट के मुद्दे पर सीएम देवेंद्र फडणवीस को एक लेटर लिखकर इस रीडेवलपमेंट के लिए दी गई अनुमति को रद्द करने की मांग की.

इस चिट्ठी पर ध्यान देते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक रीडेवलपमेंट रोक दिया जाए. सीएम फडणवीस के फाइल पर इस नोट के बाद रीडेवलपमेंट की प्रक्रिया रोक दी गई. आखिरकार, सनग्लोरी और नूतन दोनों सोसाइटियों ने इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि राज्य सरकार द्वारा मंजूर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना और सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए जारी किया गया स्टे ऑर्डर स्वीकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने सख्ती से चेतावनी दी कि हालांकि मुख्यमंत्री के पास ऐसा स्टे जारी करने की शक्ति है, लेकिन किसी को भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए. जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच द्वारा दिए गए फैसले में दोनों याचिकाओं को मंज़ूर कर लिया गया.

इसके मुताबिक सनग्लोरी सोसाइटी के रीडेवलपमेंट को दी गई मंजूरी को बरकरार रखा गया है, और उस पर लगी रोक हटा दी गई है. कोर्ट ने एमएचएडीए को नूतन सोसाइटी के रीडेवलपमेंट प्रपोजल पर जल्द से जल्द फैसला लेने का भी साफ आदेश दिया. एमएचएडीए के वकील प्रकाश लाड ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर रोक नहीं लगाई थी, बल्कि यह सिर्फ संबंधित फाइल पर एक टिप्पणी थी.

उन्होंने यह भी साफ किया कि इस टिप्पणी के आधार पर आर्किटेक्ट और प्लानर द्वारा नूतन सोसाइटी को जारी किया गया वह लेटर वापस ले लिया गया, जिसने रीडेवलपमेंट पर रोक लगाई थी. हालांकि, कोर्ट ने इस रुख पर असंतोष जताया. कोर्ट ने साफ कहा कि एमएचएडीए से उम्मीद थी कि वह सही समय पर जरूरी कार्रवाई करेगा, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा. हाईकोर्ट ने प्रशासन के रुख की भी आलोचना करते हुए कहा कि अगर स्थानीय विधायक को बड़े जनहित की चिंता है, तो इलाके के स्थानीय निवासियों की राय सुनना और उचित फैसला लेना ज़रूरी था.

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