NEET और JEE के आधार पर होने वाले एडमिशन में बोर्ड परीक्षाओं के नंबर को भी मिलेगा वेटेज
बोर्ड परीक्षा में आपको कितना नंबर मिला है, उसके आधार पर एडमिशन मिलेगा.

Published : July 2, 2026 at 4:39 PM IST
नई दिल्ली : नीट और जेईई जैसे एंट्रेंस एग्जाम के स्कोर पर आधारित अहम एडमिशन में अब बोर्ड एग्जाम का वेटेज 50 प्रतिशत हो सकता है.इस संभावना पर विचार किया जा रहा है. शिक्षा मंत्रालय की एक समिति इस पर फैसला लेगी.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि इसका उद्देश्य, किसी भी एग्जाम—चाहे वह मेडिकल और इंजीनियरिंग एडमिशन के लिए एंट्रेंस टेस्ट हो या बोर्ड एग्जाम— के बहुत अधिक अहम होने के दबाव को कम करना है. उनके अनुसार यह कदम एग्जाम सिस्टम में कई गड़बड़ियों—जैसे मूल्यांकन में गलतियां और पेपर लीक—के बाद उठाया गया है, जिन्होंने सिस्टम की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है.
एक सूत्र ने कहा, "जिन बदलावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एडमिशन/मेरिट में बोर्ड मार्क्स का 50 प्रतिशत वेटेज, कोचिंग सेंटरों पर निर्भरता कम करने के लिए एंट्रेंस टेस्ट को स्कूल के सिलेबस से बेहतर ढंग से जोड़ना, कई बार कोशिश करने का मौका देना और धीरे-धीरे अडैप्टिव ऑन-डिमांड कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट की ओर बढ़ना शामिल है."
अभी, मेडिकल और इंजीनियरिंग में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर पर आधारित होते हैं और एंट्रेंस एग्जाम के लिए योग्य होने के लिए उम्मीदवारों को बोर्ड एग्जाम में एक तय प्रतिशत अंक लाने होते हैं. इन सुधारों पर शिक्षा मंत्रालय की नौ-सदस्यीय समिति विचार कर रही है.
इस समिति का गठन पिछले साल छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता, "डमी स्कूलों" के प्रसार और अहम एंट्रेंस टेस्ट में निष्पक्षता की जांच करने के लिए किया गया था.पैनल की अंतिम रिपोर्ट आने वाले हफ्तों में सरकार को सौंपे जाने की संभावना है. समिति ने एंट्रेंस टेस्ट को स्कूल के सिलेबस से बेहतर ढंग से जोड़ने की भी सिफारिश की है.
इस बीच शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के शीर्ष अधिकारी मेडिकल प्रवेश से संबंधित ‘नीट-यूजी’ की पुनर्परीक्षा से मिले अनुभवों और एनटीए को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में संसद की एक समिति को जानकारी दी है.
हालांकि, सरकार के इस कदम से विपक्ष खुश नहीं है. कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को उसके उद्देश्य के अनुरूप काम करने में अक्षम बताते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए कलंक है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा किया कि 21 जून, 2026 को नीट की पुनर्परीक्षा कराने के लिए सशस्त्र बलों और सरकार के हर स्तर की पूरी ताकत लगानी पड़ी.
उन्होंने कहा कि यह इस बात को दर्शाता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार इस तरह की अभूतपूर्व लामबंदी के बिना परीक्षा आयोजित कराने में पूरी तरह नाकाम रही. रमेश ने आरोप लगाया कि एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं का रिकॉर्ड अब भी बेहद खराब बना हुआ है. उन्होंने दावा किया कि यूजीसी-नेट अंग्रेजी परीक्षा के प्रश्न लगभग पूरी तरह बिना किसी बदलाव के पुराने प्रश्नपत्रों से उठाए गए थे, जबकि यूजीसी-नेट समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में वर्तनी, अनुवाद और व्याकरण संबंधी त्रुटियों की भरमार थी.
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनटीए अपने उद्देश्य के अनुरूप काम करने के योग्य नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन "मंत्री प्रधान" के कार्यकाल में एनटीए में सुधार और उसे मजबूत बनाया जाना था, वह अयोग्य और असंवेदनशील साबित हुए हैं.
रमेश ने कहा कि ऐसे मंत्री का पद पर बने रहना लोकतंत्र पर एक ‘कलंक’ है और यह प्रधानमंत्री के संकीर्ण राजनीतिक जोड़-घटाव को भी दर्शाता है.
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