कालाढूंगी से चंपावत तक शुरू होगी नई हेरिटेज सफारी, जिम कॉर्बेट ट्रेल का ब्लू प्रिंट तैयार
ये हेरिटेज सफारी जिम कॉर्बेट के जीवन और उनके किए कार्यों समेत उनके निवास रहे स्थलों के बारे में पर्यटकों को जानकारी देगी

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : November 28, 2025 at 7:54 AM IST
नवीन उनियाल
देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही जिम कॉर्बेट ट्रेल की रूपरेखा अब तेजी से आकार ले रही है. शासन ने इस ट्रेल को आदर्श चंपावत कार्यक्रम से जोड़ते हुए एक नई हेरिटेज सफारी शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है. यह सफारी जिम कॉर्बेट के जीवन, उनके द्वारा बिताए गए महत्वपूर्ण स्थलों और उनके शिकार अभियानों से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करेगी.
जिम कॉर्बेट ट्रेल की मुहिम चढ़ने लगी परवान: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब तक पर्यटक मुख्य रूप से बाघ और अन्य वन्यजीवों को देखने आते रहे हैं. यह पहला अवसर होगा, जब उन्हें जिम कॉर्बेट के जीवन से जुड़ी विरासत को भी करीब से जानने का मौका मिलेगा. जिम कॉर्बेट के नाम से ही इस टाइगर रिजर्व की पहचान है और उन्होंने इस क्षेत्र में नरभक्षी बाघों के आतंक को खत्म कर लोगों को राहत पहुंचाई थी. विशेष रूप से चंपावत से उनका गहरा संबंध रहा, जहां 1907 से 1947 तक उन्होंने कई वर्षों तक निवास किया. इसी दौरान उन्होंने चंपावत मैन-ईटर सहित कई नरभक्षी बाघों का शिकार किया था.
वन विभाग ने तैयार किया ब्लू प्रिंट: चंपावत के राजबुंगा किला, बाणासुर किला, एबट माउंट, एक हथिया नौला और बालेश्वर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल जिम कॉर्बेट की विरासत के साथ विशेष पहचान रखते हैं. इन्हीं स्थलों को नई हेरिटेज ट्रेल से जोड़कर पर्यटकों तक पहुंचाने की योजना तैयार की गई है. शासन स्तर पर इसकी समीक्षा कर विस्तृत ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया है.
जिम कॉर्बेट ट्रेल के लिए बनेगी वेबसाइट: ट्रेल की समग्र जानकारी और सुविधाओं के लिए एक विशेष वेबसाइट बनाई जाएगी, जिसमें यात्रा मार्ग, आवश्यक परमिट, रात्रि विश्राम, भोजन और गाइड जैसी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी. भविष्य में इसी वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग भी संभव होगी. इसे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट से लिंक किया जाएगा.

होम स्टे के रूप में चिन्हित हुए 13 गांव: वन विभाग इस परियोजना में स्थानीय युवाओं को भी जोड़ रहा है. नेचर गाइड प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की परीक्षा लेकर उन्हें पंजीकृत गाइड बनाया जाएगा, जिससे वे पर्यटकों को जानकारी देने के साथ अपनी आजीविका भी अर्जित कर सकेंगे. इसके अलावा ट्रेल के आसपास के 13 गांवों को होमस्टे क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है, जिससे ग्रामीणों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा.

कालाढूंगी रेंज से संचालित होगी हेरिटेज सफारी: रामनगर वन प्रभाग की कालाढूंगी रेंज से इस हेरिटेज सफारी को संचालित किया जाएगा. सफारी में जिम कॉर्बेट की किताबों में वर्णित स्थलों, उनके आवास, म्यूजियम और शिकार अभियानों से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इसके साथ ही ऐसा रूट चयनित है, जहां बाघों की आवाजाही रहती है, जिससे पर्यटक वन्यजीवों का भी भरपूर दीदार कर सकेंगे.

जिम कॉर्बेट का व्यक्तित्व और कृतित्व समझेंगे पर्यटक: वन विभाग का प्रयास है कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटक केवल जंगल की सुंदरता ही नहीं, बल्कि उस महान व्यक्तित्व को भी समझ सकें, जिसने इस वन क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई.

वन विभाग को अंतिम अनुमोदन मिलने का इंतजार: इस पर सीसीएफ इको टूरिज्म कहते हैं कि-
शासन स्तर पर भी इसको लेकर एक समीक्षा बैठक हो चुकी है. इसके लिए विभाग की तरफ से ब्लूप्रिंट भी तैयार किया चुका है. ऐसे में अंतिम अनुमोदन मिलते ही इस पर आगे की कार्रवाई तेजी से बढ़ाई जाएगी.
-पीके पात्रो, मुख्य वन संरक्षक, इको टूरिज्म-
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