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बीजेपी की गले की फांस बना अंकिता मर्डर केस, अपने ही बढ़ा रहे पार्टी की मुश्किल, सरकार पर खड़े हो रहे सवाल!

अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब बीजेपी अपने नेताओं के ही सवालों से ही कटघरे में खड़ी हुई नजर आ रही है.

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अंकिता मर्डर केस (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : December 29, 2025 at 6:50 PM IST

8 Min Read
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किरणकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड सुर्खियों में है. तीन साल बाद दोबारा ये मामला बीजेपी की गले की फांस बन गया है. इस मामले में उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद प्रदेश में राजनीति खलबली मची हुई है. प्रदेश भर में अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन हो रहा है. बीजेपी के लिए सबसे बड़ी मुश्किल अपने ही वो नेता बन गए हैं, जिन्होंने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए जांच की मांग कर दी है.

पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोबारा से सुर्खियों में आने की वजह जानिए. हुआ यूं है कि खुद को बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर ने हाल ही में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा एक ऑडियो जारी किया था.

बीजेपी प्रवक्ता हनी पाठक ने रखा पार्टी का पक्ष. (ETV Bharat)

ऑडियो में उर्मिला सनावर ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक नाम का जिक्र किया. उर्मिला सनावर का कहना है कि ये वही व्यक्ति है, जिसका अक्सर अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के तौर पर जिक्र होता है. यहीं से पूरा विवाद मामला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बीजेपी की गले की फांस बनता चला गया.

Ankita Bhandari murder
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन हो रहा है. (ETV Bharat)

अपने ही सरकार के घेरने में लगे: इस मामले पर कांग्रेस ने भी बीजेपी को जमकर घेरा. उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तो इस मामले में दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस तक की. लेकिन बीजेपी की मुश्किल कांग्रेस के ज्यादा उन्हीं के नेताओं ने खड़ी कर दी. जानिए कैसे?

Ankita Bhandari murder
देहरादून में कांग्रेस ने अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर कैडल मार्च निकाला. (ETV Bharat)

बीजेपी नेताओं ने बढ़ी दी मुश्किल: उर्मिला सनावर के वीडियो में जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उन पर अब कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी नेताओं ने भी सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) की मांग तेज कर दी है, जो बीजेपी के लिए थोड़ा असहज करने वाला है. इस मामले पर बीजेपी नेताओं के एक के बाद एक आ रहे बयान पार्टी और संगठन दोनों का सिरदर्द बढ़ा रहे हैं.

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया बड़ा बयान: अंकिता भंडारी हत्याकांड पर उर्मिला सनावर ने जो वीडियो जारी किया था, जब उस पर पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत से सवाल किया गया था तो उन्होंने अपने बयान से बीजेपी हो ही टेंशन दे दी.

अब ये बड़ा गंभीर सवाल है, क्योंकि ये मुद्दा सीधे-सीधे महिलाओं से जुड़ा है. निश्चित रूप से इसमें बहुत गहराई से जाने की जरूरत है. अभी ये मामले कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए इसमें सरकारें कुछ निर्णय नहीं ले सकती है. कोई टिप्पणी भी नहीं कर सकता है, लेकिन मामला काफी गंभीर है. इस तरह के गलत काम करने की छूट किसी को भी नहीं होनी चाहिए.

कोई भी हो, मेरा बच्चा हो, भाई हो, समाज की छवि खराब होने का काम नहीं होना चाहिए. इससे समाज पर धब्बा लगाता है. मुझे व्यक्तिगत रूप से भी इस सारे विषय को लेकर तकलीफ हुई है. इस मामले में जो भी दोषी है, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए.
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, बीजेपी सांसद हरिद्वार -

बीजेपी के बड़े नेता की राय: त्रिवेंद्र सिंह रावत के अलावा बीजेपी एक और बड़े नेता व बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय का बयान आया. उन्होंने कहा कि,

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बीजेपी नेता अजेंद्र अजय ने भी इस मामले में जांच की मांग की है. (ETV Bharat)

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर जिस प्रकार का वातावरण बन गया है, वो निश्चित रूप से अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है. जान-अनजाने पक्ष-विपक्ष की ओर से कई ऐसे तथ्य और बयानबाजी सामने आ रही है. जिससे प्रदेश में छवि धूमिल हो रही है.
- अजेंद्र अजय, बीजेपी नेता -

अजेंद्र अजय का ये बयान बीजेपी को ही कटघरे में खड़े करने जैसा है. यहां तक कि अजेंद्र अजय ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भी सुझाव दिया है. उनका कहना है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को ऐसे मामलों में प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है.

मेरा यह भी सुझाव है कि इस प्रकरण में जो भी नेता दोषारोपित किए गए हैं, उनको पार्टी हित और जन विश्वास कायम रखने के लिए नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए. उन्हें स्वयं यह घोषणा करनी चाहिए कि वो अपने को निर्दोष साबित करेंगे और तत्पश्चात पार्टी में कोई पद स्वीकार करेंगे.

इसके साथ ही मेरा यह भी सुझाव है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को आवश्यक नहीं है कि वो प्रत्येक मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें. मीडिया के समक्ष पार्टी का पक्ष आदि रखने के लिए प्रवक्ता इत्यादि की व्यवस्था बनाई गई है. अंकिता भंडारी प्रकरण में जाति को लेकर जो बयान मीडिया व सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, वो पार्टी के लिए हानिकारक है. इससे भी अधिक प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने के लिए भी घातक है. राजनीति अपनी जगह है, सामाजिक सौहार्द अपनी जगह.
- अजेंद्र अजय, बीजेपी नेता -

बीजेपी की एक नेता अपने पद से दे चुकी इस्तीफा: इस मामले में पौड़ी गढ़वाल जिले से बीजेपी की जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने इस मामले में अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया है. साथ ही उन्होंने इस मामले पर बीजेपी से सीबीआई जांच की मांग तक की है.

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बीजेपी नेता आरती गौड़ ने सीएम धामी को इस मामले में इस्तीफा देते हुए पत्र लिखा था. (ETV Bharat)

बीजेपी के इन तमाम नेताओं के बयानों से साफ हो गया है कि पार्टी के अंदर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक अलग ही तरह की बेचैनी है. बीजेपी के नेताओं का डर है कि कहीं अंकिता भंडारी हत्याकांड का ताजा मुद्दा उनकी राजनीति को संकट में न डाल दे. शायद यहीं बीजेपी नेताओं को अपनी पार्टी के खिलाफ खुलकर बोलने का हौसला दे रहा है.

अचानक से भाजपा संगठन के ऊपर आई आफत आने वाले समय में बीजेपी को मुसीबत में डाल सकती है. खबर तो यह भी है कि इस पूरे घटनाक्रम पर आलाकमान अब बेहद गंभीर से सोच रहा है. अपने ही नेताओं के अलग-अलग बयानों से अनुशासन के लिए जानी बीजेपी की चिंताएं बढ़ी हुई है. त्रिवेंद्र और अजेंद्र अजय के बयान बीजेपी को नुकसान तो कांग्रेस को बल दे रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर दोनों ही दलों के नेता गंभीरता से विचार कर रहे हैं.
-आदेश त्यागी, वरिष्ठ पत्रकार-

वहीं कांग्रेस को एक बार फिर से अंकिता भंडारी के मामले पर बीजेपी सरकार के घेरने का मौका मिल गया है. यहीं कारण है कि कांग्रेस इस मुद्दों पर पूर जोर-शोर से उठा रही है.

यह मुद्दा राजनीति का नहीं है, बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाने का है. कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर खड़ी हुई थी. लेकिन आज हम देख रहे हैं, प्रदेश में अलग-अलग जगह पर खुद ही महिलाएं अंकिता को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर निकल रहे है और विरोध प्रदर्शन कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी क्यों इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति नहीं दे रहे हैं. आज प्रदेश ही नहीं देश का हर व्यक्ति सच जानना चाहता है.
-गरीमा दसौनी, कांग्रेस नेता-

अपने ही नेताओं द्वारा उठाए जा उठाए जा रहे तमाम सवालों पर बीजेपी के प्रवक्ताओं से भी जवाब देते नहीं बन रहा है. भाजपा प्रवक्ता हनी पाठक का कहना है कि उनकी पार्टी नैतिकता और अनुशासन को लेकर देश की नंबर वन पार्टी है. नैतिकता की आधार पर इस्तीफा देने की बात तो तब कही जाए जब कोई ठोस सबूत देगा.

उन्होंने बताया कि एडीजी लॉ एंड आर्डर मुरुगेशन द्वारा साफ-साफ कहा गया है कि जिस किसी के पास भी अंकिता हत्याकांड को लेकर कोई सबूत है, वह पुलिस को दे. पुलिस उसकी निष्पक्ष पारदर्शी जांच करवाएगी. कांग्रेस केवल इस मामले पर राजनीति कर रही है. उनके पास सबूत के नाम पर कुछ नहीं है.

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