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भाजपा ने सोनिया पर 'वंदे मातरम्' को लेकर आपत्ति का आरोप लगाया, कांग्रेस ने किया खंडन

बीजेपी का दावा है कि, सोनिया ने कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन पर आपत्ति जताई.

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राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान (PTI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 15, 2026 at 2:16 PM IST

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 'वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरों के गायन पर आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे.

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए गए. दरअसल, कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मारतम्' के गायन के दौरान सोनिया गांधी अपने बगल में खड़े खरगे की ओर इशारा कहते हुए कुछ कहते नजर आईं.

भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि 'वंदे मातरम्' के दौरान सोनिया गांधी ने आपत्ति जताई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पूछा कि, यह क्यों बजाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्र चेतना और देशभक्ति का ऐतिहासिक प्रतीक है. इसके प्रति ऐसा रवैया कांग्रेस की 'आपातकाल मानसिकता' को दर्शाता है."

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी सोशल मीडिया पर सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि, उन्हें 'वंदे मातरम्' से इतनी नफरत क्यों है. उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान गांधी कथित तौर पर नाराज हुईं और पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने को कहा. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भाजपा के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम्' का गायन रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. सोनिया गांधी सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी.

रमेश ने कहा कि उस बैठक में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह तय किया गया था कि कांग्रेस अधिवेशनों में 'वंदे मातरम्' के शुरुआती अंतरों का गायन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि तब से कांग्रेस के हर अधिवेशन में उन पंक्तियों को गाया जाता रहा है और कांग्रेस सेवा दल तथा पार्टी कार्यकर्ता भी इसका गायन करते हैं. उनका कहना था कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है.

रमेश ने कहा कि शनिवार को 'वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरों को गाया गया. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में 16 घंटे चर्चा हुई थी और कांग्रेस ने अपना पक्ष रखा था. रमेश के मुताबिक, उन्होंने सांसदों को ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में लिए गए फैसले का ऐतिहासिक संदर्भ भी बताया था. कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम्' के सभी अंतरों का गायन रोकने के प्रयास के आरोप के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा कोई प्रयास नहीं हुआ था.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, सोनिया जी उनके लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं." सरकार ने अगस्त, 2026 में 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026' के तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी दर्जा देते हुए आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है. इसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य है.

(इनपुट-पीटीआई)

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