बाबा रामदेव के बयान से उत्तराखंड में सियासी हलचल, कांग्रेस ने घेरा तो बीजेपी का है ये स्टैंड, जानिए किसने क्या कहा
15 अगस्त के दिन बाबा रामदेव ने बड़ा बयान दिया था, जिसकी गूंज न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि दिल्ली में भी सुनाई दी. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 19, 2026 at 5:26 PM IST
देहरादून: हरिद्वार में 15 अगस्त को योगगुरु स्वामी रामदेव के दिए बयान के बाद उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है. स्वामी रामदेव के बयान पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है. उत्तराखंड में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले में न सिर्फ बीजेपी को घेरा, बल्कि आचार्य बालकृष्ण पर टिप्पणी की. वहीं गणेश गोदियाल की टिप्पणी पर बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया आई.
दरअसल, रामदेव ने 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद देश और राज्यों में नौकरियों की कथित खरीद-फरोख्त और घपले-घोटालों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए यहा तक कह दिया था कि अगर हालात इसी तरह बने रहे तो कहीं ऐसा न हो कि उन्हें एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़े.
रामदेव का यह बयान इसलिए भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि यह बयान उत्तराखंड यानि हरिद्वार से दिया गया था. रामदेव का अतीत भी आंदोलनों से जुड़ा रहा है. यूपीए सरकार के दौर में दिल्ली के जंतर-मंतर पर रामदेव के आंदोलन ने देश की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाला था. अब उनके लगातार सामने आ रहे बयानों को लेकर सियासी हलकों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर बाबा रामदेव के निशाने पर कौन है और उनके इन बयानों का राजनीतिक संदेश क्या है?
रामदेव ने इशारों-इशारें में सरकार को चेताया: रामदेव में 15 अगस्त को हरिद्वार में दिए अपने बयान में भ्रष्टाचार और नौकरियों में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को सीधे तौर पर उठाया था. उन्होंने कहा कि चाहे राज्य हो या देश नौकरियां बेचे जाने और घपले-घोटाले जैसी स्थिति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती. रामदेव ने युवाओं के भविष्य का सवाल उठाते हुए सरकारों को चेताने के अंदाज में अपनी बात रखी. उनका कहना था कि देश में जो परिस्थितियां बन रही हैं, उन्हें देखकर कहीं ऐसा न हो कि उन्हें फिर से आंदोलन करना पड़े.
योगगुरु बाबा रामदेव का बड़ा बयान: बोले- देश में बहुत घपला हो रहा है, बेची जा रही नौकरियां, दोबारा आंदोलन की कही बात #babaramdev #GenZProtest #babaramdevstatement #UttarakhandNews
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सीधे तौर पर सरकारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए: रामदेव का यह अंदाज राजनीतिक तौर पर इसलिए भी अहम माना जा रहा है. क्योंकि उन्होंने सिर्फ व्यवस्था पर सामान्य टिप्पणी नहीं की बल्कि युवाओं, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे उन मुद्दों को सामने रखा है, जो सीधे तौर पर सरकारों की जवाबदेही से जुड़े हुए हैं.
कंगना रनौत पर भी रामदेव ने टिप्पणी की: इसके बाद हाल ही में एक अन्य इंटरव्यू में बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर भी रामदेव की तीखी टिप्पणी सामने आई. जिससे उनके बयानों की चर्चा और ज्यादा तेज हो गई. कंगना रनौत ने जेन जी आंदोलन पर बयान दिया था, जिस पर रामदेव ने रिएक्ट किया था.
बीजेपी ने भी दिया जवाब: रामदेव के इन बयानों के बाद अब बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई. उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने रामदेव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया है.
सुबोध उनियाल ने कहा कि पेपर लीक हो या घोटाला-घपला किसी भी राज्य या केंद्र में ऐसी चीजें ठीक नहीं हैं. ऐसी मामले युवाओं को नुकसान पहुंचाती हैं और उनकी जिंदगी बर्बाद करती हैं. इसलिए इन सब पर रोक लगनी चाहिए यानी सुबोध उनियाल ने रामदेव की ओर से उठाए गए मूल सवाल को पूरी तरह खारिज करने के बजाय पेपर लीक और घोटालों के खिलाफ अपनी सहमति जाहिर की, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साध दिया.
सुबोध उनियाल ने कांग्रेस को घेरा, झारखंड का सवाल उठाकर किया पलटवार: कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने रामदेव के बयान को कोट करते हुए कांग्रेस पर पलटवार करते हुए झारखंड का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ खड़े होने और केंद्र सरकार के खिलाफ जंतर-मंतर पर आवाज उठाने वाले कुछ लोग अब झारखंड में खामोश हैं, जबकि वहां उनकी सत्ता है.
सुबोध उनियाल का इशारा कांग्रेस की ओर था: उन्होंने कहा कि अगर पेपर लीक घोटाला और युवाओं के भविष्य का सवाल इतना गंभीर है तो कांग्रेस को उन राज्यों में भी अपनी आवाज उठानी चाहिए, जहां उसकी सरकार है. इस तरह बीजेपी ने रामदेव के बयान को सीधे अपने खिलाफ जाने देने के बजाय उसे कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश की है. कुल मिलाकर कहा जाए तो बीजेपी ने रामदेव से बयानों पर सीधे जवाब न देकर उस मुद्दे को कांग्रेस की तरफ मोड़ने का प्रयास किया.
रामदेव के बयान पर कांग्रेस का रिएक्शन: उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी रामदेव के दोनों बयानों पर कहा कि उन्होंने रामदेव का 15 अगस्त वाला बयान भी सुना है और वह बयान भी सुना है, जिसमें रामदेव ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत पर कटाक्ष किया है.
गणेश गोदियाल ने रामदेव के अचानक इस तरह मुखर होने को लेकर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि बाबा रामदेव ऐसा क्यों बोल रहे हैं, यह तो वही बेहतर बता सकते हैं. गोदियाल का यह बयान अपने आप में दिलचस्प है. क्योंकि कांग्रेस ने रामदेव के आरोपों को सीधे तौर पर अपना राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय रामदेव के बयानों के पीछे की वजह पर सवाल उठाया है. हालांकि गोदियाल ने इसी बहाने राज्य की राजनीति से जुड़े एक दूसरे मुद्दे को भी सामने ला दिया.
गोदियाल का बालकृष्ण पर निशाना: गणेश गोदियाल ने मुस्कुराते हुए रामदेव के सहयोगी और पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि रामदेव के सहयोगी पौड़ी और कोटद्वार में जमीनों के मामलों को लेकर राज्य के साथ धोखा कर रहे हैं. यानी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने रामदेव के बयान का खुलकर समर्थन करने के बजाय उसी मंच से रामदेव के करीबी सहयोगी पर सवाल खड़े कर दिए.
गोदियाल की रणनीति को इस रूप में देखा जा रहा है कि अगर रामदेव सरकार और व्यवस्था में घपले घोटाले की बात कर रहे हैं तो कांग्रेस भी उनसे जुड़े लोगों और संस्थानों को लेकर उठा रहे है.
रामदेव के बयान से बीजेपी असहज या कांग्रेस को मिला मुद्दा: अब पूरी तस्वीर को अगर एक साथ जोड़कर देखें तो उत्तराखंड में रामदेव के बयान ने एक ऐसा राजनीतिक मैदान तैयार कर दिया है, जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने-अपने हिसाब से नैरेटिव गढ़ रहे है.
बीजेपी की ओर से मंत्री सुबोध उनियाल ने पेपर लीक और घोटालों को गलत बताया, लेकिन साथ ही कांग्रेस शासित झारखंड का सवाल उठाकर विपक्ष को घेर दिया. वहीं कांग्रेस की ओर से गणेश गोदियाल ने रामदेव के बयान पर सीधी राजनीतिक मुहर नहीं लगाई बल्कि रामदेव से जुड़े आचार्य बालकृष्ण और जमीन के कथित मामलों को बहस में खींच लिया. ऐसे में रामदेव का बयान अब केवल रोजगार, पेपर लीक और भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड की सियासत में सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया जरिया बनता दिखाई दे रहा है.
क्या फिर किसी बड़े आंदोलन की भूमिका तैयार कर रहे हैं रामदेव: सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि आखिर रामदेव के इन बयानों को किस रूप में देखा जाए. क्या यह महज व्यवस्था को लेकर उनकी चिंता है या फिर वह किसी बड़े आंदोलन की भूमिका तैयार कर रहे हैं.
रामदेव ने खुद अपने पुराने आंदोलन का नाम लिए बिना यह संकेत जरूर दिया कि परिस्थितियां अगर नहीं सुधरीं तो आंदोलन की जरूरत पड़ सकती है. यही बात राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. क्योंकि रामदेव का नाम पहले भी ऐसे दौर में सामने आया है. जब केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन ने देश की राजनीति का रुख प्रभावित किया था. हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को उस दौर से सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि हरिद्वार से उठी रामदेव की आवाज अब देहरादून और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुकी है.
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