ETV Bharat / bharat

हिमाचल में बदलेगी खेती की तस्वीर, 'सुपर गेहूं' देगा ज्यादा पैदावार और बेहतर पोषण

"हर दाने में सेहत, हर खेत में समृद्धि" के साथ हिमाचल में गेहूं की नई उन्नत किस्मों को तैयार किया जा रहा है.

Himachal Super Wheat Production
'सुपर गेहूं' की खेती (ETV Bharat GFX)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 20, 2026 at 2:18 PM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

सिरमौर: हिमाचल प्रदेश की धरती पर इस बार गेहूं की फसल सिर्फ सुनहरी बालियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा की नींव बनकर उभर रही है. बदलते मौसम, अनियमित बारिश, तापमान में उतार-चढ़ाव और मिट्टी की घटती सेहत ने खेती के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे समय में जिला सिरमौर के धौलाकुआं में स्थित प्रदेश के पहले कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने अनुसंधान फार्म में प्राकृतिक तरीके से गेहूं की नई बायोफोर्टिफाइड और जलवायु प्रतिरोधक किस्मों का बीज उत्पादन शुरू कर एक दूरदर्शी पहल की है.

दरअसल यह प्रयास सीधे तौर पर दो बड़ी चुनौतियों, "जलवायु परिवर्तन और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा" को ध्यान में रखकर किया गया है. ये किस्में आईसीएआर-भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान करनाल) द्वारा विकसित की गई हैं. अब इन्हें यहां उगाकर उन्हें प्रदेश के किसानों में वितरित किया जाएगा, ताकि उन्हें उन्नत और अच्छी किस्मों के बीज मिल सके. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का नारा "हर कदम हर डगर, किसानों का हमसफर" अब सिरमौर की धरती पर साकार होता दिख रहा है.

जलवायु की चुनौती के बीच तैयार हो रहा पोषणयुक्त ‘सुपर गेहूं’ (ETV Bharat)

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया, "जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें ऐसी फसल किस्मों की आवश्यकता है, जो अच्छे उत्पादन के साथ-साथ पोषण भी दें. बायोफोर्टिफाइड और क्लाइमेट रेजिलिएंट गेहूं की ये किस्में किसानों के लिए वरदान साबित होंगी. हमारा लक्ष्य है कि जिले के मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख गेहूं उत्पादक किसान ज्यादा से ज्यादा इन उन्नत बीजों को अपनाएं और सुरक्षित व टिकाऊ खेती की ओर बढ़ें. भविष्य की कृषि सिर्फ ज्यादा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘स्मार्ट और पोषणयुक्त खेती’ ही आगे का रास्ता तय करेगी."

कौन-कौन सी हैं ये उन्नत किस्में?

प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मित्तल ने बताया कि इस वर्ष जिन चार प्रमुख गेहूं किस्मों का बीज उत्पादन किया जा रहा है, जो इस प्रकार हैं-

  1. डीबीडब्ल्यू-187
  2. डीबीडब्ल्यू-370
  3. डीबीडब्ल्यू-371
  4. डीबीडब्ल्यू-327

इन सभी किस्मों को इस तरह विकसित किया गया है कि ये बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी संतुलित और बेहतर उत्पादन दे सकें.

Himachal Super Wheat Production
'सुपर गेहूं' की खासियत (ETV Bharat GFX)

इन किस्मों की क्या है खासियत?

डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि ये किस्में सिर्फ ज्यादा पैदावार देने वाली नहीं हैं, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी समृद्ध हैं. इनमें आयरन, जिंक और प्रोटीन की मात्रा सामान्य गेहूं की तुलना में अधिक पाई जाती है. यानी जब इनका आटा घर की रसोई तक पहुंचेगा, तो हर रोटी शरीर को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भी देगी.

  • किसान को अधिक उत्पादन
  • उपभोक्ता को बेहतर पोषण
  • समाज को स्वस्थ भविष्य

क्यों जरूरी हैं जलवायु प्रतिरोधक किस्में?

आज खेती के सामने सबसे बड़ा संकट मौसम की अनिश्चितता है. जब प्रकृति का मिजाज बदलता है, तो पारंपरिक किस्में अक्सर जवाब दे जाती हैं और किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. ऐसी विपरीत परिस्थितियों में 'क्लाइमेट रेजिलिएंट' (जलवायु अनुकूल) किस्में एक वरदान साबित हो रही हैं.

Himachal Super Wheat Production
क्यों जरूरी हैं जलवायु प्रतिरोधक किस्में? (ETV Bharat GFX)
  • तापमान सहने की क्षमता: ये किस्में अचानक बढ़ने वाली गर्मी या ठंड के उतार-चढ़ाव को आसानी से सह लेती हैं.
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति: इनमें बीमारियों और कीटों से लड़ने की क्षमता पारंपरिक बीजों के मुकाबले कहीं अधिक होती है.
  • सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम: कम पानी या कम खाद जैसे सीमित संसाधनों में भी ये संतुलित और अच्छी पैदावार देने में सक्षम हैं.
  • किसानों को सीधा फायदा: अक्सर देखा जाता है कि प्रदेश में कभी समय से पहले भारी बारिश हो जाती है, तो कभी लंबे सूखे के कारण मानसून में देरी होती है. कभी-कभी फसल पकने के समय अचानक 'हीट वेव' (असामान्य गर्मी) चल जाती है. लेकिन, इन उन्नत किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इन मौसमी झटकों का गेहूं की पैदावार पर बुरा असर नहीं पड़ता. चाहे सूखा हो या बेमौसम बारिश, ये किस्में फसल को सुरक्षित रखती हैं. इससे किसान का जोखिम कम होता है, फसल की बर्बादी रुकती है और उनकी आय में स्थिरता आती है.

पोषण सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

आज के दौर में आयरन और जिंक की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, विशेषकर महिलाओं और बच्चों में. एनीमिया जैसी समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक हैं. प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल के मुताबिक बायोफोर्टिफाइड गेहूं की ये किस्में इस कमी को प्राकृतिक रूप से दूर करने में मददगार हो सकती हैं. यानी खेत से थाली तक पोषण की श्रृंखला मजबूत होगी.

Himachal Super Wheat Production
“सुपर गेहूं” क्यों है जरूरी (ETV Bharat GFX)

किसानों तक कैसे पहुंचेगा बीज?

डॉ. मित्तल ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार किया जा रहा यह बीज इसी साल कृषि विभाग के जरिए जिला सिरमौर के मैदानी इलाकों के किसानों को उपलब्ध करवाने की योजना है. उद्देश्य स्पष्ट है कि ज्यादा से ज्यादा किसान इन उन्नत किस्मों को अपनाएं और जलवायु जोखिम से सुरक्षित खेती की दिशा में कदम बढ़ाएं. उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की सोच भी यही है कि “उत्पादन बढ़े, पोषण बढ़े और किसान सशक्त बने.”

“सुपर गेहूं” क्यों है भविष्य की खेती की जरूरत?

  • बदलती जलवायु में भी स्थिर और बेहतर उत्पादन
  • आयरन, जिंक व प्रोटीन से भरपूर- पोषण की कमी से लड़ने में सहायक
  • रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध क्षमता
  • किसानों की आय में स्थिरता और जोखिम में कमी
  • खेत से थाली तक मजबूत पोषण सुरक्षा

अब साफ है कि यह पहल केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की खेती का मजबूत आधार है- जहां उत्पादन के साथ पोषण और स्थिरता भी प्राथमिकता है.

ये भी पढ़ें: हिमाचल में रंगीन क्रांति, कृषि विज्ञान केंद्र उगा रहा सेहत से भरपूर सब्जियां

ये भी पढ़ें: इस जिले में बनेगा हिमाचल का पहला ट्राउट फिश हब, युवाओं को मिलेगा रोजगार

ये भी पढ़ें: हिमाचल में शहद उत्पादन से बंपर कमाई, सालाना 800 मीट्रिक टन हो रहा उत्पादन

ये भी पढ़ें: मिट्टी से उम्मीद तक: प्राकृतिक खेती ने बदली इस महिला किसान की तकदीर, कम लागत में बढ़ी आमदनी

ये भी पढ़ें: 8 किलो का एक जिमीकंद! इस नई वैरायटी ने बदली किसानों की तकदीर, कम खर्च में ज्यादा मुनाफा

ये भी पढ़ें: हिमाचल कैसे बनेगा नेचुरल बीज तैयार करने वाला देश का पहला राज्य?

ये भी पढ़ें: न खेत की चिंता, न सिंचाई की फिक्र, अब यहां पराली के नीचे आलू उगाएंगे किसान, इतने किसानों को मिला बीज

ये भी पढ़ें: प्राकृतिक खेती में देश को राह दिखा रहा हिमाचल, नेचुरल फार्मिंग पर भारी सब्सिडी, इन चुनौतियों से निपटने की भी जरूरत