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बिहार के इन गांवों के नाम हैं बेहद आपत्तिजनक.. किसी के सामने बोलने से भी हिचकते हैं लोग

बिहार में ऐसे कई गांव हैं, जिनके नाम से ग्रामीणों को शर्मिंदगी होती है. बदनामी का कारण बनने वाले गांवों के नाम क्या हैं जानें.

BIHAR Weird village name
अजीब हैं बिहार के कई गांवों के नाम (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 6, 2026 at 5:11 PM IST

6 Min Read
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रिपोर्ट: रवि कुमार

रोहतास: बिहार में 45 हजार से ज्यादा गांव हैं पर एक दो नहीं दर्जन भर से ज्यादा गांवों के नाम ऐसे हैं, जिन्हें सुनकर आप मारे शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे या यूं कहे कि आप सुनना भी पसंद नहीं करेंगे. रोहतास के ऐसे ही कुछ गांवों में ईटीवी भारत की टीम पहुंची और वहां के ग्रामीणों से बातचीत की.

पूर्व में नचनिया अब काशीपुरी गांव निवासी श्री राम तिवारी बताते हैं कि गांव का नाम ऐसा होना चाहिए जो आप शान से कहीं भी किसी को बता सके. गांव का नाम लेने में संकोच ना हो. पहले हम सभी को कहीं भी अपने गांव का नाम बताने में झिझक महसूस होता था, हमारे गांव का नाम नचनिया था. लेकिन अब गांव का नाम बदलकर काशीपुरी हो गया तो अच्छा लगता है.

गांव का नाम बदलने की मांग (ETV Bharat)

"हमारे गांव का नाम पहले नचनिया था लेकिन 2014-15 में इसे बदलकर अब काशीपुरी किया गया है. हमें लगता है कि अगर लोग अपने गांव का नाम लेने से संकोच करते हैं तो उसे विचार-विमर्श करके बदल देना चाहिए. नाम बदलने के बाद लोग शान से अपने गांव का नाम ले सकेंगे."- श्री राम तिवारी, पूर्व में नचनिया अब काशीपुरी गांव निवासी

राजपुर प्रखंड के सुअरा गांव के निवासी प्रमोद तिवारी भी अपने गांव के नाम को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं. वह बताते है कि नाम अपना हो या गांव या शहर का यह पहचान होती है. नाम का अपना अलग महत्व होता है. वह बताते है कि जिस गांव का नाम सुअरा है, वह जानवर के नाम पर है. ऐसा जानवर जिसका नाम सुनते ही लोग नाक-भौंह सिकोड़ने लगते हैं.

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सुअरा गांव के निवासी प्रमोद तिवारी (ETV Bharat)

"गांव वाले तक अपने गांव का नाम लेना पसंद नहीं करते हैं. बरना गांव का नाम तो लोग सुबह-सुबह लेना भी नहीं चाहते हैं. वहीं सुल्तानपुर गांव में आबादी हिन्दुओं की है, वहां मुसलमान न के बराबर हैं. वही स्थिति हुसैनाबाद का भी है. वहां भी मुस्लिम परिवार के लोग नहीं है फिर भी नाम है हुसैनाबाद है. नचनिया का नाम बदलकर काशीपुरी हुआ, सुनने में अच्छा लगता है."- प्रमोद तिवारी, स्थानीय

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पूर्व में नचनिया अब काशीपुर गांव निवासी श्री राम तिवारी (ETV Bharat)

गांवों के आपत्तिजनक नाम: रोहतास जिले के राजपुर प्रखंड जिला मुख्यालय से तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी पर है. इस प्रखंड में ऐसे कई गांव हैं, जिनके नाम से यहां के ग्रामीणों के मन में एक टिस उठती है और वह इसे बदलने की मांग कर रहे हैं. सुअरा, नचनिया , पकड़ी टोला ,बरना , हुसैनाबाद, सुल्तानपुर सहित आधे दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव है जिनका कोई नाम लेना नहीं चाहता है.

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रोहतास का सुअरा गांव (ETV Bharat)

इन गांवों के नाम से होती है शर्मिंदगी: वहीं रोहतास कैमूर पहाड़ी पर जब ईटीवी भारत की टीम पहुंची तो यहां भी ऐसे कई गांव के नाम सुनने को मिले जिसे बोलना बहुत मुश्किल लगा. ये नाम ऐसे हैं कि जिसे सुनकर आप अपना सिर जरूर पकड़ लेंगे. बंडा, नकटी, सुअरमनवा, बजरमनवा, कपर फुट्टी और लौड़ी नाम लेने से लोगों को शर्मिंदगी होती है. वहीं डेहरी प्रखंड में भेड़िया और रंगबाज सुअरा जैसे भी गांव के नाम हैं.

स्थानीय पत्रकार सुरेंद्र तिवारी कहते हैं कि इन गांव का नाम कैसे पड़ा, इसका कोई प्रामाणिक जानकारी देना मुश्किल है. किसी भी गांव का नाम किसी घटना, वहां बोलचाल की भाषा, भौगौलिक स्थिति ऐतिहासिक संदर्भ क्या रहा है, इन सभी कारकों पर निर्भर करता है. लेकिन अब समय बदला है. लोग चाहते हैं कि इनको बदल जाए. तुर्की टोला का नाम बदलकर देवीपुर किया गया है.

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स्थानीय पत्रकार सुरेन्द्र तिवारी (ETV Bharat)

"ऐसे अटपटे व बोलचाल की शैली में बेतुके नाम वाले गांव का नाम बदलना चाहिए. इसके लिए समाज और सरकार को एक ठोस पहल करनी चाहिए, ताकि उन्हें शर्मिन्दा न होना पड़े. वर्तमान दौर में यह जरूरी है ताकि गांव का आर्थिक और सामाजिक रूप से भी विकास हो सके."- सुरेन्द्र तिवारी, स्थानीय पत्रकार

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भेरिया गांव (ETV Bharat)

गांव का नाम बदलने का नियम: सुरेंद्र कहते हैं कि गांव का नाम बदलने का नियम है. उसे ग्राम सभा से पारित करने होता है. फिर पंचायत समिति से पारित कराकर जिला परिषद को भेजना होता है. तब राज्य सरकार गांव का नाम बदल सकती है. लेकिन बहुत सारे राजस्व गांव हैं, इसलिए कार्ड में पुराना ही नाम गांव का रहेगा.

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अजीब हैं रोहतास के गांवों के नाम (ETV Bharat)

तुर्की टोला का नाम बदलकर देवीपुर: इलाके के वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र मिश्र बताते हैं कि इलाके में कई ऐसे गांव हैं, जिनका नाम बोलने में वाकई में लोगों को शर्म महसूस होती है. यह नाम पूर्व से ही चले आ रहे हैं, लेकिन रोहतास प्रखंड में तुर्की टोला का नाम बदलकर देवीपुर कर दिया गया हैं. वह बताते है कि इस तरह के नाम वाले गांव के नाम को इस दौर में बदलने की जरूरत है.

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सुल्तानपुर के ग्रामीण ददन कुमार कुशवाहा (ETV Bharat)

"आज के संदर्भ में लोग अटपटे और गंदे नामों को बदला चाहते हैं. इसके लिए ठोस पहल समाज और सरकार को करने की जरूरत है. गांवों का नाम बदलना चाहिए ताकि लोगों का शर्मिंदा न होना पड़े और अपने गांव का नाम गर्व से ले सके."- उपेंद्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

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वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र मिश्र (ETV Bharat)

सुल्तानपुर के ग्रामीण ददन कुमार कुशवाहा कहते हैं कि "पूर्वजों ने गांव का नाम रखा था. बाहरी लोग आकर जब नाम पूछते हैं तो बताने में अजीब लगता है. हमें कहते हैं कि आपके गांव का नाम चुनकर रखा गया है. नचनिया का नाम बदला गया है. हम भी सोच रहे हैं कि हमारे गांव का नाम भी कुछ अच्छा रख दिया जाए. हमें अपने गांव के नाम पर शर्म आती है. मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल रखा गया है."

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रंगबाज सुअरा गांव (ETV Bharat)

"अटपटे व अजीब तरह के गांव के नाम के कारण लड़कियों की शादी में परेशानी होती है. रिश्ता ले कर कहीं जाने पर गांव का नाम बताने में संकोच महसूस होता है. वहीं कोई बेटी की शादी गांव के नाम के कारण करना नहीं चाहता. यही कारण है कि लड़के लड़कियों की शादी में भी समस्या हो रही है."- ग्रामीण,सुअरा

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