क्या है OTP बाईपास बग? बिहार के एथिकल हैकर गौरव ने कृषि विभाग के पोर्टल में ढूंढी बड़ी गलती
बिहार के पूर्वी चंपारण के छात्र गौरव कुमार पांडेय ने कृषि विभाग की पोर्टल में कई खामियां खोजी हैं. पटना से कृष्णनंदन की रिपोर्ट.

Published : June 24, 2026 at 6:30 PM IST
पटना: पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी के एक छोटे से गांव बलवा के रहने वाले 18 वर्षीय गौरव कुमार पांडेय आज साइबर सुरक्षा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. कम उम्र में सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा खामियों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को सतर्क करने वाले गौरव को भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) के 'हॉल ऑफ फेम' में स्थान मिल चुका है.
17 साल की उम्र में किया कमाल: खास बात यह है कि जब उन्होंने बिहार सरकार के कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामी का पता लगाया था, तब उनकी उम्र महज 17 वर्ष थी. गौरव खुद को एथिकल हैकर बताते हैं. उनका कहना है कि किसी भी वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म में खामी खोजने का उद्देश्य कभी भी सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं होता है.
"खामी ढूंढने का उद्देश्य संबंधित संस्था को समय रहते आगाह करना होता है, ताकि लोगों का डेटा सुरक्षित रह सके. हाल ही में मैंने कृषि विभाग के पोर्टल में एक और तकनीकी कमजोरी की पहचान की है, जिसकी जानकारी जिम्मेदार तरीके से संबंधित विभाग और केंद्रीय एजेंसियों को भेजी है."- गौरव कुमार पांडेय, छात्र
बचपन से कंप्यूटर के प्रति लगाव: गौरव बताते हैं कि उनकी कंप्यूटर में रुचि किसी कोचिंग या बड़े संस्थान से नहीं बल्कि जिज्ञासा से शुरू हुई. पांचवीं कक्षा में पहली बार उन्होंने लैपटॉप का इस्तेमाल किया. शुरुआत में वे इंटरनेट, सॉफ्टवेयर और वेबसाइटों को समझने की कोशिश करते थे. धीरे-धीरे उन्हें यह जानने की उत्सुकता हुई कि आखिर वेबसाइटें बनती कैसे हैं और काम कैसे करती हैं.
"स्कूल के दिनों में ही घंटों कंप्यूटर पर बैठकर नई चीजें सीखते थे. यूट्यूब, ऑनलाइन कोर्स और ओपन सोर्स सामग्री की मदद से मैंने कोडिंग, वेबसाइट डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी की बुनियादी जानकारी हासिल की. दसवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते वेबसाइटों डिजाइनिंग और सुरक्षा तंत्र को समझने लगे थे."-गौरव कुमार पांडेय, छात्र

एथिकल हैकर के रूप में पहचान: गौरव ने बताया कि किसी भी वेबसाइट का यूआरएल, उसकी डिजाइनिंग और उसके एक्टिविटी को देखकर काफी कुछ समझा जा सकता है. यही जिज्ञासा बाद में उन्हें एथिकल हैकिंग की ओर ले गई. उन्होंने आईटी और कंप्यूटर से जुड़े कई ऑनलाइन कोर्स किए और दर्जनों प्रमाणपत्र भी हासिल किए.
BSC प्रथम वर्ष के छात्र हैं गौरव: गौरव ने अपनी स्कूली शिक्षा बिहार बोर्ड से पूरी की है. वे कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण जेईई मेन परीक्षा नहीं दे सके. फिलहाल वह बीएससी (केमेस्ट्री) प्रथम वर्ष के छात्र हैं.
साइबर सुरक्षा पर करता रहता हूं रिसर्च- गौरव: हालांकि उनका कहना है कि विषय चाहे कोई भी हो, कंप्यूटर और साइबर सुरक्षा उनके लिए जुनून है. उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ वह रोजाना समय निकालकर साइबर सुरक्षा से जुड़े नए विषयों पर रिसर्च करते हैं. इंटरनेट पर उपलब्ध तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा रिपोर्ट और नए साइबर खतरों के बारे में लगातार अध्ययन करते रहते हैं. उनका मानना है कि इस क्षेत्र में सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती है.

कैसे सामने आई सरकारी पोर्टल की सुरक्षा खामी?: गौरव बताते हैं कि शोध और अध्ययन के दौरान उन्होंने बिहार सरकार के कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल का तकनीकी विश्लेषण किया. इसी दौरान उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में कुछ ऐसी कमियां दिखाई दीं, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता था.
लाखों किसानों का डाटा किया सुरक्षित: उनके अनुसार, उस समय पोर्टल पर किसानों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद थीं. उन्होंने दावा किया कि तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंचने की संभावना बन सकती थी. हालांकि उन्होंने किसी भी डेटा का दुरुपयोग नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने पूरी जानकारी संबंधित विभाग और केंद्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भेजी.
एथिकल हैकिंग के मूल सिद्धांत को करते हैं फॉलो: गौरव का कहना है कि एथिकल हैकिंग का मूल सिद्धांत यही है कि खामी मिलने पर उसे सार्वजनिक करने के बजाय जिम्मेदार एजेंसियों को सूचित किया जाए, ताकि समय रहते उसे ठीक किया जा सके. इसी प्रक्रिया को 'रिस्पॉन्सिबल डिस्क्लोजर' कहा जाता है.

किसानों के डाटा पर था संकट: उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के पोर्टल पर प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि के डीबीटी पोर्टल में बड़ी खामी थी. किसानों ने जो कुछ भी अपनी डाटा दी है वह सार्वजनिक हो रही थी. आधार नंबर से लेकर बैंक अकाउंट और आईएफएससी कोड तक आसानी से दिख रहे थे.
CERT-In ने किया सम्मानित: गौरव की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की समीक्षा के बाद संबंधित सुरक्षा खामी को गंभीरता से लिया गया. बाद में उन्हें केंद्रीय एजेंसी की ओर से प्रशंसा पत्र और 'हॉल ऑफ फेम' में स्थान दिए जाने की सूचना मिली. गौरव बताते हैं कि यह सम्मान उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है. इससे उन्हें यह विश्वास मिला कि कम संसाधनों और छोटे गांव से आने के बावजूद यदि लगन और मेहनत हो तो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है.
CERT-In के साथ बनाए रखा संवाद: उनका मानना है कि भारत में साइबर सुरक्षा का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और युवाओं के लिए इसमें अपार संभावनाएं हैं. जरूरत केवल सही दिशा में सीखने और अपने ज्ञान का सकारात्मक उपयोग करने की है.

उन्होंने बताया कि इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने उनके साथ संवाद बनाए रखा और समस्या ठीक होने के बाद उन्हें कहा कि फिर से बग ढूंढ़ कर बताइए. उन्होंने फिर बग ढ़ूंढ़ा और यह प्रक्रिया चलती रही और धीरे-धीरे पोर्टल मजबूत बन गया और डीबीटी वाले क्षेत्र की समस्या समाप्त हो गई.
नई कमी 'टाइम बाईपास वल्नरेबिलिटी' भी मिली: गौरव के अनुसार, पहले रिपोर्ट की गई सुरक्षा खामी को ठीक कर दिया गया था, लेकिन हाल में उन्होंने पोर्टल का पुनः अध्ययन किया तो एक दूसरी तकनीकी कमजोरी सामने आई. उन्होंने बताया कि यह एक प्रकार की 'टाइम बाईपास' वल्नरेबिलिटी है.
डीबीटी पोर्टल पर एक निश्चित समय की पाबंदी: गौरव कहते हैं, सरकार ने डीबीटी पोर्टल पर एक निश्चित समय की पाबंदी लगा रखी है. रजिस्ट्रेशन पेज केवल सुबह से शाम तक ही खुलेगा, लेकिन इस तकनीकी बग के कारण कोई भी साइबर अपराधी उस समय की पाबंदी को बाईपास करके 24 घंटे इस पोर्टल को कभी भी एक्सेस कर सकता है. सुरक्षा कारणों से इसके पूरे तकनीकी विवरण को गुप्त रखा गया है और इसकी शिकायत भी केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गई है.
लगातार बदल रहे साइबर अपराधियों के तरीके: गौरव का कहना है कि आज साइबर अपराधी पहले से कहीं अधिक तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं. वे लोगों का भरोसा जीतने के लिए बेहद पेशेवर तरीके अपनाते हैं. कई बार वे बैंक, सरकारी विभाग, ई-कॉमर्स कंपनी या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नाम पर लोगों से संपर्क करते हैं.

उन्होंने बताया कि साइबर ठगों के पास यदि किसी व्यक्ति की कुछ बुनियादी जानकारी पहुंच जाए तो वे उसे विश्वास में लेकर बड़ी ठगी को अंजाम दे सकते हैं. यही वजह है कि डेटा सुरक्षा आज सबसे महत्वपूर्ण विषय बन चुका है.
फिशिंग लिंक से ठगी करते हैं हैकर: गौरव ने कहा कि आजकल फिशिंग अटैक सबसे ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. इसमें अपराधी किसी असली वेबसाइट की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं. देखने में वेबसाइट बिल्कुल असली लगती है, लेकिन जैसे ही व्यक्ति अपना यूजरनेम, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी दर्ज करता है, वह सीधे ठगों के पास पहुंच जाती है. संबंधित व्यक्ति के मोबाइल और सिस्टम का सारा डाटा हैकर के पास पहुंच जाता है और वह जब चाहे उसे डाटा का इस्तेमाल कर आर्थिक और मानसिक रूप से शोषित कर सकता है.
मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने वालों के लिए चेतावनी: गौरव बताते हैं कि लोग अक्सर बिना सोचे-समझे किसी भी लिंक पर क्लिक कर देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती है. कई वेबसाइट और एप्लिकेशन कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन और स्टोरेज की अनुमति मांगते हैं.
यदि कोई अनजान या संदिग्ध प्लेटफॉर्म ऐसी अनुमति प्राप्त कर ले तो गोपनीयता को खतरा हो सकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी वेबसाइट को कैमरा या माइक्रोफोन की अनुमति देने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसकी वास्तव में जरूरत है या नहीं. यदि किसी ऐप का उपयोग बंद हो चुका है तो उसकी अनावश्यक अनुमतियां भी हटा देनी चाहिए.
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय: गौरव ने लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक पासवर्ड, यूपीआई पिन या सीवीवी नंबर किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए. बैंक या सरकारी एजेंसियां फोन पर ऐसी जानकारी कभी नहीं मांगती हैं.
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मोबाइल और लैपटॉप में हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें. जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर सक्रिय रखें. इससे अकाउंट की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है. अगर आप किसी मीटिंग में है तो मोबाइल के माइक्रोफोन एक्सेस को ऑफ कर दें. यह सब छोटी सावधानियां साइबर ठगी से बचने में बहुत कारगर है.
हर 3 महीने पर चेंज करें पासवर्ड: इसके अलावा केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही उपयोग करें. किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका वेब एड्रेस ध्यान से जांच लें. यदि यूआरएल में असामान्य स्पेलिंग या अतिरिक्त अक्षर दिखाई दें तो सतर्क हो जाएं.
गौरव कुमार पांडेय का कहना है कि समय-समय पर मोबाइल, लैपटॉप और एप्लिकेशन को अपडेट करते रहना भी जरूरी है. हर 3 महीने पर पासवर्ड चेंज कर दें. अधिकांश सुरक्षा अपडेट पुराने बग और कमजोरियों को दूर करने के लिए जारी किए जाते हैं. अपडेट को नजरअंदाज करना साइबर अपराधियों को अवसर देने जैसा है.
साझा न करें निजी जानकारी: उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतनी चाहिए. जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पता, बैंकिंग जानकारी या पहचान संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने चाहिए. साइबर अपराधी इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते हैं.
करियर बनाने का बड़ा माध्यम है इंटरनेट: उनका मानना है कि इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सीखने और करियर बनाने का एक बड़ा माध्यम है. यदि युवा सही दिशा में मेहनत करें, लगातार सीखते रहें और तकनीक का उपयोग समाज के हित में करें तो वह देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

क्या है OTP बाईपास बग? : यह ऐप या वेबसाइट की कोडिंग में सुरक्षा खामी है, जिससे हैकर्स बिना सही ओटीपी दर्ज किए ही किसी भी अकाउंट पर लॉग इन कर सेंधमारी कर सकता है. इसमें हैकर्स सर्वर से आने वाले गलत पासवर्ड के रिस्पॉन्स को बीच में ही बदलकर सही पासवर्ड कर देते हैं. ओटीपी बाईपास बग तब पैदा होता है, जब सर्वर खुद दोबारा ओटीपी की जांच नहीं करता और केवल मोबाइल ऐप या ब्राउजर पर भरोसा रखता है.
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