Explainer: 4 सीटों पर NDA की जीत पक्की, 5वीं के लिए असली फाइट! 'किंगमेकर' ओवैसी किसके साथ?
बिहार के राज्यसभा चुनाव में 4 सीटों पर एनडीए की जीत तय है लेकिन पांचवीं पर पेंच फंसा है. एआईएमआईएम निर्णायक साबित होगा. पढ़ें समीकरण..

Published : February 20, 2026 at 8:41 PM IST
- रिपोर्ट: अविनाश कुमार
पटना: बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होगा. आरजेडी-जेडीयू के 2-2 और आरएलएम के जिन एक सांसद का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद एनडीए के लिए इनमें से 4 सीटों पर जीत तय है, जबकि पांचवी सीट के लिए किसी भी गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. ऐसे में एआईएमआईएम के 5 विधायकों का जिसे समर्थन मिलेगा, सीट उसी के खाते में जाएगी.
राज्यसभा की 5वीं सीट पर पेंच: जेडीयू जहां अपनी दोनों सीट फिर से पा लेगी, वहीं बीजेपी को दो सीटों का फायदा होगा लेकिन आरजेडी को नुकसान होना तय है. आरजेडी या महागठबंधन तभी एक सीट जीत सकता है, जब एआईएमआईएम के 5 विधायकों के अलावे बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक विपक्ष के साथ एकजुट रहेंगे. फिलहाल विपक्षा बिखरा हुआ नजर आ रहा है. कांग्रेस ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं किया है, जबकि एआईएमआईएम ने खुद ही अपनी दावेदारी पेश कर दी है. हालांकि आरजेडी का दावा है कि राज्यसभा की पांचवी सीट विपक्ष की ही झोली में जाएगी.
"विपक्ष एकजुट है. पांचवीं सीट विपक्ष को ही मिलेगी. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का भी समर्थन मिलेगा और बसपा का भी, क्योंकि सभी की विचारधारा एक समान है."- रणविजय साहू, विधायक, राष्ट्रीय जनता दल

एआईएमआईएम ने ठोका दावा: एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान विपक्षी एकता की बात तो करते हैं लेकिन आरजेडी को समर्थन देने की बजाय अपना प्रत्याशी देने की बात करते हैं. वे कहते हैं कि हमारा कोई सांसद नहीं है. इसलिए हम चाहेंगे कि हमारा नेता राज्यसभा जाए.

"मैं विपक्ष में हूं लेकिन राज्यसभा में हम लोगों को मौका मिलना चाहिए. हमारा कोई सांसद नहीं है, इसलिए हम क्यों नहीं अपनी पार्टी से प्रत्याशी दें?"- अख्तरुल ईमान, विधायक सह प्रदेश अध्यक्ष, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन

कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट नहीं: महागठबंधन में आरजेडी के बाद सबसे अधिक 6 विधायकों वाली कांग्रेस ने अभी तक राज्यसभा चुनाव को लेकर पत्ता नहीं खोला है लेकिन विधानसभा बजट सत्र में कांग्रेस और आरजेडी में दूरियां साफ दिख रही है. ऐसे कांग्रेस आला कमान के फैसले को विधायक मानेंगे, यह तय है.
आईआईपी और बीएसपी पर नजर: आईआईपी के एकमात्र विधायक इंद्रजीत गुप्ता का कहना है कि हम तो विपक्ष में हैं. इंद्रजीत गुप्ता ने हैदराबाद जाकर ओवैसी से मुलाकात की है और विपक्ष के साथ उन्हें लाने की कोशिश भी की है लेकिन इंद्रजीत गुप्ता नीतीश कुमार का भी समर्थन करते रहे हैं. ऐसे में अंतिम समय में क्या फैसला लेंगे, कहना मुश्किल है. वहीं, बसपा के एकमात्र विधायक सतीश यादव का कहना है कि पार्टी जो फैसला लेगी, हम उसके साथ रहेंगे.

जेडीयू का दावा: पहले से विपक्ष बिखरा हुआ है, ऊपर से एनडीए पांचवी सीट पर भी दावा ठोक रहा है. जेडीयू नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार खुलकर कहते हैं कि जुगाड़ तो हर जगह चलता है. हालांकि वह हॉर्स ट्रेडिंग से इंकार करते हैं.

"जुगाड़ तो हर जगह चलता है. जुगाड़ की जो परिस्थितियां बनेगी, उसके हिसाब से फैसला होगा. अब बिहार में हॉर्स ट्रेडिंग नहीं होता है लेकिन हमारी कोशिश होगी कि एनडीए अधिक से अधिक सीट पर जीत सके."- श्रवण कुमार, जेडीयू नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री
क्या बोले एलजेपीआर नेता?: लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक राजू तिवारी भी सभी पांचों सीट पर जीत का दावा करते हैं. हालांकि राज्यसभा चुनाव में पार्टी की दावेदारी के सवाल पर वह कहते हैं, 'एनडीए में शीर्ष नेता एक दूसरे के संपर्क में है और बैठकर जो भी निर्णय होगा, हम लोग उसे मानेंगे.'

उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी: जिन पांच सीटों पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल हैं. बीजेपी के समर्थन से वह दो साल के लिए उपचुनाव के सदस्य बने थे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फिर से उनको राज्यसभा भेजा जाएगा? आरएलएम नेता आलोक सिंह कहते हैं कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार एनडीए के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं लेकिन इतना तय है कि पांचवीं सीट पर भी एनडीए की ही जीत होगी.

"शीर्ष नेता इस पर फैसला करेंगे. हम कैसे बता सकते हैं कि पांचों सीट पर कौन उम्मीदवार होंगे लेकिन उपेंद्र कुशवाहा जी राष्ट्रीय नेता हैं. जहां तक पांचवीं सीट का सवाल है तो विपक्ष को पता चल जाएगा. पांचों सीट हम लोग जीतेंगे ही."- आलोक सिंह, विधायक सह प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय लोक मोर्चा
क्या कहते हैं जानकार?: राजनीतिक विशेषज्ञ प्रो. प्रमोद कुमार का कहना है कि विधानसभा में एनडीए का पलड़ा भारी है. ऐसे में चार सीट तो आसानी से मिल जाएगी लेकिन अगर पांचवीं सीट भी मिल जाए कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.

पांचवीं सीट कैसे जीत सकता है एनडीए?: प्रोफेसर प्रमोद कुमार कहते हैं कि 4 सीट लेने के बाद भी एनडीए के पास 38 विधायक के वोट बच जाएंगे. वे कहते हैं कि विपक्ष में एकजुटता नहीं है. आरजेडी उम्मीदवार को कांग्रेस और एआईएमआईएम का समर्थन मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है. बसपा विधायक कोई भी फैसला ले सकते हैं. ऐसे में अगर कुछ विधायकों ने अपने को मतदान प्रक्रिया से अलग रखा तो उससे भी एनडीए का काम चल जाएगा.

ऐसा हुआ तो एनडीए का खेल बिगड़ जाएगा: प्रमोद कुमार के अनुसार विपक्ष के सभी दल एकजुट हुए तो एनडीए के लिए पांचवीं सीट जीतना आसान नहीं होगा. उपेंद्र कुशवाहा भी फिर से राज्यसभा जाना चाहते हैं, हालांकि वह अभी कुछ नहीं बोल रहे हैं. इसी तरह चिराग पासवान की पार्टी भी राज्यसभा की एक सीट चाहती है. विधानसभा चुनाव में कम सीट मिलने पर जीतनमांझी की नाराजगी उनके बयानों से आए दिन झलकती रहती है. उनकी तरफ से भी डिमांड हो सकती है. घटक दलों के बीच दावेदारी हुई तो बीजेपी और जेडीयू के लिए मुश्किल हो सकती है.

एनडीए में नए चेहरों की दावेदारी: राज्यसभा में एनडीए की तरफ से कई उम्मीदवार दावेदार हैं. जेडीयू इस बार भी नए चेहरे को राज्यसभा भेज सकता है. हरिवंश को लेकर संशय की स्थिति है, क्योंकि पिछले दिनों नीतीश कुमार से कथित दूरियां नजर आईं थीं. उपेंद्र कुशवाहा को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है. अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री बना दिया था. ऐसे में उनको विधान परिषद भेजना जरूरी है. सबसे अधिक फायदा बीजेपी को होगा, दो सीट बीजेपी को आसानी से मिल जाएगी और 5वीं सीट में भी बीजेपी मदद करेगी. जहां तक उम्मीदवार की बात है तो जाति और सामाजिक समीकरण का इस बार भी एनडीए की तरफ से ख्याल रखा जाएगा.

क्या है विधानसभा का समीकरण?: बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं. एनडीए के 202 विधायक हैं. जिसमें भाजपा के 89, जेडीयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक हैं. वहीं महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, इनमें आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6, माले के 2 और सीपीएम-आईआईपी के एक-एक विधायक हैं. इसके अलावे एआईएमआईएम के 5 और बसपा के एक विधायक हैं.
कैसे तय होता है वोट?: विधायकों की संख्या के आधार पर ही की जीत या हार तय होगी. नियमानुसार विधानसभा के चुनाव में कुल विधायकों की संख्या में रिक्त पदों की संख्या के साथ एक जोड़कर भाग दिया जाता है. 5 सीटों के लिए 41 वोट होना जरूरी है. इस तरह से चार राज्यसभा सांसद एनडीए को मिलना तय है और पांचवें के लिए 38 वोट एनडीए के पास और बचेगा, उसे केवल तीन वोट की जरूरत पड़ेगी. तीन वोट के लिए विपक्षी दलों के वोट पर एनडीए की नजर है. जो स्थिति है, उससे साफ है कि 5वीं सीट के लिए जोड़तोड़ होगा.
कब है राज्यसभा चुनाव?: केंद्रीय चुनाव आयोग की तरफ से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च तक नामांकन होगा. 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. 9 मार्च को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि है. अगर चुनाव की नौबत आई तो 16 मार्च को सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक वोटिंग होगा. उसी दिन शाम 5 बजे के बाद रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा.
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