Explainer: किस जाति और किस पार्टी के कितने कैंडिडेट बनेंगे बिहार में MLC?
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होना है. सभी पार्टियां चेहरे के साथ-साथ जाति समीकरण को साधना चाहती है. रंजीत कुमार की रिपोर्ट..

Published : May 27, 2026 at 8:45 PM IST
पटना: बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. 18 जून को 9 सीटों पर चुनाव और एक सीटों पर उपचुनाव होना है. इन 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की तलाश शुरू हो चुकी है. सभी पार्टियां अपने हिस्से की सीट के जरिये सामाजिक और जातिगत समीकरण को साधना चाहती है. हालांकि कुछ नाम ऐसे हैं, जिसको लेकर पहले से तस्वीर साफ है. इनमें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश शामिल हैं. इसके अलावे बेटे तेजप्रताप यादव को भी आरजेडी चीफ लालू यादव उच्च सदन भेजना चाहते हैं.
4 नामों पर सबकी नजर: चार नामों को लेकर राजनीतिक गलियारे में सबसे ज्यादा चर्चा है. उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है. दोनों बिहार सरकार में मंत्री हैं और 6 महीने के अंदर मंत्री को किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होता है.
संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के तहत यह प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्री बन गया तो उसे 6 महीने के अंदर विधानसभा और विधान परिषद का सदस्य होना पड़ता है. बांकीपुर को छोड़ दें तो आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव संभावित नहीं है. इस वजह से दोनों नेताओं को विधान परिषद भेजना गठबंधन की मजबूरी है.
निशांत का विधान परिषद जाना तय: नीतीश कुमार के पुत्र और वर्तमान में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इन दोनों जेडीयू के अंदर सियासत का केंद्र है. निशांत बिहार सरकार में मंत्री हैं और वह फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं है. शुरुआती दौर में हरनौत विधायक हरिनारायण सिंह ने निशांत के लिए सीट छोड़ने की बात कही थी लेकिन बाद में वह मुकर गए. ऐसे में वह नीतीश कुमार की खाली हुई सीट से एमएलसी बन सकते हैं.

जेडीयू में कौन-कौन दावेदार?: निशांत कुमार के अलावे जिन नामों की चर्चा है, उनमें राजीव कुमार सिंह, ललन मंडल और गुलाम रसूल बलियावी सबसे आगे हैं. राजीव कुमार तारापुर से विधायक रह चुके हैं और सम्राट चौधरी के लिए 2025 चुनाव में सीट छोड़नी पड़ी थी. अति पिछड़ा वर्ग से ललन मंडल को भी मौका मिल सकता है. इसके अलावे अल्पसंख्यक समुदाय से गुलाम रसूल बलियावी की मजबूत दावेदारी है.जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि गठबंधन के तमाम बड़े नेता बैठेंगे तो सीटों को लेकर सहमति बन जाएगी. कहीं कोई परेशानी नहीं है.

"एनडीए के अंदर कोई विवाद नहीं है. कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के लिए चिंता का विषय है. निशांत विधान परिषद जाएंगे या नहीं, यह फैसला पार्टी के स्तर पर होना है और जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा."- राजीव रंजन, राष्ट्रीय प्रवक्ता, जनता दल यूनाइटेड

आरएलएम से दीपक प्रकाश बनेंगे एमएलसी: दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं. बगैर किसी सदन के सदस्य रहे दीपक प्रकाश को दूसरी बार मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. वह नीतीश कैबिनेट में भी मंत्री थे और सम्राट कैबिनेट में भी उन्हें मंत्री बनाया गया है. उपेंद्र कुशवाहा ने एक तीर से दो निशाना साधा है. बेटे को मंत्री बनाकर उनके लिए विधान परिषद की सीट भी सुरक्षित कर ली. पिछले दिनों उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के बीच मुलाकात की हुई. माना जा रहा है कि बीजेपी अपने कोटे से उनको विधान परिषद भेजने को तैयार है.

संजय मयूख भी कतार में: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयूख पर सब की निगाहें टिकी हैं. दिल्ली की राजनीति में वह ऐसे नाम हैं, जो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के ईद-गिर्द देखे जा सकते हैं. कायस्थ समाज से आने वाले संजय मयूख को भाजपा ने बिहार में दो बार विधान परिषद भेजा है. वर्तमान में पार्टी में तीसरी बार विधान परिषद भेजने को लेकर स्पष्ट राय यह है कि किसी व्यक्ति को लगातार तीन बार विधान परिषद नहीं भेजा जा सकता है.

हालांकि इसके कुछ अपवाद भी देखने को मिले हैं. पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद चौरसिया और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे तीन बार विधान परिषद जा चुके हैं. जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य है, उसके मुताबिक संजय मयूख को या तो बांकीपुर से विधानसभा उप-चुनाव लड़ाया जाए या फिर विधान परिषद भेजा जाए.
बीजेपी में किस जाति से कौन दावेदार?: भारतीय जनता पार्टी के खाते में चार विधान परिषद की सीटें हैं. एक सीट उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के लिए छोड़ेगी. ऐसे में तीन सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार तय होने हैं. प्रदेश स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के नाम को तय कर केंद्रीय नेतृत्व के पास भेज दिया गया है.

कुर्मी जाति से ये दो दावेदार: मिल रही जानकारी के मुताबिक बीजेपी की तरफ से कुर्मी जाति से एक नेता को विधान परिषद भेजने की तैयारी है. कुर्मी जाति से सबसे ऊपर नाम पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और सीनियर लीडर प्रेम रंजन पटेल का है. प्रेम रंजन पटेल को विधान परिषद भेजना को लेकर पार्टी के अंदर सहमति है. प्रदेश स्तर से सरोज रंजन पटेल का नाम भी केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया है.
बनिया जाति से इनमें से कोई एक उम्मीदवार: पिछड़ी जाति या फिर बानिया जाति से एक उम्मीदवार को विधान परिषद भेजना भाजपा के लिए मजबूरी है. बनिया जाति से पार्टी के वरिष्ठ नेता और व्यापार आयोग के अध्यक्ष सुरेश रुंगटा, प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धार्थ शंभू, भीम साहू और अमरनाथ गामी का नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया है. इनमें से किसी एक को विधान परिषद भेजा जाना तय माना जा रहा है.
राजपूत जाति के एक नेता जाएंगे विधान परिषद: भारतीय जनता पार्टी राजपूत जाति से किसी एक उम्मीदवार को विधान परिषद भेजने की तैयारी में है. मंत्रिमंडल में राजपूत जाति को कम महत्व मिलने के चलते नेताओं में थोड़ी नाराजगी है. राजपूत समुदाय के लोगों की नाराजगी कम करने के लिए पार्टी किसी राजपूत को विधान परिषद भेज सकती है. संगठन से भाजपा में आए राजेंद्र सिंह का नाम दावेदारों की सूची में शामिल है.
राजपूत समाज से आने वाली भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष अमृता भूषण का नाम भी प्रदेश स्तर से केंद्र को भेजा गया है. इसके अलावा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य राकेश सिंह का नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल है. राकेश सिंह लगभग 25 साल से पार्टी के विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं.

"हमारे यहां सिस्टम है और इस सिस्टम के हिसाब से चयन होता है. प्रदेश चुनाव कमेटी ने नाम शॉर्ट लिस्ट कर केंद्र को भेज दिए हैं और केंद्र के स्तर पर नाम पर चर्चा चल रही है. जैसे ही केंद्र से हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही प्रदेश स्तर पर पार्टी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर देगी."- पंकज सिंह, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
परिवार के सदस्य को भेजेंगे चिराग?: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में एक सीट जाएगी. उनकी तरफ से सबसे प्रबल दावेदार के रूप में चिराग पासवान के भांजे सीमांत मृणाल का नाम आ रहा है. सीमांत 2025 में बोचहां से विधानसभा चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए. संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दूसरा नाम वेद प्रकाश पांडे का है, वह संगठन में सक्रिय हैं. इसके अलावे पूर्व विधान पार्षद और बाहुबली नेता हुलास पांडे भी विधान परिषद जाना चाहते हैं और उन्होंने पार्टी पर दबाव बनाया हुआ है. ये दोनों सवर्ण समाज से आते हैं.

तेज प्रताप को लेकर संशय की स्थिति: विपक्ष को एक सीट मिल सकती है. चर्चा है कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को विधान परिषद भेजना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल का गठन कर लिया है. वर्तमान में तेजस्वी यादव से दूरियां बढ़ी हुई है. ऐसे में अब तक तेजस्वी यादव की ओर से हरी झंडी नहीं दी गई है.

सुनील सिंह भी रेस में: इसके अलावे सुनील कुमार सिंह के नाम की भी चर्चा है. वह निवर्तमान विधान पार्षद है और राजपूत समाज से आते हैं. उनको लालू परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. साथ ही राबड़ी देवी के 'मुंहबोले भाई' हैं. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए उनके दोबारा एमएलसी जाने की गुंजाइश है. वहीं, पार्टी नेताओं का कहना है कि जो भी शीर्ष नेतृत्व फैसला लेगा, स्वीकार्य होगा.

"जो अंकगणित है, उसके हिसाब से राष्ट्रीय जनता दल के खाते में एक सीट जाने की संभावना है. दूसरी सीट के लिए हम लोग कोशिश कर रहे हैं. जहां तक सवाल तेज प्रताप यादव का है तो इस पर फैसला लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को करना है. हम लोगों को उनका फैसला स्वीकार्य होगा."- अरुण कुमार, प्रदेश महामंत्री, राष्ट्रीय जनता दल
क्या कहते हैं जानकार?: राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर संजय कुमार का कहना है कि चार नेताओं पर सब की निगाहें टिकी होगी. संजय मयूख, दीपक प्रकाश, निशांत कुमार और तेजप्रताप यादव चारों हाई प्रोफाइल नेता है. सबकी निगाहें इन चारों नेताओं पर टिकी है. दीपक प्रकाश और निशांत कुमार को विधान परिषद भेजना सरकार और गठबंधन की मजबूरी है तो संजय मयूख को लेकर भी नेता मंथन कर रहे हैं.
"लालू परिवार में तेज प्रताप यादव कमजोर कड़ी हैं और लालू प्रसाद यादव चाहते हैं कि तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव दोनों फिर से एक मंच पर आ जाएं. लालू प्रसाद यादव की कोशिश होगी कि तेज प्रताप यादव को विधान परिषद भेज दिया जाए. उधर, एनडीए निशांत और दीपक प्रकाश तो तय है.

क्या है समीकरण? विधान परिषद की एक सीट के लिए 25 विधायकों की जरूरत होगी. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास फिलहाल 201 विधायक है. इस हिसाब से कुल मिलाकर 8 विधान परिषद सीट एनडीए के खाते में जाना कन्फर्म है. 4 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड का दावा होगा तो 4 पर बीजेपी का भी दावा है. एक सीट राष्ट्रीय जनता दल के खाते में जाना तय माना जा रहा है.
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