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बिहार के इस जिले में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे, ICDS रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

बिहार आईसीडीएस रिपोर्ट के अनुसार एक जिला ऐसा है, जहां 5.54% बच्चों में गंभीर कुपोषण देखा गया है. जानें किस जिलें में सबसे कम कुपोषण.

Buxar malnourished children
बिहार में कुपोषित बच्चे (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 22, 2025 at 5:22 PM IST

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पटना: बिहार में बच्चों के कुपोषण को लेकर सरकार के आधिकारिक आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस (Integrated Child Development Services) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे बक्सर जिले में पाए गए हैं. यह रिपोर्ट आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त पोषण ट्रैकर डेटा पर आधारित है, जिसमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की पोषण स्थिति का आकलन किया गया है.

बक्सर में बच्चों में कुपोषण सर्वाधिक: आईसीडीएस के आंकड़ों के मुताबिक बक्सर जिले में कुल पंजीकृत बच्चों की संख्या 1.12 लाख से अधिक है. इनमें से 6222 बच्चे गंभीर कुपोषण यानी अतिकुपोषण की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं. प्रतिशत के लिहाज से यह आंकड़ा लगभग 5.54% है, जो बिहार के सभी जिलों में सबसे ज्यादा है.

BIHAR MALNOURISHED CHILDREN
इस वजह से भी बढ़ता है कुपोषण (ETV Bharat)

पटना में भी कुपोषण से जूझ रहे बच्चे: रिपोर्ट के अनुसार बक्सर के बाद गोपालगंज जिला कुपोषण के मामले में दूसरे स्थान पर है. यहां लगभग 5.46% बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं. वहीं मधेपुरा जिले में 5.31%, बेगूसराय में 5.08%, मधुबनी में 4.98% और पटना में 4.97% बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं.

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कुपोषण के पीछे की वजह (ETV Bharat)

यहां कुपोषण के मामले कम: आईसीडीएस रिपोर्ट के अनुसार भागलपुर जिला इस मामले में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है. यहां गंभीर कुपोषण की दर एक प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई है. यहां अतिकुपोषण बच्चों में प्रदेश में सबसे कम 0.71% है. कुछ अन्य जिलों की भी स्थिति संतोषजनक बताई गई है. सीतामढ़ी में अतिकुपोषण दर 2.05%, शिवहर में 3.15%, मुजफ्फरपुर में 3.31%, वैशाली में 3.36% और पश्चिम चंपारण में 3.51% है जहां यह दर प्रदेश के अन्य जिलों से बेहतर है. हालांकि यह रिपोर्ट बताती है कि राज्य के अधिकांश जिले अभी भी कुपोषण की चुनौती से बाहर नहीं निकाल पाए हैं.

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कुपोषण से जूझ रहे बच्चे (ETV Bharat)

कुपोषण के पीछे कई कारण है जिम्मेदार: आईजीआईएमएस की स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञ डॉ पल्लवी ने बताया कि कुपोषण के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं. इनमें गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, बच्चों को समय पर पूरक आहार नहीं मिलना, स्वच्छता की कमी और आंगनबाड़ी सेवाओं की कमजोर निगरानी प्रमुख कारण हैं.

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कुपोषण से जूझ रहे बच्चे (ETV Bharat)

क्या है प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन: कई बच्चों में प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन पाया जाता है. जिसके कारण बच्चों को सभी भोजन नहीं पच पाते. ऐसे बच्चों को पहचान कर उनके पोषण आहार के लिए पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों में पोषण पुनर्वास केंद्र चलाते हैं जहां मां और बच्चे का डाइट तैयार किया जाता है और खिलाया जाता है.

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कुपोषण से ऐसे बचें (ETV Bharat)

कुपोषित बच्चों को भेजा जाए पुनर्वास केंद्र: डॉ पल्लवी ने बताया की सरकार को चाहिए कि जहां अति कुपोषित बच्चों की पहचान हो रही है, उन बच्चों को ऐसे पुनर्वास केंद्र में लाकर पोषित आहार दिया जाए. ऐसे पुनर्वास केंद्रों पर बच्चों को पोषाहार, टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जाती है. उन्होंने कहा कि खासकर उन जिलों में जहां कुपोषण की दर पांच प्रतिशत से अधिक है, वहां विशेष अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय करना चाहिए.

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