ETV Bharat / bharat

नीतीश सरकार की 'जीविका' ने बदली शोभा देवी की तकदीर, प्रेरणादायक है 'मशरूम क्वीन' की कहानी

बिहार के मुजफ्फरपुर की शोभा देवी की कहानी प्रेरणादायक है. जीविका जैसे मंचों की बदौलत ग्रामीण महिलाएं तरक्की की नई इबारत लिख रही हैं. पढ़ें

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
मुजफ्फरपुर की शोभा देवी बनीं प्रेरणास्त्रोत (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 18, 2026 at 7:45 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: विवेक कुमार

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी जा रही है. ग्रामीण महिला शोभा देवी, जो कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज 'मशरूम क्वीन' के नाम से विख्यात हैं. बिहार सरकार की जीविका परियोजना से जुड़कर उन्होंने मशरूम की खेती और जैविक खाद के जरिए न केवल अपनी तकदीर बदली, बल्कि आज वह एक सफल एग्री-उद्यमी हैं. इतना ही नहीं शोभा देवी की सलाह 400 से अधिक किसानों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.

'मशरूम क्वीन' शोभा देवी (39) मोतीपुर प्रखंड अंतर्गत ठिकहा गांव की रहने वाली हैं. महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता की सशक्त पहचान बन चुकी शोभा देवी अपने परिवार की कुल आय में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान कर रही हैं. मशरूम की खेती से पहचान बनाने वाली शोभा देवी को अब लोग सम्मान से 'मशरूम क्वीन' कहने लगे हैं. आज शोभा कृषि उद्यमी सेवा केंद्र में दूर-दूर से किसान परामर्श लेने आते हैं.

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

जीविका से जुड़कर बदली शोभा की जिंदगी: शोभा देवी के जीवन की दिशा तब बदली, जब वे जीविका से जुड़ीं. वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से जीविका से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को नई राह मिली. एक बैठक के दौरान समूह की लीडर, जिन्हें सभी 'सीएम दीदी' कहते हैं, ने उन्हें एग्री-एंटरप्रेन्योर (AE) प्रोग्राम की जानकारी दी.

21 दिनों का सघन प्रशिक्षण: इस कार्यक्रम के तहत 21 दिनों का सघन प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके बाद महिलाएं खेती से जुड़े व्यवसाय जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि सलाह का काम शुरू कर सकती हैं. लंबे समय से कुछ अपना करने की इच्छा रखने वाली शोभा देवी ने इस अवसर को पूरी गंभीरता से अपनाया.

प्रशिक्षण से बदली सोच और दिशा: AE प्रोग्राम के प्रशिक्षण के दौरान शोभा देवी को आधुनिक खेती, व्यवसाय प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन की बारीकियां सिखाई गईं. नर्सरी प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, वर्मी-कम्पोस्टिंग, मल्चिंग तकनीक और अनाज व्यापार जैसे विषयों के साथ-साथ लागत प्रबंधन, मुनाफा बढ़ाने और किसानों से संवाद जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया.

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
मशरूम क्वीन के रूप में बनायी पहचान (ETV Bharat)

आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक: सिंगेंटा फाउंडेशन इंडिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस तरह का प्रशिक्षण महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है, जो ग्रामीण उद्यमिता की बड़ी चुनौती रही है. शोभा का सफर आसान नहीं था. मशरूम की खेती और एग्री सर्विस सेंटर खोलने के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी.

"शुरुआत में ग्रामीणों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने सहयोग नहीं किया. इसके बाद जीविका की पहल पर मुझे दो लाख रुपये का लोन मिला. साथ ही, अपनी बचत जोड़कर काम की शुरुआत की. इससे पहले, 2021 में वर्मी कम्पोस्ट बनाने से शुरुआत की थी. मेरे पास पशुओं का गोबर उपलब्ध था, इसलिए केंचुआ और बेड खरीदकर महज तीन हजार रुपये के खर्च से वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया. इससे अच्छी आमदनी हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा."- शोभा देवी, कृषि उद्यमी

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

एग्री उद्यमी केंद्र की स्थापना : इसके बाद लोन लेकर उन्होंने एग्री उद्यमी केंद्र (AE Service Centre) की स्थापना की. मुनाफे को दोबारा निवेश कर उन्होंने धीरे-धीरे व्यवसाय का विस्तार किया और समय पर ऋण चुकाकर अपनी साख मजबूत की. आज शोभा देवी न केवल खुद मशरूम का उत्पादन कर रही हैं, बल्कि एक मजबूत बिजनेस चेन भी खड़ी कर चुकी हैं.

हर महीने 15 हजार की कमायी: इस नेटवर्क से शोभा देवी को प्रति माह लगभग 15 हजार रुपये की शुद्ध आय हो रही है. मशरूम के साथ-साथ वे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार करती हैं. किसानों को मिट्टी, फसल और कीट संबंधी समस्याओं पर सही सलाह देकर वे उन्हें नुकसान से बचाती हैं.

शोभा देवी बताती हैं कि पहले किसान बिना सही जानकारी के अधिक खाद डाल देते थे या गलत दवाइयों का इस्तेमाल करते थे, जिससे फसल खराब हो जाती थी. प्रशिक्षण के बाद दिए गए उनके सुझावों से किसानों की पैदावार बेहतर हुई और भरोसा बढ़ा है.

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
वर्मी कम्पोस्ट बनातीं शोभा (ETV Bharat)

शोभा देवी के संपर्क में करीब 400 किसान : आज मोतीपुर और आसपास के इलाकों के करीब 400 किसान उनके संपर्क में हैं. ठेकहा गांव के किसान मुक्तेश्वर सिंह बताते हैं कि शोभा देवी महिला जीविका से जुड़ी हुई हैं और कृषि उद्यमी केंद्र का सफल संचालन कर रही हैं. वे न सिर्फ हमारे जिले में, बल्कि पूरे प्रदेश में एक मिसाल कायम कर रही हैं. उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जैविक खाद के उपयोग का प्रशिक्षण दे रही हैं और उन्हें जागरूक बना रही हैं.

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
सेंटर में शोभा से परामर्श लेते किसान (ETV Bharat)

''हम लोग नियमित रूप से शोभा देवी से जैविक खाद खरीदते हैं. बागवानी, सब्जी और अनाज की खेती में इसका उपयोग कर रहे हैं. उनके इस सराहनीय प्रयास से किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं और इसका प्रत्यक्ष लाभ भी उठा रहे हैं. जैविक खाद्य से खेती की लागत कम हुई, वहीं फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है. साथ ही, किसानों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी मजबूत हुई है.'' - मुक्तेश्वर सिंह, ठेकहा गांव के किसान

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
शोभा देवी के संपर्क में 400 से ज्यादा किसान (ETV Bharat)

परिवार की जिम्मेदारियां और सहयोग: शोभा देवी की शादी वर्ष 1995 में हुई थी. परिवार में कुल सात सदस्य हैं. सास-ससुर वृद्ध हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी शोभा देवी ही निभाती हैं. पति राज किशोर महतो सऊदी अरब में नौकरी करते हैं और हर महीने लगभग 20 हजार रुपये घर भेजते हैं.

SHOBHA DEVI OF MUZAFFARPUR
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

दो बेटे और एक बेटी: शोभा देवी को एक बेटी और दो बेटे हैं. बड़ी बेटी खुशबू (27) ग्रेजुएशन कर रही है. बेटा मनीष (25) मां के साथ खेती के काम में हाथ बंटाता है, जबकि छोटा बेटा अमित (22) इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है.

सामाजिक बदलाव की कहानी: शोभा देवी की सफलता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी कहानी है. जिस महिला की राय पहले घर और समाज में सीमित मानी जाती थी, आज वही निर्णय लेने वाली अहम आवाज बन चुकी हैं. उनकी सफलता को देखकर गांव की कई महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं और जीविका व AE प्रोग्राम से जुड़ने की इच्छा जता रही हैं.

एग्री-एंटरप्रेन्योर प्रोग्राम से फायदा: अधिकारियों का कहना है कि एग्री-एंटरप्रेन्योर प्रोग्राम जैसे प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि महिलाओं को सम्मान, पहचान और आत्मविश्वास भी देते हैं. शोभा देवी की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण, सामूहिक सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं भी बदलाव की अगुआ बन सकती हैं.

क्या है बिहार सरकार की जीविका परियोजना?: बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति द्वारा संचालित बिहार सरकार की जीविका परियोजना की शुरुआत साल 2006-2007 में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुई थी. यह परियोजना विश्व बैंक समर्थित पहल है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए संगठित करती है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है. जीविका के तहत सभी जिलों में महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, कम ब्याज पर ऋण और रोजगार के अवसर प्रदान किये जाते हैं.

एग्री-एंटरप्रेन्योर प्रोग्राम: एग्री-एंटरप्रेन्योर प्रोग्राम बिहार जीविका और सिंगेंटा फाउंडेशन इंडिया की एक साझा पहल है. इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षित कर खेती से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर या व्यवसायी के रूप में स्थापित करना है, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें.

ये भी पढ़ें

22 कैरेट सोने की परत वाली इस पेंटिंग ने बदली बिहार की कृष्णा देवी की जिंदगी, आज लाखों में है कमायी

बिहार में हो रही हवा में खेती, न मिट्टी, न पानी की जरूरत, जानें क्या है ये नई तकनीक?

मक्के के छिलके से बना कप-प्लेट देखा है कहीं, कैंसर से इनोवेशन की ये कहानी है खास