बिहार में EV की रफ्तार तेज तो हो गई लेकिन चार्जिंग नेटवर्क सबसे बड़ी समस्या, आंकड़ों से समझिए स्थिति
बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन तेजी से बढ़ा, लेकिन सीमित चार्जिंग नेटवर्क और फास्ट चार्जिंग की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है. रिपोर्ट- कृष्णनंदन

Published : August 18, 2026 at 2:27 PM IST
पटना : बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. सरकार सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के जरिए लोगों को EV खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक राज्य की सड़कों पर चलने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाई जाए. लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच सबसे बड़ा सवाल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है. वाहन सड़कों पर बढ़ रहे हैं, जबकि चार्जिंग नेटवर्क अभी उतनी तेजी से विस्तार करता नजर नहीं आ रहा.
सात महीने में ही टूट गया पिछले साल का रिकॉर्ड : परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में बिहार में 15,615 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए थे. वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 60,076 हो गई. वर्ष 2026 में जुलाई तक ही 64,270 इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. यानी महज सात महीने में पिछले पूरे साल से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हो गए. जुलाई 2026 तक राज्य में कुल 1,39,593 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं.

ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों का दबदबा : कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी थ्री-व्हीलर की है. बिहार में 79,419 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रजिस्टर्ड हैं. इसके बाद इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटी की संख्या 56,492 है. इलेक्ट्रिक कारों की संख्या फिलहाल 3,682 है. इससे साफ है कि बिहार में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार फिलहाल ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों के जरिए ज्यादा हो रहा है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों का बाजार अभी शुरुआती दौर में है.
इलेक्ट्रिक कारों में पटना सबसे आगे : इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन में राजधानी पटना बाकी जिलों से काफी आगे है. पटना में 2,376 इलेक्ट्रिक कार रजिस्टर्ड हैं. इसके बाद मुजफ्फरपुर में 241, पूर्णिया में 204 और गया में 117 इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर्ड हैं. आंकड़े बताते हैं कि इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर का इस्तेमाल फिलहाल बड़े शहरों और शहरी आबादी में ज्यादा हो रहा है.

दोपहिया वाहनों में भी राजधानी की बढ़त : इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटी के मामले में भी पटना सबसे आगे है. राजधानी में 11,148 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रजिस्टर्ड हैं. गया में 5,104, मुजफ्फरपुर में 4,739, मोतिहारी में 3,218 और बेतिया में 2,466 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन हैं. दोपहिया वाहन मालिकों के लिए राहत यह है कि इन्हें घर के कनेक्शन से भी चार्ज किया जा सकता है. समस्या तब सामने आती है जब लंबी दूरी या लगातार फील्ड वर्क के दौरान बैटरी खत्म होने लगे.
518 चार्जिंग स्टेशन फिर भी सवाल बरकरार : प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 518 चार्जिंग स्टेशन हैं. इनमें 172 फास्ट और 346 स्लो चार्जिंग स्टेशन बताए गए हैं. फास्ट चार्जिंग स्टेशन मुख्य रूप से हाईवे और प्रमुख मार्गों के आसपास हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदा और तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता और क्षमता को लेकर सवाल बने हुए हैं.
कार के लिए हर चार्जिंग स्टेशन उपयोगी नहीं : ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक बाइक की चार्जिंग व्यवस्था और इलेक्ट्रिक कार की जरूरत अलग होती है. कारों को कई मामलों में ज्यादा क्षमता वाले और विशेष चार्जर की आवश्यकता होती है. इसलिए जहां बाइक या ई-रिक्शा चार्ज हो रहे हों, जरूरी नहीं कि वहां इलेक्ट्रिक कार भी चार्ज की जा सके. यही वजह है कि ज्यादातर इलेक्ट्रिक कार मालिक घर पर ही चार्जिंग पॉइंट लगवाकर रखते हैं.

लंबी दूरी पर जाने से बच रहे कार ओनर : पटना में इलेक्ट्रिक कार इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क है. घर पर चार्जिंग की सुविधा होने के बावजूद लंबी दूरी की यात्रा में रास्ते में फास्ट चार्जर मिलने की गारंटी नहीं रहती. कई वाहन मालिक शहर और आसपास के इलाकों तक ही इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.
''इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल मुख्य रूप से शहर और आसपास के इलाकों में ही करता हूं. लंबी दूरी की यात्रा करने में सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग को लेकर रहती है. अगर रास्ते में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हों तो मैं इलेक्ट्रिक कार का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता हूं. मेरे घर में कंपनी की ओर से चार्जिंग पॉइंट लगाया गया है और आमतौर पर वहीं कार चार्ज होती है. जहां इलेक्ट्रिक बाइक और ई-रिक्शा चार्ज किए जाते हैं, वहां इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करना संभव नहीं होता. कार के लिए अलग क्षमता और विशेष चार्जिंग व्यवस्था चाहिए.''- रंजीत कुमार EV कार ओनर

ई-रिक्शा चालक भी निजी चार्जिंग पर निर्भर : बिहार में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन ई-रिक्शा हैं, लेकिन इनके लिए भी सार्वजनिक चार्जिंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. पटना के ई-रिक्शा चालक घर पर वाहन चार्ज करने को प्राथमिकता देते हैं. जरूरत पड़ने पर निजी चार्जिंग केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है. यहां शुल्क अलग-अलग है. कुछ जगहों पर फुल चार्ज के लिए करीब 100 रुपये तो कहीं 150 रुपये तक लिए जाने की बात सामने आती है.
शोरूम बन रहे इमरजेंसी चार्जिंग पॉइंट : इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन चालकों की स्थिति भी अलग नहीं है. कई वाहन मालिक बताते हैं कि बैटरी कम होने पर उन्हें कंपनी के शोरूम तक जाना पड़ता है. कुछ शोरूम अपने ग्राहकों को चार्जिंग सुविधा देते हैं, जबकि दूसरी कंपनियों के वाहनों के लिए शुल्क लिया जा सकता है. यह तत्काल राहत तो है, लेकिन व्यापक सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विकल्प नहीं.
''पिछले दो वर्षों से इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल कर रहा हूं. इलेक्ट्रिक स्कूटी किफायती होने के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है. इसका मेंटेनेंस खर्च कम है. आमतौर पर घर से स्कूटी को फुल चार्ज करके निकलते हैं और पटना शहर में ही इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ज्यादा फील्ड वर्क होने पर बैटरी कम होने की स्थिति में इलेक्ट्रिक स्कूटी को शोरूम का सहारा लेकर चार्ज करना पड़ता है. वहां कुछ शुल्क देकर कुछ समय के लिए चार्जिंग कर लेता हूं.''- इंद्रजीत कुमार, इलेक्ट्रिक स्कूटी चलाने वाले

पेट्रोल पंप और सरकारी परिसरों में चार्जिंग की मांग : इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों की मांग है कि पेट्रोल पंप, सरकारी कार्यालय, पार्किंग, मॉल और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट लगाए जाएं. खासकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए फास्ट चार्जर का नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लंबी दूरी की यात्रा में वाहन मालिकों को बैटरी खत्म होने का डर न रहे.
''घर की पार्किंग में कंपनी की ओर से चार्जिंग पॉइंट लगाया गया है. इसी के जरिए कार चार्ज होती है. अगर रास्ते में कार की बैटरी कम हो जाए या डिस्चार्ज होने लगे तो विकल्प सीमित हैं. दीदारगंज चेक पोस्ट के पास फास्ट चार्जर उपलब्ध है, इसलिए जरूरत पड़ने पर वहां जाना पड़ता है. पटना के कुछ मॉल में भी पहले चार्जिंग स्टेशन थे, लेकिन अब कई जगह ये खराब पड़े हैं. पेट्रोल पंप और सरकारी परिसरों में भी फोर व्हीलर के लिए चार्जिंग पॉइंट लगाए जाएं.''- भोला चौहान, ड्राइवर, EV SUV
नई ईवी पॉलिसी से बढ़ी उम्मीद : बिहार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है. नीति के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को प्रोत्साहन और सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई है. पेट्रोल पंप संचालकों को भी चार्जिंग सुविधा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. कई होटल और निजी संस्थान भी अपने परिसर में चार्जिंग पॉइंट लगाने लगे हैं.
हाईवे पर 40-50 किलोमीटर पर चार्जिंग का दावा : परिवहन मंत्री दामोदर रावत के अनुसार नई नीति में हाईवे पर करीब 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक कारों के लिए चार्जिंग पॉइंट विकसित करने की योजना है. शहरी इलाकों में तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है. सरकार का दावा है कि अगले एक साल में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

''सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. हाईवे पर करीब 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक कारों के लिए चार्जिंग पॉइंट विकसित करने की योजना है. वहीं शहरी क्षेत्रों में तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. निजी स्तर पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को भी सब्सिडी देने की व्यवस्था है. पॉलिसी अभी नई है और इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू होने में समय लगेगा. कई पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग पॉइंट लगाने के लिए जगह तैयार की जा रही है.''- दामोदर रावत, परिवहन मंत्री, बिहार
सिर्फ स्टेशन बढ़ाना काफी नहीं : ग्राउंड पर इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों की परेशानी बताती है कि केवल चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. स्टेशन कहां हैं, कितने समय में चार्ज करते हैं, किस-किस वाहन के अनुकूल हैं और खराब होने पर कितनी जल्दी ठीक होते हैं. ये सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. खासकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए फास्ट चार्जिंग नेटवर्क को प्राथमिकता देनी होगी.
सब्सिडी से खरीद आसान लेकिन चार्जिंग में बाधा : सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को आकर्षक बनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दे रही है. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर करीब 10 से 12 हजार रुपये तक और चार पहिया वाहनों पर एक लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है. रोड टैक्स में भी 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है. इससे खरीदारी बढ़ रही है, लेकिन वाहन खरीदने के बाद नियमित और भरोसेमंद चार्जिंग सुविधा सबसे बड़ी जरूरत बन गई है.

2030 के लक्ष्य की असली परीक्षा : बिहार ने 2030 तक सड़क पर चलने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है. रजिस्ट्रेशन के आंकड़े बताते हैं कि ईवी की मांग तेजी से बढ़ रही है. अब चुनौती इस बढ़ती मांग के साथ चार्जिंग नेटवर्क को तैयार करने की है. अगर वाहन बढ़ते रहे और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पीछे रहा तो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.

चार्जिंग नेटवर्क में संतुलन जरूरी : बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है. ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. अब सरकार के सामने चुनौती है कि खरीद को बढ़ावा देने वाली नीतियों के साथ चार्जिंग नेटवर्क को भी उसी गति से जमीन पर उतारा जाए. क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के बाद सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वाहन कितना चलता है, सवाल यह भी है कि अगली चार्जिंग कहां मिलेगी?
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