चुनावी रैली में तेजस्वी ने सभी को पछाड़ा, अकेले 181 जनसभा को किया संबोधित
बिहार चुनाव में रैलियों की बहार रही. तेजस्वी यादव अकेले 181 से अधिक रैलियां की. एनडीए कुल 126 रैलियां और 13 रोड शो किया.

Published : November 9, 2025 at 7:46 PM IST
पटना: बिहार चुनाव 2025 के प्रचार का शोर आज रविवार को थम गया. 6 अक्टूबर को आचार संहिता लागू हुआ था और 17 अक्टूबर से चुनावी प्रचार की औपचारिक रूप से राजनीतिक दलों द्वारा शुरुआत हुई थी. करीब तीन सप्ताह चले इस चुनावी महासमर में नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी.
प्रचार-प्रसार थमा: प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और देश के नेता प्रतिपक्ष से राज्य के नेता प्रतिपक्ष, तमाम नेताओं ने खूब जनसभाओं को संबोधित किया. इसी बीच 9 नवंबर की शाम को जैसे ही प्रचार थमा, बिहार की राजनीतिक फिजा में सन्नाटा छा गया, लेकिन मतदाताओं के मन में उम्मीदवारों का संदेश जो है, वह 14 नवंबर को परिणाम के दिन स्पष्ट होगा.
दो चरणों में वोटिंग: बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न हो रहा है. पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 सीटों पर हुआ. दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा, जिसमें 20 जिलों की 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. पहले चरण में रिकॉर्ड 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है.

नीतीश और मोदी की मुख्य भूमिका: विधानसभा चुनाव में एनडीए की ओर से करीब 381 रैलियां और रोड शो किया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुल 84 जनसभाओं को संबोधित किया और 5 से अधिक रोड शो किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 16 जनसभाएं की और पटना में एक रोड शो भी किया. 2020 के विधानसभा चुनाव में मोदी ने 12 जनसभाएं की थी, इस बार उनकी चुनाव में बढ़ी हुई सक्रियता देखने को मिली.
चिराग की सबसे अधिक सभाएं: एनडीए में सबसे अधिक जनसभा को संबोधित गठबंधन के युवा नेता चिराग पासवान ने किया. लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने 90 जनसभाएं कीं और 6 से अधिक रोड शो निकाले. गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार चुनाव में 36 जनसभाओं और एक रोड शो के ज़रिए मतदाताओं को संबोधित किया. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 15 जनसभाओं में शिरकत की. इसके अलावे सम्राट चौधरी 53, दिलीप जायसवाल 51, अमित शाह 36, योगी आदित्यनाथ 31 और राजनाथ सिंह 20 रैलियां की.

मोदी-शाह की सभा से लोग जागरूक: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनसभा के साथ एक रोड शो किया. पीएम मोदी की सभाओं और अमित शाह के संबोधनों से कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश आया. इस बात की उन्हें खुशी है कि जनता ने विकास को चुना है. पहले चरण के मतदान में इसका संकेत साफ दिखा है.
"पीएम मोदी ने अपनी सभा में लोगों को मतदान के लिए जागरूक किया. बढ़ा हुआ मतदान एक बड़ी उपलब्धि है. पहले चरण में एनडीए को बढ़त है और दूसरे में भी बढ़त दिख रही है." -भूपेंद्र यादव, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी
तेजस्वी की बड़ी डिमांड: महागठबंधन की तरफ से पूरे प्रचार अभियान में सबसे अधिक भूमिका तेजस्वी यादव की रही. उन्होंने कुल 181 जनसभाएं की. कई रोड शो भी किए. राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बताया कि तेजस्वी यादव ने 24 अक्टूबर से प्रचार की शुरुआत की थी. एक दिन में चार सभा की थी. अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ा तेजस्वी यादव ने एक दिन में अधिकतम 18 जनसभाओं को संबोधित किया.

"तेजस्वी यादव ने हेलीकॉप्टर से 181 जगह जाकर जनसभा को संबोधित किया. कुछ रोड शो में भी अपने संबोधन कर हर जिले में युवाओं से सीधे संवाद किए. इस बार जनता बदलाव चाहती है. युवा जाति धर्म मजहब सभी की दीवार तोड़कर एकजुट होकर मतदान किए हैं." -चितरंजन गगन, राजद प्रवक्ता
कांग्रेस की कमान प्रियंका और राहुल ने संभाली: महागठबंधन में कांग्रेस नेता और देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 16 जनसभाओं को संबोधित किया. जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा ने 14 जनसभाएं और एक रोड शो की. प्रियंका ने 1 नवंबर से चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चार जनसभाओं में हिस्सा लिया. इसके अलावे मुकेश सहनी ने तेजस्वी यादव के बाद सबसे ज्यादा 161 रैलियां की.

युवा वोटर बना केंद्र बिंदु: इस बार के चुनाव प्रचार में हर दल ने युवा वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश की. रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे प्रचार के केंद्र में रहे. राजनीतिक विशेषज्ञ प्रवीण बागी का मानना है कि मतदान प्रतिशत में वृद्धि इस बात का संकेत है कि युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाता इस बार सक्रिय भूमिका में हैं. इसी बीच बिहार में अब चुनाव प्रचार थम चुका है.
"सारा ध्यान 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर है. राजनीतिक दल अपने-अपने जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन 14 नवंबर को परिणाम आना है. यह परिणाम तय करेगा कि बिहार की सत्ता किसके हाथ में जाएगी." -प्रवीण बागी, राजनीतिक विशेषज्ञ
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