Bihar Results 2025: महागठबंधन की बुरी हार, क्या हैं कारण, राजनीतिक विशेषज्ञ से जानें
बिहार चुनाव में महागठबंधन 34 सीटों पर सिमटता दिख रहा है. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इस बुरी हार पर चर्चा शुरू हो गई है.

Published : November 14, 2025 at 8:29 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election Results 2025) में विपक्षी महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों वाला विपक्षी गठबंधन 35 से भी कम सीट पर सिमट गया. शुक्रवार को आए चुनावी नतीजों में विपक्ष का प्रदर्शन इतना निराशानजक था, जिसकी चुनाव से पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. पिछले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी रही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को इस चुनाव में विधानसभा में विपक्ष का पद बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. आरजेडी मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष का पद बचा सकी.
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध चुनाव नतीजों के मुताबिक, आरजेडी 25 सीटों पर आगे है या जीत रही है. इसी प्रकार कांग्रेस मात्र 6 सीटों पर सिमटती दिख रही है. वाम दलों के खाते में मात्र तीन सीटें आती दिख रही हैं. महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (VIP) का खाता तक नहीं खुला. तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन की चुनाव में बुरी हार हुई. देखा जाएगा तो आरजेडी का किला ढह गया है.
चुनाव नतीजों में सत्तारूढ़ एनडीए 200 सीटों का आंकड़ा पार करता दिख रहा है. बीजेपी को 89 सीट, जेडीयू को 85, लोजपा (रामविलास) को 19, HAMS को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को चार सीटें मिलती दिख रही है. बिहार में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 122 है. एनडीए के प्रदर्शन को देखकर तो लगता है कि इनको भी ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं रही होगी.
वोट प्रतिशत की बात करें तो आरजेडी को 22.02 प्रतिशत वोट मिले हैं. इसके बाद भाजपा को 20.11 प्रतिशत, जेडीयू को 19.25 प्रतिशत, कांग्रेस को 8.75 प्रतिशत वोट मिले हैं.
2020 के चुनाव की बात करें तो आरजेडी को 75 सीटें मिली थीं, कांग्रेस को 19 और वाम दलों को 18 सीटों मिली थीं. कुल मिलाकर महागठबंधन के खाते में 110 सीटें आई थीं. पिछले चुनाव में एनडीए को कुल 125 सीटें (BJP-74, JDU-43, HAM-4, VIP-4) मिली थीं. तब वीआईपी एनडीए में शामिल थी और 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
महागठबंधन की हार के पीछे कारणों पर चर्चा शुरू हो गई. फिलहाल विपक्षी नेता चुनाव में हार के कारणों पर मंथन करने की बात कह रहे हैं. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय है.
महागठबंधन की दुर्गति के लिए कौन जिम्मेदारी?
वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडे का मानना है, "महागठबंधन की दुर्गति का कारण स्वयं तेजस्वी यादव, लालू यादव हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच है. जिसके केंद्र बिंदु में राहुल गांधी हैं... और जो कुछ बचा-खुचा था, उसको मुकेश सहनी ने पूरा कर दिया. 2020 के चुनाव में जो तेजस्वी की सोच थी वो 2025 के चुनाव में ठीक उसका उल्टा हो गया. संभव है लालू जी आज जेल से बाहर है. साथ में बैठते होंगे ये उसी का प्रभाव है.
चुनाव से कुछ दिन पहले लालू यादव का रीत लाल यादव के लिए चुनाव प्रचार करना लोगों को 'जंगलराज' की याद दिला ही दिया होगा, क्योंकि आज भी 'जंगलराज' से हर कोई सहम जाता है. - सुनील पांडे, वरिष्ठ पत्रकार
आरजेडी ने बताया ईवीएम की सुनामी: उधर, महागठबंधन की प्रमुख पार्टी आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह इस परिणाम को सच्चाई से परे और ईवीएम की सुनामी बताया है. उन्होंने कहा कि ये परिणाम सच्चाई से परे है और इस चुनाव का परिणाम बिहार की जानता भोगेगी. दूसरे राज्यों में जहां बिहारियों की पिटाई होती है. रोजी रोटी के लिए बाहर जाकर दर-दर भटकते है. उनको इस ईवीएम की सुनामी का परिणाम भुगतना पड़ेगा.
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गठबंधन में अंतर्कलह का परिणाम: वहीं, बिहार भाजपा के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि चुनाव परिणाम में डबल इंजन की सरकार के द्वारा किए गए कार्य और लगातार बिहार सरकार द्वारा जानता के हित में किए गए कार्य साफ नजर आते हैं. जहां तक महागठबंधन की बात है ये उनके अहंकार का परिणाम है. गठबंधन में अंतर्कलह का ही परिणाम है कि कांग्रेस पार्टी दो अंकों के लिए भी तरस गई. तेजस्वी यादव अब अपना बोरिया बिस्तर समेटिये, आपकी राजनीति बिहार से खत्म हो गई.
जंगलराज की पुनरावृति नहीं चाहती थी जनता: रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि बिहार की जनता अब जंगलराज की पुनरावृति नहीं चाहती थी. इसी कारण एक बार फिर नीतीश कुमार पर इन्होंने विश्वास जताया और एनडीए प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि महागठबंधन तो अपने अंतर्कलह से परेशान था और सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम समय में फैसला होना भी गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं होना भी दुर्गति का कारण है.
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