बिहार में सबसे निचले स्तर पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व, सिर्फ ये 11 विधायक ही बना सके अपनी जगह
बिहार विधानसभा में इस बार मुस्लमानों का प्रतिनिधित्व इतिहास में सबसे कम रहेगा. इस बार सिर्फ 11 उम्मीदवारों ने ही जीत हासिल की है.

Published : November 15, 2025 at 6:59 PM IST
पटना: बिहार की 243 सीटों वाली नई विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ गिरावट के साथ महज 11 रह गई है. राज्य की करीब 18 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के लिहाज से यह अब तक का सबसे कम प्रतिनिधित्व है. 2020 में जहां 19 मुस्लिम विधायक चुने गए थे, वहीं इस बार यह संख्या 42 प्रतिशत तक कम हो गई.
ओवैसी की AIMIM सबसे आगे, 5 सीटें अपने नाम की: सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सबसे ज्यादा 5 मुस्लिम विधायक दिए हैं. पार्टी ने अपनी सभी पुरानी 5 सीटें (अमौर, बायसी, जोकीहाट, बहादुरगंज और कोचाधामन) बरकरार रखीं.

बिहार में AIMIM: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बिहार में अपनी जड़ें 2015 के विधानसभा चुनाव से जमानी शुरू की थीं. उस समय पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, लेकिन सीमांचल क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार हो गया. इसका असर 2019 लोकसभा चुनाव में साफ दिखा, जब किशनगंज सीट पर AIMIM उम्मीदवार अख्तरुल इमान को करीब 3 लाख वोट (26.78%) मिले थे. 2020 में चौंकाया, 5 सीटें जीतीं लेकिन 4 विधायक चले गए RJD में2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल की 24 सीटों वाले क्षेत्र में धमाकेदार प्रदर्शन किया और पांच सीटें जीत लीं.

महागठबंधन को तगड़ा झटका, सिर्फ 5 मुस्लिम उम्मीदवार ही जीते: तेजस्वी यादव के महागठबंधन ने 30 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ 5 ही जीत सके. उसमें आरजेडी के तीन उम्मीदवार और कांग्रेस के दो उम्मीदवार शामिल हैं.

एनडीए खेमे में सिर्फ एक मुस्लिम विधायक: नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए ने 5 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें सिर्फ एक ही जीत दर्ज कर सके. जेडीयू के चैनपुर उम्मीदवार मोहम्मद जमा खान ने जीत हासिल की है. वे 2020 में बसपा से जीते थे, बाद में जदयू में शामिल हुए. वहीं चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) और वाम दलों का मुस्लिम खाता तक नहीं खुला.

बिहार में मुस्लिम आबादी: बिहार में मुस्लिम आबादी 17.7 फीसदी से ज्यादा है और 47 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता परिणाम तय करने की ताकत रखते हैं. 11 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 40% से अधिक हैं. 7 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम 30% से 40% के बीच हैं. जबकि 29 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 20% से 30% के बीच है.

बिहार के सियासी इतिहास में सबसे कम मुस्लिम विधायक: बिहार (झारखंड अलग होने के बाद) में यह पहला मौका है जब मुस्लिम विधायकों की संख्या दोहरे अंक में भी 11 तक सिमट गई.

पिछले एक दशक में सीमांचल बिहार की राजनीति का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है. 2025 के नतीजों ने साफ कर दिया है कि मुस्लिम वोट अब पहले की तरह एकमुश्त किसी एक गठबंधन के पास नहीं रहा. वह बंट गया है और उस बंटवारे का सबसे बड़ा फायदा AIMIM को मिला है. सर्वाधिक मुस्लिम विधायक 1985 में 34 थे और न्यूनतम मुस्लिम विधायक 2025 में 11 हैं.

सीमांचल में ओवैसी का दबदबा बरकरार: AIMIM ने भले ही सिर्फ 5 सीटें जीती हों, लेकिन बलरामपुर, प्राणपुर, ठाकुरगंज, कसबा, गौराबौरम, दरभंगा ग्रामीण और शेरघाटी जैसी कई सीटों पर दूसरे-तीसरे स्थान पर रहकर महागठबंधन के वोटों में सेंध लगाई.

18% आबादी, महज 4.5% प्रतिनिधित्व: बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 18 फीसदी है. आनुपातिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से कम से कम 43-44 मुस्लिम विधायक होने चाहिए थे, लेकिन वास्तविक संख्या उसका चौथाई से भी कम है. यह आंकड़ा बिहार की बदलती सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों की नई तस्वीर पेश करता है. नीतीश कुमार की 'सुशासन और विकास' की लहर में पूरी तरह से मुस्लिम वोटों का बिखराव हो गया.
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