बिहार के प्रमंडलवार नतीजों ने सबको चौंकाया, जानें कहां-कहां महागठबंधन का सूपड़ा हुआ साफ
बिहार में कुल 9 प्रमंडल हैं. इन प्रमंडलों का परिणाम कैसा रहा और 2020 में जनादेश क्या था, विस्तार से जानें.

Published : November 15, 2025 at 5:53 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम में एनडीए की आंधी देखने को मिली है. बिहार में कुल 9 प्रमंडल भागलपुर, दरभंगा, कोसी, मगध, मुंगेर, पटना, पूर्णिया, सारण और तिरहुत प्रमंडल शामिल है. इस चुनाव में बिहार के किस प्रमंडल ने किसका साथ दिया, विस्तार से जानें.
सबसे बड़ा प्रमंडल तिरहुत: बिहार में 243 सीटों में से 49 सीटें तिरहुत प्रमंडल में आती हैं. सीटों की संख्या के हिसाब से यह सबसे बड़ा प्रमंडल है. इस क्षेत्र में छह जिले आते हैं. इनमें सबसे अधिक 12 सीटें पूर्वी चंपारण में है. इसके बाद मुजफ्फरपुर में 11, पश्चिम चंपारण में 9, वैशाली और सीतामढ़ी में 8-8, और शिवहर जिले में एक सीट आती है. 2025 के इलेक्शन में इस प्रमंडल में एनडीए को 44 सीटें मिली हैं. वहीं महागठबंधन को 5 सीटें मिली हैं.

पटना प्रमंडल में कैसे रहे नतीजे?: बिहार की 243 सीटों में से 43 सीटें पटना प्रमंडल में आती हैं. इस क्षेत्र में कुल 6 जिले आते हैं. पटना जिले में सबसे अधिक 14 विधानसभा की सीटें आती हैं. वहीं नालंदा, भोजपुर और रोहतास में सात-सात सीटें आती हैं. सबसे कम 4-4 सीटें बक्सर और कैमूर जिले में हैं. 2025 में पटना प्रमंडल में एनडीए को 37 सीटें, महागठबंधन के 5 सीटें और एक सीट अन्य के खाते में गई है.

पटना प्रमंडल में बीजेपी के खाते में 16 सीटें, जेडीयू को 16 सीटें मिली हैं. वहीं लोजपा (R) को तीन और आरएलएम को दो सीटें मिली हैं. महागठबंधन से आरजेडी तीन सीटें और भाकपा-माले को दो सीट मिली है. वहीं एक सीट बसपा के पास गई है.
2020 में पटना प्रमंडल का परिणाम: 2020 में पटना प्रमंडल के परिणाम की बात करें तो यहां के नतीजे महागठबंधन के पक्ष में थे. पटना प्रमंडल की 29 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थी. वहीं एनडीए ने 13 सीटों पर कब्जा किया था. एक सीट बसपा के खाते में गई थी.
पटना प्रमंडल की 18 सीटें आरजेडी के खाते में गई थीं. वहीं 6 सीटों पर भाकपा माले और 5 सीटों पर कांग्रेस को जीच मिली थी. इसी तरह से एनडीए में बीजेपी ने 8, जेडीयू ने 5 सीट पर जीत दर्ज की थी.
सारण प्रमंडल ने किसका दिया साथ?: सारण प्रमंडल में तीन जिले सारण, गोपालगंज और सिवान आते हैं. 24 सीटें सारण प्रमंडल में हैें. इनमें सबसे अधिक सीटें सारण जिले में हैं. वहीं सिवान में 8 और गोपालगंज में 6 सीटें हैं. गोपालगंज जिले से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव आते हैं.

2025 में सारण प्रमंडल में एनडीए को 20 तो महागठबंधन को चार सीटें मिली हैं. 2020 में आरजेडी को सबसे बड़ी पार्टी बनवाने में सारण की अहम भूमिका थी. प्रमंडल की 24 में से 15 सीटें पर महागठबंधन को जीत मिली थी. नौ सीटों पर एनडीए ने कब्जा किया था. दलवार आंकड़ों की बात करें तो आरजेडी 11 और कांग्रेस को एक सीट मिली, वहीं भाकपा माले को दो और माकपा को एक सीट मिली थी. बीजेपी को सात और जदयू को दो सीटें मिली थीं.
दरभंगा प्रमंडल में NDA का जलवा: बिहार के 243 सीटों में से 30 सीटें दरभंगा प्रमंडल में आती हैं. इस क्षेत्र में तीन जिले हैं. तीनों जिलों में 10-10 सीटें हैं. यह मिथिला क्षेत्र का एक हिस्सा है. इसी प्रमंडल की एक सीट से अलीनगर से लोकगायिका मैथिली ठाकुर को बीजेपी ने टिकट दिया है. 2025 में एनडीए ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं चार सीटों पर महागठबंधन ने कब्जा किया है.

2020 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा में एनडीए गठबंधन ने जबरदस्त जीत हासिल की थी. एनडीए को 30 में से 22 सीटों पर जीत मिली थी. महागठबंधन को 8 सीटें मिली थीं. बीजेपी को 11 और जेडीयू को 9 सीटें मिली थीं. वहीं वीआईपी को दो सीटें मिलीं थीं. इस चुनाव में वीआईपी एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन चुकी है. आरजेडी को 7 सीटें और माकपा को एक सीट से संतोष करना पड़ा था. कांग्रेस का खाता नहीं खुला था.स इस इलाके में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।
भागलपुर प्रमंडल में महागठबंधन का सूपड़ा साफ: भागलपुर प्रमंडल में कुल दो जिले भागलपुर और बांका आते हैं. इनमें सात सीटें भागलपुर जिले में आती हैं. बांका जिले में 5 सीटें आती हैं. विधानसभा सीटों के लिहाज से भागलपुर बिहार का सबसे छोटा प्रमंडल है.

2020 के चुनाव में भागलपुर प्रमंडल में एनडीए ने महागठबंधन को मात दी थी. एनडीए को नौ और महागठबंधन को तीन सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी को पांच, जदयू को 4 सीटें मिली थीं. वहीं आरजेडी को 2 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी.
कोसी प्रमंडल में नहीं बदला नतीजा: कोसी प्रमंडल में नतीजा 2020 की तरह ही रहा. यहां कुल 3 जिले सहरसा, मधेपुरा और सुपौल आते हैं. यहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं. पांच साटें सुपौल जिले में, चार सीटें मधेपुरा में और चार सीटें सहरसा में हैं. 2025 में कोसी प्रमंडल में एनडीए को 10 और महागठबंधन को 3 सीटें मिलीं हैं

कोसी प्रमंडल में 2020 में भी एनडीए को 10 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं महागठबंधन के खाते में 3 सीटें गई थीं. जदयू को 8 और जदयू को दो सीटें मिली थीं. वहीं आरजेडी को केवल तीन सीटें मिली थीं.
मुंगेर प्रमंडल में 22 सीटें: मुंगेर में कुल 6 जिले आते हैं. मुंगेर, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया, शेखपुरा और लखीसराय विधानसभा सीटें मुंगेर में आते हैं. इन छह जिलों में कुल 22 सीटें हैं. सबसे अधिक सात सीटें बेगूसराय में हैं. इसके बाद चार-चार सीटें खगड़िया और जमुई में, तीन सीटें मुंगेर में, दो-दो सीटें लखीसराय और शेखपुरा जिले में हैं. 2025 में एनडीए को 19 सीटें और महागठबंधन को तीन सीटें मिली हैं.

2020 की बात करें तो इस प्रमंडल में बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी को 5-5 सीटें मिली थीं. वहीं कांग्रेस और भाकपा को दो-दो सीटें मिली थीं. एक-एक सीट लोजपा, हम और निर्दलीय के खाते में गई थीं.
पूर्णिया प्रमंडल में NDA की लहर: पूर्णिया प्रमंडल में चार जिले अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया आते हैं. यहां कुल 24 सीटें हैं. सबसे अधिक सात-सात सीटें कटिहार और पूर्णिया जिले में हैं. अररिया जिले में 6 तो किशनगंज में चार सीटें हैं. 2025 में एनडीए को 14 सीटें तो महागठबंधन को पांच सीटें मिली हैं. वहीं एआईएमआईएम भी पांच सीटें जीतने में कामयाब रही.

मगध प्रमंडल में गजब हो गया: मगध प्रमंडल में पांच जिले आते हैं. इनमें अरवल, औरंगाबाद, जहानाबाद, गया और नवादा शामिल हैं. मगध प्रमंडल में विधानसभा की कुल 26 सीटें हैं. सबसे अधिक गया में 10 सीटें हैं. वहीं औरंगाबाद में छह, नवादा में 5, जहानाबाद में तीन और अरवल में दो सीटें हैं. 2020 में यहां एनडीए ने छह और महागठबंधन ने 20 पर कब्जा किया था. 2025 में नंबर की अदला बदली हुई और एनडीए ने 20 और महागठबंधन ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की.

2020 के चुनाव में महागठबंधन का मगध में दबदबा था. 20 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा था, जबकि एनडीए को छह सीटों से संतोष करना पड़ा था. दलवार आंकड़ों की बात करें तो महागठबंधन में शामिल आरजेडी को 15, कांग्रेस को 3 और भाकपा माले को दो सीटें मिली थीं. एनडीए में बीजेपी को महज 3 सीट और हम पार्टी को तीन सीट मिली थी. नीतीश की पार्टी को मगध में एक सीट भी नहीं मिली थी.
2020 में दलगत स्थिति?: 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. राजद को 75, भाजपा को 74, जेडीयू को 43, कांग्रेस को 19, सीपीआई माले को 12, एआईएमआईएम को 5, हम पार्टी और वीआईपी को 4-4, सीपीआई और सीपीएम को 2-2, जबकि एलजेपी और बीएसपी को एक-एक सीट पर जीत मिली थी. वहीं एक सीट पर निर्दलीय कैंडिडेट को जीत मिली थी.
2025 में दलगत स्थिति?: 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. एनडीए के खाते में 202 सीटें आई हैं. जिसमें बीजेपी को 89, जेडीयू को 85, एलजेपीआर को 19, हम पार्टी 5 और आरएलएम को 4 सीटें मिली हैं. वहीं महागठबंधन ने 35 सीटों पर कब्जा किया है. आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6, सीपीआईएम को 1, सीपीआईएमएल को 2, आईआईपी को 1, बसपा को 1 और एआएमआईएम को 5 सीटें गई हैं.
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