'बिहार के नतीजे चौंकाने वाले, कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत': तारिक अनवर
सीडब्ल्यूसी सदस्य ने कहा कि चुनावी हार के कारण चुनाव रणनीति की विस्तृत समीक्षा की आवश्यकता है।


Published : November 14, 2025 at 7:13 PM IST
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ रहे हैं. कई सीटों पर जीत की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन रुझान से लग रहा है कि एनडीए प्रजंड बहुमत की ओर बढ़ रहा है. शुक्रवार शाम तक की रुझानों के अनुसार एनडीए 200 सीटों पर जीत दर्ज करने की ओर बढ़ रहा था. महागठबंधन का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा. कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य तारिक अनवर ने आत्ममंथन करने की सलाह दी.
शुक्रवार को ईटीवी भारत से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2025 के बिहार विधानसभा के नतीजे आंखें खोलने वाले हैं. अनवर ने कहा, "यह नतीजे चौंकाने वाले हैं. ये आंखें खोलने वाले होने चाहिए. नतीजों के बाद कांग्रेस को गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है. चुनाव नतीजों की समीक्षा के लिए जल्द ही एक उच्च-स्तरीय बैठक होगी."
बिहार के कटिहार से कांग्रेस के लोकसभा सांसद अनवर ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी कुछ कठोर कदम उठाए. अनवर ने कहा, "मुझे लगता है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी सहित पूरी राज्य इकाई को ऊपर से नीचे तक नया रूप दिया जाना चाहिए." वह कृष्णा अल्लावरु का ज़िक्र कर रहे थे, जिन्हें इस साल की शुरुआत में आलाकमान ने बिहार का एआईसीसी प्रभारी बनाकर भेजा था. बाद में अल्लावरु ने अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह राजेश कुमार को राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया.

अनवर ने कहा, "मुझे लगता है कि इस चुनाव में विपक्ष की रणनीति में सब कुछ गलत था. सहयोगियों के बीच समन्वय की समस्या थी, सीटों के बंटवारे को लेकर समस्याएं थीं. टिकट वितरण में गड़बड़ी थी और यहां तक कि गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे (तेजस्वी यादव) की घोषणा भी बहुत देर से हुई."
अक्टूबर में, सीडब्ल्यूसी सदस्य ने बरबीघा सीट पर सवाल उठाया था, जहां से पार्टी नेता गजानंद शाही को टिकट नहीं दिया गया था. शाही ने 2020 का विधानसभा चुनाव उसी सीट से लड़ा था, लेकिन मात्र 113 वोटों से हार गए थे. कांग्रेस ने इस बार त्रिशूलधारी सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन वे चुनाव हार गए. राज्य के कई नेताओं ने टिकट वितरण पर सवाल उठाए, जिसे पार्टी प्रबंधकों ने हमेशा की असहमति बताकर कमतर आंक दिया.
सीडब्ल्यूसी सदस्य राज्य में कांग्रेस के प्रदर्शन से नाराज थे, लेकिन उन्होंने सत्तारूढ़ एनडीए की उसके नकारात्मक प्रचार, राज्य सरकार द्वारा महिला मतदाताओं को वित्तीय भुगतान और चुनाव आयोग द्वारा विवादास्पद मतदाता सूची संशोधन को लेकर भी आलोचना की.
अनवर ने कहा, "चुनावों से ठीक पहले और चुनावों के दौरान, एनडीए सरकार ने महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की किश्तें भेजकर उनके वोट हासिल करने की कोशिश की. चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया. ऐसा लगता है कि महिला मतदाता एनडीए को बचाने के लिए बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकलीं."
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषणों में आरोप लगाया कि अगर महागठबंधन सत्ता में आई, तो वह महिलाओं को मिलने वाले आर्थिक भुगतान बंद कर देगी. यह आरोप झूठा था, लेकिन लगता है कि लोग एनडीए के दुष्प्रचार में बह गए. कहीं न कहीं, हमारा संदेश मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा."
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आगे कहा कि राज्य की मतदाता सूची से लाखों नामों को हटाने और संक्षिप्त गहन संशोधन के तहत नए नामों को जोड़ने ने भी विपक्ष की चुनावी हार में भूमिका निभाई. अनवर ने कहा, "मतदाताओं के बीच एसआईआर एक मुद्दा था. मतदाता सूची में हेराफेरी की गई थी और नतीजे इसकी विस्तृत जांच की मांग करते हैं."
राज्य इकाई में सामंजस्य की कमी की ओर इशारा करते हुए सीडब्ल्यूसी सदस्य ने हाल ही में वरिष्ठ नेता शकील अहमद के पार्टी से इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. अनवर ने कहा, "अहमद एक वरिष्ठ नेता हैं. पार्टी को उनके अनुभव का उपयोग करना चाहिए था, लेकिन चुनाव से पहले किसी भी मुद्दे पर उनसे सलाह नहीं ली गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा."
बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए काफी ऊर्जा और संसाधन लगाए थे. फिर भी उसका प्रदर्शन बेहद खराब रहा. 243 सदस्यीय सदन में उसे केवल 5 सीटें ही मिलने की उम्मीद है. 2020 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 19 सीटें जीती थीं. 2025 में, कांग्रेस 61 सीटों पर चुनाव लड़ी. कम से कम 20 सीटें जीतने की उम्मीद कर रही थी क्योंकि उसे अपनी मांगी हुई कई सीटें मिल गई थीं.
इसे भी पढ़ेंः

