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बंपर वोटिंग के बावजूद पटना के शहरी इलाकों में कम मतदान, किसके लिए है खतरे की घंटी?

बिहार के पहले पेज के चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग होने के बावजूद पटना के शहरी इलाके में कम मतदान हुआ है. रिपोर्ट में पढ़ें वजह..

Bihar Election 2025
पटना में कम मतदान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : November 6, 2025 at 9:02 PM IST

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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में पटना जिले के शहरी विधानसभा सीट पर एक बार फिर तमाम मतदाता जागरुकता कार्यक्रम नाकाम साबित हुए हैं. आश्चर्य की बात यह रही कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का कार्यालय जिस विधानसभा क्षेत्र में है, वहीं सबसे कम मतदान हुए हैं. कुम्हरार, दीघा और बांकीपुर सीट पर 40 प्रतिशत के आसपास वोटिंग हुई है, जबकि राज्यभर में कुल 64.46% मतदान हुए हैं.

पटना के शहरी इलाकों में कम मतदान: पहले फेज के 121 विधानसभा क्षेत्रों की तुलना की जाए तो राजधानी पटना के चार विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग प्रतिशत कम रहा. शाम 5 बजे तक पटना के कुम्हरार में 39.52%, दीघा में 39.10% और बांकीपुर में 40.00% वोटिंग हुआ. पटना साहिब में 58.51% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया लेकिन यह भी बाकी अन्य सीटों की तुलना में कम है.

चारों सीटों पर है बीजेपी का कब्जा: 2020 विधानसभा चुनाव में राजधानी पटना की इन चारों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी. बांकीपुर से नितिन नवीन, कुम्हरार से अरुण सिन्हा, दीघा से संजीव चौरसिया और पटना साहिब से नंदकिशोर यादव ने जीत हासिल की थी लेकिन इस बार बीजेपी ने पटना साहिब और कुम्हरार सीट पर अपने मौजूदा विधायकों को बेटिकट कर दिया.

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बीजेपी कैंडिडेट संजीव चौरसिया अपने परिवार के साथ (ETV Bharat)

कम वोटिंग की क्या वजह?: वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय कहते हैं कि राजधानी पटना में हजारों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता थे, जिनका दो-दो जगह नाम था. यह भी कम वोटिंग का एक कारण हो सकता है. हालांकि 2020 के चुनाव में भी राजधानी पटना में अधिक वोटिंग नहीं हुई थी. उस समय मतदाताओं की संख्या भी पटना में अधिक थी और SIR भी नहीं हुआ था. ऐसे लगता है कि मतदान को लेकर मतदाता भी बहुत उत्साहित नहीं हैं.

"राजधानी पटना में जहां से पूरे राज्य का संचालन होता है. निर्वाचन आयोग के बड़े पदाधिकारी पटना बैठते हैं. निर्वाचन को लेकर तमाम तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं फिर भी राजधानी पटना में वोटिंग परसेंटेज कम होना चिंता का कारण है. 2020 के विधानसभा चुनाव में भी राज्य के अन्य विधानसभा क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत लगभग 57 प्रतिशत के आसपास था लेकिन उसे समय भी राजधानी पटना के इन तीन-चार सीटों पर वोटिंग परसेंटेज कम देखने को मिला था."- सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार

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पटना डीएम ने की वोटिंग (ETV Bharat)

कम वोटिंग परसेंटेज का पुराना नाता: वहीं, वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि शुरू से ही ग्रामीण क्षेत्र के मुकाबले शहरी क्षेत्र में वोटिंग प्रतिशत कम देखने को मिलता रहा है. इसका मुख्य कारण है कि लोगों का अभी भी वोट को लेकर सीरियस नहीं होना है. जहां तक राजधानी पटना की बांकीपुर, दीघा और कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो इन इलाकों में एलिट क्लास के लोग अपने आप को मानते हैं. जो हर चुनाव में इसी तरह मतदान को लेकर गंभीर नहीं दिखते. प्रत्याशी से भी लोग बहुत खुश नहीं दिखे, जिस वजह से मतदान से दूरी बनाई.

"वोटिंग को सीरियस नहीं लेना यह कोई विधानसभा चुनावी नहीं, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का चुनाव हो या लोकसभा का चुनाव सब में देखने को मिलता है कि इन इलाकों में वोटिंग परसेंटेज कम होता है. यह एक चिंता की भी बात है, क्योंकि सबसे बड़े अधिकार से यह लोग अपने आप को अलग कर लेते हैं. यहां के लोग प्रत्याशियों के चेहरे को लेकर ज्यादा चिंतन और मनन करते हैं और पसंद के प्रत्याशी नहीं होने के कारण यह लोग मतदान तक से अपने आप को अलग कर लेते हैं."- कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार

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मतदान केंद्र पर महिला मतदाता (ETV Bharat)

वोटिंग परसेंटेज कम के क्या मायने?: वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ संजय कुमार ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि राजधानी पटना में वोटिंग कम होना कोई नई बात नहीं है. पहले भी राजधानी पटना का वोटिंग परसेंटेज राज्य के अन्य जिलों के अपेक्षा कम ही हुआ करता था लेकिन इस बार वोटिंग परसेंटेज कम होने का मुख्य कारण जो लग रहा है, उसमें वोटरों का कैंडिडेट के प्रति उदासीनता भी मुख्य कारण दिख रहा है.

कुछ भी हो सकता है इस बार: वे कहते हैं कि कुम्हरार सीट पर कायस्थ मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है. पिछले चार टर्म से अरुण सिन्हा यहां की विधायक हुआ करते थे. इस बार उनका टिकट काटकर पिछड़ा समाज के संजय गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जिसका कायस्थ समाज विरोध कर रहा है. हालांकि बाद में बीजेपी ने बहुत हद तक डैमेज कंट्रोल करने में कामयाबी हासिल की. डॉ संजय कुमार का कहना है कि काम वोटिंग परसेंट का कभी-कभी लाभ सत्ताधारी दल को भी मिलता रहा है तो कई उदाहरण है, जिसमें कम वोटिंग परसेंट का लाभ विपक्षी दल को भी मिलता दिखा है.

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पटना में कम वोटिंग चिंताजनक (ETV Bharat)

ग्रामीण क्षेत्र में अधिक मतदान: वहीं, पटना जिले में सबसे अधिक मतदान विक्रम विधानसभा में हुआ, जहां 66.95% मतदान हुआ. पालीगंज में 63.20%, बख्तियारपुर में 62.55%, फुलवारी में 62.14%, मोकामा में 62.12%, बाढ़ में 59.56%, फतुहा में 59.32%, दानापुर में 55.27%, मसौढ़ी में 59.91%, मनेर में 58.12% मतदान हुए. पटना जिले की बात करें तो जिन विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण इलाके हैं, वहां मतदान प्रतिशत अधिक देखने को मिला है.

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पटना के ग्रामीण इलाकों में अच्छी वोटिंग (ETV Bharat)

क्या बोले सीईओ?: बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद गुंज्याल ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है. 6 बजे तक 64.46 फीसदी वोटिंग हुई है. हालांकि कुछ जगहों पर मतदाता लाइन में लगे थे, जिस वजह से वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने बताया कि मतदान के दौरान 165 बैलेट यूनिट, 169 कंट्रोल यूनिट और 480 वीवीपैट बदले गए.

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद गुंज्याल (ETV Bharat)

"वर्तमान में मतदान का आंकड़ा 64.46% है. सब कुछ अपडेट होने के एक घंटे में हम अंतिम प्रेस नोट जारी करेंगे. महिला मतदाताओं की भागीदारी बहुत अच्छी रही है. मतदान के दौरान 165 बैलेट यूनिट, 169 कंट्रोल यूनिट और 480 वीवीपैट बदले गए. अंतिम डेटा प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध होगा."- विनोद गुंज्याल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार

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