मुस्लिम बहुल सीमांचल में भारी मतदान, किसको होगा फायदा
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में रिकॉर्ड वोटिंग हुई. मतदान प्रतिशत में सीमांचल के चारों जिले आगे रहे.

Published : November 11, 2025 at 8:58 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुई. चुनाव आयोग के वोटर टर्नआउट ऐप के डेटा के अनुसार, शाम 7 बजे तक 68 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया. सीमांचल क्षेत्र में आने वाले किशनगंज (77.80 प्रतिशत) और कटिहार (77.93 प्रतिशत) में सबसे अधिक वोटिंग हुई. हालांकि, अभी अंतिम मतदान प्रतिशत आने बाकी हैं. पहले चरण में 65.08 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.
दूसरे चरण में सीमांचल क्षेत्र में हुई बंपर वोटिंग से राजनीतिक विश्लेषक भी आश्चर्यचकित हैं. इससे चुनाव नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. सीमांचल मुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है और इस क्षेत्र में विपक्षी महागठबंधन को ज्यादा फायदा हो सकता है. लेकिन प्रियरंज भारतीय का इससे उलट तर्क है.

''सीमांचल के इलाके में मुसलमानों की आबादी सबसे अधिक है. किशनगंज में तो 70% से भी अधिक मुस्लिम आबादी है. अन्य तीन जिलों में भी 40% से अधिक मुस्लिम की आबादी है. इसके कारण चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव हर बार वोटों का ध्रुवीकरण होता है. पिछले लोकसभा चुनाव में भी सीमांचल के इलाके में सबसे अधिक वोटिंग हुई थी. किशनगंज में तो मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते हैं, चाहे किसी दल का हो लेकिन अन्य तीन जिलों में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का असर दिखता है. इसके कारण बीजेपी और जदयू के उम्मीदवार भी बड़ी संख्या में यहां से जीतते हैं.''- प्रियरंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ
2020 के चुनाव में किशनगंज में करीब 64% वोटिंग हुई थी. इसी तरह कटिहार में 67.1%, अररिया में 62.3% और पूर्णिया में 62.3% मतदान हुआ था. जबकि इस बार के चुनाव में किशनगंज में 77.80%, कटिहार में 77.93%, अररिया में 69.35% और पूर्णिया में 75.71% वोटिंग हुई. ये अभी प्रोविजनल डेटा है. मतदान प्रतिशत के आधिकारिक आंकड़े बाद में जारी होंगे.

2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो दूसरे चरण की 122 सीटों में से एनडीए ने 66 सीटें जीती थीं, जबकि महागठबंधन को 49 सीटें मिली थी. AIMIM ने 5, BSP ने 1 और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने कब्जा जमाया था. 122 सीटों में से सबसे अधिक 42 सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं.
सीमांचल में कुल 24 सीटें: सीमांचल में चार जिले- किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया आते हैं. चार जिलों में कुल 24 सीटें हैं. सीमांचल में मुसलमानों की आबादी 47 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है और इस क्षेत्र की कुछ सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 40 से 70 प्रतिशत है. किशनगंज में मुस्लिम आबादी 67 प्रतिशत, कटिहार में 42 प्रतिशत, अररिया में 41 प्रतिशत और पूर्णिया में 37 प्रतिशत है.

''सीमांचल में मुस्लिम और हिंदू वोटो का ध्रुवीकरण लंबे समय से होता रहा है और वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का यह सबसे बड़ा कारण है इस बार भी कई विधानसभा सीटों पर इसके कारण ही वोटिंग अधिक हुआ है. सीमांचल की 24 विधानसभा सीटों पर ऐसे तो फैसला 14 नवंबर को देखने को मिलेगा लेकिन लड़ाई इस क्षेत्र में इस बार दिलचस्प रही है.'' - प्रियरंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ
2020 में 11 मुस्लिम उम्मीदवार जीते: 2020 के चुनाव में सीमांचल की 24 में 11 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार विजयी हुए थे. पिछले विधानसभा चुनाव में सीमांचल में भाजपा ने 8 सीटें जीती थीं और जेडीयू के खाते में चार सीटें आई थीं. जबकि महागठबंधन ने 7 सीटों पर कब्जा जमाया था, जिसमें कांग्रेस को 5 सीट और आरजेडी तथा सीपीआईएमएल को 1-1 सीट मिली थी. वहीं एआईएमआईएम ने 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. पिछले चुनाव में आरजेडी और कांग्रेस ने 11-11 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

इस साल सीमांचल की 24 सीटों में से कांग्रेस ने 12, आरजेडी ने 9 सीट, वीआईपी ने 2 और सीपीआईएमएल एक सीट पर चुनाव लड़ा. एनडीए की तरफ से भाजपा ने 11 सीट, जेडीयू ने 10 सीट और एलजेपी (रामविलास) ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे. असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम इस बार सीमांचल की कुल 24 सीटों में से 15 पर उम्मीदवार उतारे हैं.
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सीमांचल क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज पर जीत दर्ज की थी.
- 2010 में, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भाजपा के साथ गठबंधन करके भारी जीत हासिल की थी. तब मतदान प्रतिशत 52.73 रहा था और अकेले जेडीयू को 115 सीटें मिलीं.
- 2015 के चुनाव में मतदान प्रतिशत 4.18 प्रतिशत ज्यादा रहा था यानी कुल 56.91 प्रतिशत मतदान हुआ था. उस चुनाव में जेडीयू और आरजेडी गठबंधन की जीत हुई थी.
- 2020 के चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 57.29 प्रतिशत था, जो पिछले चुनाव से 0.38 प्रतिशत ज्यादा था. उस चुनाव में जेडीयू-भाजपा गठबंधन जीत हुई थी और नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने थे.
यह भी पढ़ें- Bihar election 2025: सामने आए एग्जिट पोल, बनेगी इनकी सरकार

